PCS Officer Suspension: निलंबित PCS अधिकारी का आरोप, एडीएम परिसर को बताया ‘मिनी जेल’
PCS Officer Suspension: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े घटनाक्रम और यूजीसी के नए नियमों के विरोध में इस्तीफा देने वाले निलंबित PCS अधिकारी एवं सिटी मजिस्ट्रेट रहे अलंकार अग्निहोत्री ने खुद को प्रशासनिक दबाव में होने का दावा किया है। उन्होंने कहा है कि उन्हें एडीएम परिसर में व्यावहारिक रूप से ‘हाउस अरेस्ट’ की स्थिति में रखा गया है और उनकी आवाजाही पूरी तरह सीमित कर दी गई है। अग्निहोत्री का आरोप है कि संवैधानिक अधिकार होने के बावजूद वह परिसर से बाहर नहीं जा पा रहे हैं।

‘मौलिक अधिकारों का हो रहा हनन’
अलंकार अग्निहोत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि एडीएम कंपाउंड को एक तरह की मिनी जेल में तब्दील कर दिया गया है। उनके अनुसार, न तो वह अपनी मर्जी से बाहर जा सकते हैं और न ही सामान्य गतिविधियों के लिए परिसर छोड़ने की अनुमति मिल रही है। उन्होंने कहा कि किसी भी नागरिक को स्वतंत्र रूप से आने-जाने का अधिकार है, लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह अधिकार उन्हें व्यवहार में नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा हालात में संवैधानिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
प्रशासन ने बढ़ाई सुरक्षा व्यवस्था
इधर, प्रशासन ने मंगलवार देर रात एडीएम परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और सख्त कर दिया। मुख्य प्रवेश द्वार पर पुलिस और पीएसी के जवानों की तैनाती बढ़ा दी गई है। परिसर के एक गेट को पूरी तरह बंद कर दिया गया है, जबकि दूसरे गेट से केवल पहचान और पूछताछ के बाद ही लोगों को प्रवेश दिया जा रहा है। इसके साथ ही परिसर की निगरानी के लिए अतिरिक्त सीसीटीवी कैमरे भी लगाए गए हैं।
समर्थकों की एंट्री पर रोक
पिछले दो दिनों से अलंकार अग्निहोत्री के समर्थन में लोग एडीएम परिसर पहुंच रहे थे, लेकिन अब प्रशासन ने उनके प्रवेश पर रोक लगा दी है। परिसर के भीतर और आसपास की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, हाल के दिनों में सिटी मजिस्ट्रेट के संपर्क में रहे लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। यह भी जांच की जा रही है कि कहीं किसी बाहरी प्रभाव या उकसावे में आकर उन्होंने इस्तीफे जैसा कदम तो नहीं उठाया।
व्हाट्सएप स्टेटस से दी जानकारी
सुरक्षा कड़ी किए जाने के बाद मंगलवार शाम करीब 7:48 बजे अलंकार अग्निहोत्री ने अपना व्हाट्सएप स्टेटस अपडेट किया। इसमें उन्होंने खुद को एडीएम परिसर में हाउस अरेस्ट बताया और लिखा कि उनसे फिलहाल केवल फोन के जरिए ही संपर्क संभव है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यदि वह किसी कारण से संपर्क में न रहें, तो संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका दाखिल की जानी चाहिए।
लोकतंत्र की रक्षा की अपील
अपने स्टेटस संदेशों में अग्निहोत्री ने लोगों से लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि यदि वह अचानक अनरीचेबल हो जाएं, तो प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्रालय के साथ-साथ उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ताओं को इसकी सूचना दी जाए। एक अन्य संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि परिसर में जैमर लगाए जाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उनका बाहरी दुनिया से संपर्क सीमित किया जा सके।
अंदर से मीडिया से बातचीत
व्हाट्सएप स्टेटस के कुछ समय बाद ही अलंकार अग्निहोत्री ने एडीएम परिसर के भीतर से मीडिया से बातचीत की। उन्होंने दोहराया कि वह वर्तमान में परिसर से बाहर नहीं निकल सकते और पूरे क्षेत्र को नियंत्रित क्षेत्र की तरह संचालित किया जा रहा है। उन्होंने इसे असामान्य स्थिति बताते हुए कहा कि यह कदम उनकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर सीधा असर डालता है।
शासन स्तर पर निगरानी और निर्देश
सोमवार से लेकर मंगलवार तक पूरे घटनाक्रम पर शासन स्तर से लगातार नजर रखी गई। अधिकारियों के अनुसार, दिनभर की स्थिति से देर शाम शासन को अवगत कराया गया। इसके बाद संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि मामले का शीघ्र समाधान निकाला जाए, ताकि स्थिति और न बिगड़े। प्रशासन का कहना है कि सभी कदम कानून और व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से उठाए जा रहे हैं।
मामले पर बना हुआ है तनाव
अलंकार अग्निहोत्री के दावों और प्रशासन की कार्रवाई के बीच यह मामला अब संवैधानिक अधिकारों, प्रशासनिक अनुशासन और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ी बहस का रूप लेता दिख रहा है। आने वाले दिनों में शासन और प्रशासन की ओर से लिए जाने वाले फैसलों पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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