उत्तर प्रदेश

CyberCrime – बिहार में बढ़ते साइबर अपराध ने बढ़ाई जांच एजेंसियों की चिंता

CyberCrime – बिहार में साइबर अपराध के मामलों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो की वर्ष 2024 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में पिछले साल की तुलना में साइबर अपराध के मामलों में बड़ा उछाल देखा गया। आंकड़ों के मुताबिक 2023 की तुलना में 2024 में दर्ज मामलों की संख्या काफी बढ़ी, जिससे जांच एजेंसियों और पुलिस विभाग की चिंता बढ़ गई है।

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रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि बड़ी संख्या में मामले अब भी लंबित हैं। कई मामलों में जांच पूरी नहीं हो सकी है, जबकि कुछ ही मामलों में अदालतों से अंतिम निर्णय सामने आया है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेजी से बढ़ते डिजिटल लेनदेन और ऑनलाइन गतिविधियों के साथ साइबर अपराध के तरीके भी अधिक जटिल होते जा रहे हैं।

लंबित मामलों की संख्या बनी बड़ी चुनौती

एनसीआरबी के आंकड़ों के अनुसार राज्य में साइबर अपराध से जुड़े हजारों मामले जांच और ट्रायल के विभिन्न चरणों में लंबित हैं। उपलब्ध मामलों में से बहुत कम मामलों का अंतिम निपटारा हो सका। रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी संख्या में केस अभी भी पुलिस अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया में अटके हुए हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि साइबर अपराधों की जांच में तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल ट्रैकिंग की आवश्यकता होती है, जिसके कारण कई मामलों में समय अधिक लगता है। इसके अलावा विशेषज्ञ कर्मियों और संसाधनों की कमी भी जांच की गति को प्रभावित करती है।

ऑनलाइन ठगी के मामले सबसे अधिक

रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य में सबसे ज्यादा मामले ऑनलाइन धोखाधड़ी से जुड़े रहे। इसके अलावा आपसी विवाद, रंगदारी और डिजिटल माध्यम से यौन उत्पीड़न जैसे मामले भी सामने आए हैं।

साइबर अपराधियों द्वारा फर्जी लिंक, नकली वेबसाइट, सोशल मीडिया प्रोफाइल और डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल कर लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि आम लोगों को ऑनलाइन लेनदेन के दौरान अधिक सतर्क रहने की जरूरत है।

महिलाओं और बच्चों से जुड़े मामले भी दर्ज

एनसीआरबी रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ साइबर अपराधों के आंकड़े भी सामने आए हैं। इनमें साइबर ब्लैकमेलिंग, फर्जी प्रोफाइल बनाना और ऑनलाइन उत्पीड़न जैसे मामले शामिल हैं। विशेषज्ञों के अनुसार सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के साथ इस तरह के अपराधों में वृद्धि देखी जा रही है।

बच्चों से जुड़े साइबर अपराधों के भी कई मामले दर्ज किए गए हैं। सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखने और डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।

गिरफ्तारियां बढ़ीं, लेकिन सजा कम

रिपोर्ट के अनुसार राज्य में साइबर अपराध से जुड़े मामलों में कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि अदालतों में दोषसिद्धि के मामलों की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। कानूनी जानकारों का कहना है कि साइबर अपराधों में तकनीकी सबूत जुटाना और उन्हें अदालत में प्रभावी तरीके से प्रस्तुत करना बड़ी चुनौती होता है।

देशभर में भी साइबर अपराध से जुड़े हजारों मामले लंबित बताए गए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि डिजिटल अपराधों की बढ़ती संख्या को देखते हुए राज्यों को साइबर फोरेंसिक और तकनीकी जांच क्षमताओं को और मजबूत करने की जरूरत है।

नई तकनीक के साथ बढ़ रही चुनौती

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं। फर्जी कॉल, निवेश के नाम पर धोखाधड़ी, बैंकिंग फ्रॉड और सोशल मीडिया हैकिंग जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में आम लोगों के लिए डिजिटल सुरक्षा को लेकर जागरूक होना बेहद जरूरी माना जा रहा है।

सरकार और पुलिस विभाग की ओर से समय-समय पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि लोग ऑनलाइन ठगी और साइबर अपराध से बच सकें। विशेषज्ञों का कहना है कि तकनीकी प्रशिक्षण और तेज जांच व्यवस्था से ही इस चुनौती पर प्रभावी नियंत्रण संभव होगा।

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