उत्तर प्रदेश

Martyrdom – साथियों को बचाते हुए शहीद हुए कैप्टन प्रशांत चौरसिया

Martyrdom – उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के जमानियां कस्बे से ताल्लुक रखने वाले भारतीय सेना के युवा अधिकारी कैप्टन प्रशांत कुमार चौरसिया ने अपने साथियों की जान बचाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया। देहरादून में तैनाती के दौरान एक अभ्यास के बीच यह हादसा हुआ, जिसमें उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना डूबते जवानों को बचाने का प्रयास किया। सोमवार को उनका पार्थिव शरीर देहरादून से वाराणसी लाया गया, जहां सैन्य सम्मान के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई। पूरे इलाके में शोक और गर्व का माहौल एक साथ देखने को मिला।

martyr captain prashant chaurasia sacrifice

प्रशिक्षण के दौरान हुआ हादसा

जानकारी के अनुसार, कैप्टन प्रशांत देहरादून की 10वीं भैरव बटालियन में तैनात थे। 21 मार्च को विकासनगर स्थित आसन बैराज में नदी पार करने का अभ्यास चल रहा था। इसी दौरान कुछ जवान पानी के तेज बहाव में फंस गए। स्थिति गंभीर होती देख कैप्टन प्रशांत तुरंत उनकी मदद के लिए आगे बढ़े। उन्होंने कई साथियों को बचाने का प्रयास किया, लेकिन इस दौरान खुद गहरे पानी में फंस गए और वीरगति को प्राप्त हुए।

सेना की ओर से मिली जानकारी के बाद स्थानीय प्रशासन और पुलिस ने औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी कीं। देहरादून के सैन्य अस्पताल में आवश्यक कार्रवाई के बाद पार्थिव शरीर को सैन्य अधिकारियों को सौंप दिया गया।

वाराणसी में दी गई सैन्य सलामी

सोमवार सुबह वायुसेना के विशेष विमान से कैप्टन प्रशांत का पार्थिव शरीर वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचा। यहां 39 जीटीसी के अधिकारियों और जवानों ने पूरे सम्मान के साथ उन्हें श्रद्धांजलि दी और सशस्त्र सलामी दी गई। एयरपोर्ट परिसर में मौजूद लोगों ने भी नम आंखों से इस वीर सपूत को अंतिम सलाम किया।

इसके बाद सेना के वाहन से पार्थिव शरीर को उनके गृह जनपद गाजीपुर ले जाया गया। रास्ते भर जगह-जगह लोगों ने फूल बरसाकर श्रद्धांजलि अर्पित की। यह दृश्य न केवल भावुक था, बल्कि देशभक्ति की भावना से भी ओतप्रोत नजर आया।

गांव पहुंचते ही गमगीन हुआ माहौल

जैसे ही तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर जमानियां स्थित उनके घर पहुंचा, परिवार और स्थानीय लोगों का सब्र टूट गया। मां सुमन चौरसिया और पिता पुरुषोत्तम चौरसिया का रो-रोकर बुरा हाल था। पूरे इलाके में सन्नाटा छा गया और हर आंख नम दिखाई दी।

शहीद के अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़े। लोगों के हाथों में तिरंगा था और वे ‘भारत माता की जय’ के नारे लगा रहे थे। स्थानीय बाजारों ने भी स्वतः ही बंद रखकर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ अंतिम यात्रा निकाली गई, जिसमें जनसैलाब उमड़ पड़ा।

राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

शाम को पक्का बलुआ घाट पर कैप्टन प्रशांत का अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और सेना के जवानों की मौजूदगी रही। पूरे सैन्य सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई।

शहीद के छोटे भाई मयंक चौरसिया ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस भावुक क्षण में हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। उपस्थित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने भी पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।

क्षेत्र में शोक के साथ गर्व की भावना

कैप्टन प्रशांत की शहादत की खबर फैलते ही पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। हालांकि दुख के साथ-साथ लोगों के मन में गर्व भी था कि उनके इलाके का एक युवा अधिकारी देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देकर गया है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशांत बचपन से ही देश सेवा का सपना देखते थे और सेना में शामिल होने के बाद उन्होंने इसे पूरी निष्ठा से निभाया। उनका यह बलिदान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.