RailSafety – वंदेभारत पर पत्थरबाजी रोकने के लिए रेलवे ने उठाया नया कदम
RailSafety – उत्तर प्रदेश में वंदेभारत ट्रेन पर लगातार हो रही पत्थरबाजी की घटनाओं को देखते हुए रेलवे ने सख्त कदम उठाने का फैसला किया है। अब ऐसे मामलों में पकड़े गए आरोपियों की तस्वीरें रेलवे स्टेशनों पर सार्वजनिक रूप से लगाई जाएंगी। इन तस्वीरों के साथ उनके खिलाफ की गई कार्रवाई का विवरण भी दिया जाएगा, ताकि लोगों में जागरूकता बढ़े और इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

बार-बार सामने आई घटनाओं ने बढ़ाई चिंता
पिछले कुछ वर्षों में वंदेभारत ट्रेन को निशाना बनाकर पत्थरबाजी की कई घटनाएं सामने आई हैं। जुलाई 2023 से अब तक ऐसे कम से कम पांच मामले दर्ज किए जा चुके हैं। रेलवे सुरक्षा बल के अधिकारियों के अनुसार, सभी मामलों में आरोपियों को पकड़ लिया गया है। हालांकि, इन घटनाओं के पीछे बताए गए कारणों ने सभी को हैरान कर दिया है, क्योंकि कई मामलों में वजहें बेहद सामान्य या व्यक्तिगत नाराजगी से जुड़ी थीं।
आरोपियों के तर्क ने किया चौंकाया
जांच के दौरान सामने आया कि एक मामले में एक व्यक्ति ने सिर्फ यह देखने के लिए पत्थर फेंका कि ट्रेन का शीशा कैसे टूटता है। वहीं, एक अन्य आरोपी ने अपनी बकरी के ट्रेन से कट जाने के बाद गुस्से में पत्थरबाजी की। एक घटना में रास्ता पार करने में दिक्कत होने पर भी ट्रेन पर पत्थर चला दिया गया। इन वजहों ने रेलवे प्रशासन को और सतर्क कर दिया है कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त संदेश देना जरूरी है।
स्टेशनों पर लगाए जाएंगे आरोपियों के फोटो
रेलवे का मानना है कि सार्वजनिक रूप से आरोपियों की पहचान उजागर करने से इस तरह की हरकतों पर मनोवैज्ञानिक रोक लगेगी। स्टेशनों पर लगाए जाने वाले पोस्टरों में यह भी बताया जाएगा कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है। इससे न केवल लोगों में डर पैदा होगा, बल्कि रेलवे संपत्ति की सुरक्षा को लेकर जागरूकता भी बढ़ेगी।
कवच सिस्टम से बढ़ेगी सुरक्षा
इसी बीच रेलवे ने सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए कवच तकनीक को तेजी से लागू करना शुरू कर दिया है। यह एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली है, जिसका उद्देश्य ट्रेनों की टक्कर को रोकना है। गोरखपुर लोको शेड में कुछ इंजनों पर यह प्रणाली सफलतापूर्वक लगाई जा चुकी है और परीक्षण में भी यह सफल रही है।
रेल मार्गों पर तेजी से हो रहा काम
पूर्वोत्तर रेलवे के अंतर्गत कई रूट्स पर इस तकनीक को लागू करने की प्रक्रिया जारी है। बाराबंकी से गोरखपुर होते हुए छपरा तक के लंबे रेलखंड पर टावर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। कुछ हिस्सों में टावर स्थापित भी किए जा चुके हैं और आने वाले महीनों में इस सिस्टम का ट्रायल शुरू होने की संभावना जताई जा रही है।
कैसे काम करती है यह तकनीक
कवच प्रणाली जीपीएस और रेडियो फ्रीक्वेंसी के जरिए ट्रेनों की निगरानी करती है। यदि दो ट्रेनें एक ही ट्रैक पर खतरनाक दूरी तक पहुंच जाती हैं, तो यह सिस्टम स्वतः ब्रेक लगा देता है। इतना ही नहीं, आसपास के क्षेत्र में मौजूद अन्य ट्रेनों को भी अलर्ट कर दिया जाता है, जिससे दुर्घटना की आशंका काफी हद तक कम हो जाती है।
सुरक्षा और जागरूकता दोनों पर जोर
रेलवे का यह कदम केवल तकनीकी सुधार तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक स्तर पर भी बदलाव लाने की कोशिश है। अधिकारियों का मानना है कि जब तक लोग खुद जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक ऐसी घटनाओं को पूरी तरह रोकना मुश्किल होगा। इसलिए अब सख्ती और जागरूकता दोनों को साथ लेकर आगे बढ़ने की रणनीति अपनाई जा रही है।



