उत्तर प्रदेश

Sambhal Graveyard Land Demarcation News: क्या संभल में फिर गहराएगा तनाव, कब्रिस्तान की जमीन पर नजर आया सुरक्षा का कड़ा पहरा…

Sambhal Graveyard Land Demarcation News: उत्तर प्रदेश के संभल में जामा मस्जिद के निकट स्थित कब्रिस्तान की भूमि को लेकर प्रशासन अब आर-पार के मूड में नजर आ रहा है। मौजा कोट क्षेत्र में स्थित लगभग 0.470 हेक्टेयर की इस विवादित जमीन का मंगलवार को सरकारी पैमाइश और सीमांकन किया जाना तय हुआ है। प्रशासन की इस (land revenue survey process) कार्रवाई को लेकर पूरे जिले में चर्चाओं का बाजार गर्म है और लोग उत्सुकता के साथ आने वाले घटनाक्रम का इंतजार कर रहे हैं।

Sambhal Graveyard Land Demarcation News
Sambhal Graveyard Land Demarcation News

छावनी में तब्दील हुआ जामा मस्जिद इलाका

पैमाइश की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे मस्जिद क्षेत्र को अभेद्य किले में तब्दील कर दिया गया है। सोमवार शाम को ही एसडीएम और एएसपी ने भारी पुलिस बल, पीएसी और रैपिड एक्शन फोर्स (RRF) के साथ प्रभावित इलाकों का पैदल भ्रमण कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। इस (heavy security deployment) के पीछे का मुख्य उद्देश्य किसी भी अप्रिय स्थिति को रोकना और क्षेत्र में शांति व्यवस्था बनाए रखना है ताकि सरकारी प्रक्रिया बिना किसी बाधा के पूरी हो सके।

ड्रोन और सीसीटीवी कैमरों की तीसरी आंख का पहरा

प्रशासन ने इस बार सुरक्षा के लिए पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया है। चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों को तैनात किया गया है, जो छतों और गलियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रख रहे हैं। डिजिटल निगरानी के इस दौर में (advanced surveillance technology) का उपयोग करके पुलिस उपद्रवियों को यह कड़ा संदेश देना चाहती है कि कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों की पहचान अब पल भर में संभव है।

अवैध कब्जे और इतिहास की शिकायतों का पुलिंदा

कब्रिस्तान की इस भूमि को लेकर विवाद काफी पुराना है, जिस पर लंबे समय से अवैध निर्माण के आरोप लगते रहे हैं। श्री कल्कि सेना के राष्ट्रीय संयोजक सुभाषचंद्र त्यागी की शिकायत के अनुसार, यह भूमि 1980 के दशक में पूरी तरह खाली और टीले के रूप में थी। उनका दावा है कि बीते दो-ढाई दशकों में यहां व्यवस्थित तरीके से (illegal land encroachment) को अंजाम दिया गया, जिससे कब्रिस्तान की मूल भूमि पर बड़े पैमाने पर मकान और दुकानें खड़ी हो गईं।

हिंसा के जख्म और पत्थरों की वह खौफनाक बारिश

इस जमीन की पैमाइश का एक बड़ा कारण पिछले साल नवंबर में हुई वह हिंसक घटना भी है जिसने संभल को दहला दिया था। आरोप है कि मस्जिद के सर्वे के दौरान जो पथराव हुआ, वह इन्हीं मकानों की छतों से किया गया था जो विवादित भूमि पर बने हैं। उस (communal tension history) के कड़वे अनुभवों को देखते हुए प्रशासन अब किसी भी तरह की ढील देने के पक्ष में नहीं है, क्योंकि सुरक्षा एजेंसियां मानती हैं कि इन अवैध निर्माणों का इस्तेमाल उपद्रव के लिए किया जा सकता है।

एएसपी और एसडीएम ने संभाली सुरक्षा की कमान

सोमवार शाम को सत्यव्रत पुलिस चौकी पर हुई प्रेसवार्ता में एएसपी कुलदीप कुमार ने स्पष्ट किया कि पुलिस ने मंगलवार की नापजोख के लिए सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। एसडीएम रामानुज और सीओ आलोक भाटी लगातार (district administration coordination) के माध्यम से पुलिस-पीएसी और आरआरएफ के बीच सामंजस्य बिठा रहे हैं। अधिकारियों ने जनता से अपील की है कि वे शांति बनाए रखें और राजस्व विभाग की इस कानूनी प्रक्रिया में सहयोग करें।

नान जेड-ए श्रेणी की भूमि और कानूनी पेंच

राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार, यह 0.470 हेक्टेयर भूमि नान जेड-ए श्रेणी में दर्ज है, जिसका अर्थ है कि इसका स्वरूप और स्वामित्व कानूनन विशेष श्रेणी में आता है। इस श्रेणी की भूमि पर किसी भी तरह का निजी निर्माण (legal land category issues) को जन्म देता है, जिसकी जांच अब राजस्व टीम गहराई से करने वाली है। पैमाइश के दौरान यह साफ हो जाएगा कि वास्तव में कितनी जमीन पर अतिक्रमण हुआ है और नक्शे के अनुसार कब्रिस्तान की सीमाएं कहां तक हैं।

क्या होगा पैमाइश के बाद का अगला कदम

मंगलवार को होने वाली यह नापजोख संभल की भविष्य की शांति और कानून व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि पैमाइश में अवैध निर्माण की पुष्टि होती है, तो आने वाले दिनों में ध्वस्तीकरण जैसी बड़ी कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। पूरे क्षेत्र के लोग इस (official demarcation outcome) का इंतजार कर रहे हैं, क्योंकि इसी रिपोर्ट के आधार पर जिला प्रशासन अपनी आगे की रणनीति तय करेगा और दोषियों पर शिकंजा कसेगा।

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