Lucknow Memorial Fraud Case: लखनऊ के स्मारकों में नौकरी और तबादले के नाम पर मासूमों से हुई लाखों की लूट
Lucknow Memorial Fraud Case: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के उन भव्य स्मारकों में, जो अपनी सुंदरता के लिए विख्यात हैं, एक ऐसा घिनौना खेल खेला गया जिसने मानवता को शर्मसार कर दिया है। बसपा शासन काल के पार्कों की सुरक्षा और सफाई की जिम्मेदारी संभालने वाले एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी ने (Financial Exploitation) का ऐसा जाल बुना कि उसके अपने ही साथी उसमें फंसते चले गए। यह कहानी केवल धन की हानि की नहीं है, बल्कि उस भरोसे के कत्ल की है जो एक कर्मचारी अपने सहकर्मी पर करता है।

नौकरी का झांसा और मनचाहे तबादले का फरेब
आरोपी विनय द्विवेदी ने स्मारक समिति में अपनी गहरी पैठ और रसूख का ऐसा फर्जीवाड़ा रचा कि कर्मचारी उसे सच मानने लगे। उसने चतुर्थ श्रेणी के कर्मियों को उनके बच्चों को सरकारी नौकरी दिलाने (Job Recruitment Scam) का सपना दिखाया और कई लोगों को उनकी मनचाही जगह पर तबादला कराने का झूठा आश्वासन दिया। लोग अपनी सीट सुरक्षित रखने और बेहतर भविष्य की चाहत में अपनी जीवनभर की जमा पूंजी इस ठग के हवाले करते रहे।
ठगी के शिकार बेबस कर्मचारी और उनकी गाढ़ी कमाई
इस पूरे प्रकरण में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोपी ने कुल 9 कर्मचारियों से लगभग 60.30 लाख रुपए की बड़ी रकम डकार ली। पीड़ितों की सूची में (Victims of Fraud) राधेश्याम बिंद जैसे लोग शामिल हैं जिनसे 16 लाख रुपए वसूले गए, जबकि आलोक कुमार से 9 लाख और मुमताज अहमद से 7 लाख रुपए लिए गए। शबाना, लक्ष्मीधर और जय प्रकाश जैसे अन्य कर्मचारियों ने भी अपनी मेहनत की कमाई इस उम्मीद में खो दी कि उनकी मुश्किलें आसान हो जाएंगी।
सत्ता का दुरुपयोग और रमाबाई क्षेत्र में तबादला
विनय द्विवेदी पहले अंबेडकर स्मारक के बाह्य क्षेत्र में तैनात था, लेकिन उसकी गतिविधियों को देखते हुए दिसंबर में उसका तबादला रमाबाई क्षेत्र में कर दिया गया था। उसने सैंड स्टोन ग्राइंडर के पद पर रहते हुए (Administrative Corruption) की मर्यादाओं को तार-तार कर दिया। उसकी ठगी का तरीका इतना शातिर था कि उसने क्रेडिट कार्ड की लिमिट बढ़ाने के नाम पर भी भोले-भाले कर्मचारियों को अपना निशाना बनाया।
वापस मांगने पर धमकी और अभद्र व्यवहार
जब काफी समय बीत जाने के बाद भी न तो नौकरी मिली और न ही तबादला हुआ, तो पीड़ितों ने अपने पैसे वापस मांगने शुरू किए। इस पर आरोपी ने अपना असली रंग दिखाया और पीड़ितों को (Life Threats) देना शुरू कर दिया। उसने न केवल अभद्र भाषा का प्रयोग किया, बल्कि अपनी कथित पहुंच का डर दिखाकर उन्हें चुप रहने पर मजबूर किया। जांच में पाया गया कि यह ठगी चरणबद्ध तरीके से सोची-समझी साजिश के तहत की गई थी।
एलडीए वीसी की त्वरित और कड़ी कार्रवाई
मामला प्रकाश में आते ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) के वीसी प्रथमेश कुमार ने इस पर कड़ा संज्ञान लिया। उन्होंने तत्काल प्रभाव से आरोपी सफाई कर्मी को निलंबित कर दिया है। वीसी का मानना है कि (Departmental Action) इस मामले में अत्यंत आवश्यक है क्योंकि इससे स्मारक समिति की छवि धूमिल हुई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होते ही आरोपी को सेवा से बर्खास्त कर दिया जाएगा।
भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ा संदेश
प्रशासन अब इस बात की भी गहनता से जांच कर रहा है कि क्या इस ठगी के पीछे कोई बड़ा सिंडिकेट काम कर रहा था। वीसी ने प्राधिकरण सचिव को निर्देश दिए हैं कि सभी पीड़ितों के बयान दर्ज किए जाएं और (Legal Proceedings) को तेज किया जाए। यह कार्रवाई उन सभी लोगों के लिए एक सबक है जो सरकारी तंत्र में रहकर निर्दोष लोगों की विवशता का लाभ उठाने का प्रयास करते हैं।



