NCRBReport – महिलाओं से जुड़े मामलों में यूपी की सजा दर सबसे आगे…
NCRBReport – राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2024 की ताजा रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ अपराधों से जुड़े मामलों में उत्तर प्रदेश का प्रदर्शन देश के बड़े राज्यों में सबसे बेहतर बताया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में ऐसे मामलों में दोषसिद्धि दर 76.6 प्रतिशत दर्ज की गई, जो अन्य प्रमुख राज्यों की तुलना में काफी अधिक है। आंकड़ों के मुताबिक, वर्षभर में 21 हजार से अधिक आरोपियों को अदालतों ने दोषी करार दिया।

राज्य सरकार और पुलिस विभाग इसे कानून व्यवस्था, तेज जांच प्रक्रिया और विशेष अदालतों की सक्रियता का परिणाम मान रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में त्वरित कार्रवाई और प्रभावी पैरवी पर विशेष ध्यान दिया गया है।
बड़ी संख्या में मामलों का हुआ निपटारा
एनसीआरबी की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तर प्रदेश की अदालतों ने वर्ष 2024 के दौरान महिलाओं से जुड़े अपराधों के 27 हजार से ज्यादा मामलों की सुनवाई पूरी की। यह संख्या देश में सबसे अधिक बताई गई है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए अभियोजन विभाग और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय बनाया गया।
राज्य में फास्ट ट्रैक अदालतों की भूमिका को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि संवेदनशील मामलों में तेजी से सुनवाई और साक्ष्यों की मजबूत प्रस्तुति से दोषियों को सजा दिलाने में मदद मिली है।
अन्य राज्यों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन
रिपोर्ट में कई बड़े राज्यों के आंकड़ों की तुलना भी सामने आई है। इसमें उत्तर प्रदेश की दोषसिद्धि दर सबसे अधिक दर्ज की गई, जबकि कुछ राज्यों में यह आंकड़ा काफी कम रहा। आंकड़ों के अनुसार, कई राज्यों में लंबित मामलों की संख्या अधिक होने से न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हुई।
विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मामलों का पंजीकरण ही नहीं, बल्कि जांच और अदालत में प्रभावी पैरवी भी दोषसिद्धि दर बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। उत्तर प्रदेश में इस दिशा में पिछले कुछ वर्षों में लगातार सुधार देखने को मिला है।
बच्चों से जुड़े अपराधों पर भी चिंता
एनसीआरबी की रिपोर्ट में बच्चों के खिलाफ यौन अपराधों को लेकर भी महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में दर्ज अधिकांश मामलों में आरोपी पीड़ित बच्चों के परिचित, रिश्तेदार या करीबी लोग पाए गए।
वर्ष 2024 में पॉक्सो अधिनियम के तहत दर्ज हजारों मामलों के अध्ययन में सामने आया कि करीब 97 प्रतिशत मामलों में आरोपी पहले से पीड़ित के संपर्क में थे। इनमें रिश्तेदार, पड़ोसी, दोस्त और परिचित लोग शामिल हैं। विशेषज्ञ इसे सामाजिक स्तर पर गंभीर चिंता का विषय मान रहे हैं।
किशोरियों से जुड़े मामलों की संख्या अधिक
रिपोर्ट के अनुसार, पॉक्सो कानून के तहत दर्ज मामलों में सबसे अधिक पीड़ित किशोरियां थीं। विशेष रूप से 12 से 18 वर्ष आयु वर्ग की लड़कियों से जुड़े मामलों की संख्या अधिक दर्ज की गई। आंकड़ों में यह भी सामने आया कि लड़कों की तुलना में लड़कियों के खिलाफ ऐसे अपराधों की संख्या कहीं ज्यादा रही।
विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा को लेकर परिवार और समाज दोनों स्तर पर जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। स्कूलों और सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी भी ऐसे मामलों की रोकथाम में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कानून व्यवस्था पर सरकार का जोर
राज्य सरकार लंबे समय से महिलाओं और बच्चों से जुड़े अपराधों में सख्त कार्रवाई की नीति अपनाने की बात कहती रही है। अधिकारियों का दावा है कि पुलिस स्तर पर निगरानी, तकनीकी जांच और त्वरित कार्रवाई की वजह से मामलों में सुधार दर्ज हुआ है।
कानून विशेषज्ञों के अनुसार, केवल सख्त कानून बनाना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि प्रभावी जांच और समय पर न्याय भी उतना ही जरूरी है। रिपोर्ट के ताजा आंकड़े इसी दिशा में राज्य की स्थिति को दर्शाते हैं।