LucknowMurderCase – पिता की हत्या में बेटे से पूछताछ में नए खुलासे
LucknowMurderCase – लखनऊ के बंगला बाजार में शराब कारोबारी मानवेंद्र की हत्या ने शहर को झकझोर दिया है। इस मामले में गिरफ्तार उनके बेटे अक्षत से पुलिस पूछताछ के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए हैं। जांच में संकेत मिला है कि वारदात के बाद आरोपी पहले आत्मसमर्पण करने का मन बना चुका था, लेकिन एक करीबी व्यक्ति से बातचीत के बाद उसने अपना इरादा बदल लिया। अब पुलिस उसी शख्स की भूमिका की भी पड़ताल कर रही है।

हत्या के बाद क्या हुआ
पुलिस सूत्रों के अनुसार, घटना के बाद अक्षत ने अपनी बहन को धमकाकर कमरे में बंद कर दिया था। इसके बाद उसने पिता के शव को घर के बाथरूम में ले जाकर छिपा दिया। शुरुआती पूछताछ में सामने आया है कि उसने घटनास्थल से खून के निशान मिटाने की कोशिश भी की। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी ने शव को ठिकाने लगाने की भी योजना बनाई थी।
बताया जा रहा है कि वारदात के तुरंत बाद उसने एक करीबी को फोन कर पूरी घटना की जानकारी दी और कहा कि वह थाने जाकर समर्पण करेगा। हालांकि, फोन पर हुई बातचीत के बाद उसने खुद पुलिस के पास जाने का विचार छोड़ दिया। पुलिस को संदेह है कि उसी सलाह के आधार पर गुमशुदगी दर्ज कराने की योजना बनाई गई।
गुमशुदगी की रिपोर्ट और जांच
अगले दिन आरोपी थाने पहुंचा और पिता की गुमशुदगी की तहरीर दी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। पूछताछ के दौरान बयान में विरोधाभास मिलने पर संदेह गहरा गया। लगातार सवालों के बीच आरोपी कथित तौर पर उलझता गया और अंततः हत्या की बात स्वीकार कर ली।
23 फरवरी को पुलिस टीम ने घर पहुंचकर एक ड्रम से शव बरामद किया। इस बरामदगी के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया।
सीसीटीवी और कॉल डिटेल्स पर नजर
जांच टीमों ने घर से लेकर उस मार्ग तक के 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, जहां आरोपी के जाने की आशंका थी। फुटेज में वह कई स्थानों पर अकेला वाहन चलाते हुए दिखाई दिया। फिलहाल पुलिस कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जांच पर विशेष ध्यान दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि बातचीत के ब्योरे से मामले की कड़ियां और स्पष्ट हो सकती हैं।
परिवारिक रिश्तों पर सवाल
इस घटना ने एक बार फिर पारिवारिक संबंधों में बढ़ती दरारों पर सवाल खड़े किए हैं। हाल के वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां निजी विवाद या क्षणिक आवेश ने गंभीर अपराध का रूप ले लिया। पुलिस के अनुसार, कई मामलों में कारण गुस्सा, अविश्वास या व्यक्तिगत तनाव रहे हैं।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में बढ़ता आवेग और असहिष्णुता चिंता का विषय है। बलरामपुर अस्पताल के पूर्व मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. देवाशीष शुक्ला के अनुसार, बदलती पारिवारिक संरचना और एकल परिवारों की प्रवृत्ति से भावनात्मक सहारा कम हुआ है। कामकाजी जीवनशैली के कारण माता-पिता और बच्चों के बीच संवाद घटा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल माध्यमों का अत्यधिक उपयोग भी धैर्य और संवाद क्षमता को प्रभावित कर रहा है। उनका सुझाव है कि परिवारों में खुली बातचीत और भावनात्मक समर्थन को बढ़ावा दिया जाना चाहिए, ताकि तनावपूर्ण स्थितियों को समय रहते संभाला जा सके।
पुलिस ने मामले की जांच जारी रखी है और सभी तथ्यों को इकट्ठा कर आगे की कार्रवाई की तैयारी कर रही है।



