RentalHousing – यूपी में घरों को होटल की तरह किराए पर देने की तैयारी
RentalHousing – उत्तर प्रदेश में शहरी आवास व्यवस्था को नया रूप देने की दिशा में सरकार एक महत्वपूर्ण पहल पर विचार कर रही है। इसके तहत मकानों और फ्लैटों को होटल या सर्विस अपार्टमेंट की तरह किराए पर देने के मॉडल को बढ़ावा देने की तैयारी है। खास बात यह है कि ऐसे आवासों पर व्यावसायिक दरों के बजाय आवासीय शुल्क लागू करने का सुझाव दिया गया है, जिससे इस क्षेत्र में काम करने वालों को राहत मिल सके।

यह कदम खासतौर पर उन शहरों के लिए अहम माना जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोग नौकरी या काम के सिलसिले में बाहर से आकर बसते हैं।
नीति आयोग ने दिए सुझाव
नीति आयोग ने राज्यों को इस दिशा में काम करने के लिए कई सुझाव भेजे हैं। आयोग का मानना है कि छोटे और मध्यम शहरों में सस्ते और लचीले किराए वाले आवास की मांग लगातार बढ़ रही है।
इस मांग को देखते हुए ऐसे मकानों को बढ़ावा देने की बात कही गई है, जिन्हें दैनिक या अल्पकालिक किराए पर उपलब्ध कराया जा सके। इसके लिए नीतिगत बदलाव और कुछ नियमों में छूट देने की भी सिफारिश की गई है।
किराए के नए मॉडल को मिल सकता है बढ़ावा
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि कई निजी कंपनियां पहले से ही मकानों और फ्लैटों को लीज पर लेकर उन्हें पीजी, को-लिविंग स्पेस या सर्विस अपार्टमेंट के रूप में चला रही हैं।
हालांकि, इन इकाइयों पर पानी, बिजली और अन्य सेवाओं के लिए व्यावसायिक दरों से शुल्क लिया जाता है, जिससे संचालन की लागत बढ़ जाती है। इसीलिए सुझाव दिया गया है कि इन पर आवासीय दरें लागू की जाएं, ताकि किराएदारों और संचालकों दोनों को राहत मिल सके।
निजी निवेश को प्रोत्साहन देने की योजना
नीति आयोग ने यह भी सुझाव दिया है कि ऐसे प्रोजेक्ट्स को किफायती आवास की श्रेणी में शामिल किया जाए। इससे निजी निवेश को बढ़ावा मिलेगा और अधिक लोग इस क्षेत्र में निवेश करने के लिए आगे आएंगे।
इसके साथ ही किराए से होने वाली आय पर भी कुछ प्रोत्साहन देने की बात कही गई है, जिससे यह क्षेत्र और अधिक आकर्षक बन सके।
बड़े शहरों में बढ़ रही जरूरत
राज्य के कई प्रमुख शहरों में बड़ी संख्या में लोग बाहर से आकर रहते हैं, जिन्हें सस्ती और सुविधाजनक आवास व्यवस्था की जरूरत होती है।
ऐसे में यदि एक ही स्थान पर सुनियोजित तरीके से छोटे-छोटे फ्लैट या कमरे उपलब्ध कराए जाएं, तो लोगों को बेहतर सुविधा मिल सकती है। इससे अनियमित किराए की समस्या भी कम हो सकती है।
सरकार कर रही नीति पर काम
राज्य सरकार के स्तर पर इस दिशा में नीति बनाने की तैयारी चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि यदि इस मॉडल को लागू किया जाता है, तो शहरों में व्यवस्थित किराया बाजार विकसित हो सकता है।
इसके साथ ही रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं, खासकर उन लोगों के लिए जो छोटे स्तर पर इस तरह का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।
भविष्य में दिख सकता है असर
यदि यह योजना लागू होती है, तो इससे शहरी जीवनशैली में बदलाव देखने को मिल सकता है। किराए पर रहने वाले लोगों को अधिक विकल्प मिलेंगे और मकान मालिकों को भी नए तरीके से आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा।
फिलहाल इस प्रस्ताव पर विचार जारी है और आने वाले समय में इसके स्वरूप को अंतिम रूप दिया जा सकता है।



