Stray Dog Attacks in UP 2026: मुरादाबाद में मौत का तांडव! खूंखार कुत्तों ने मासूम को तालाब में घसीटा, फिर…
Stray Dog Attacks in UP 2026: उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से एक ऐसी रूहानी तकलीफ देने वाली खबर सामने आई है, जिसने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। डिलारी थाना क्षेत्र के काजीपुरा गांव में सोमवार की शाम उस वक्त चीख-पुकार मच गई जब आवारा कुत्तों के एक झुंड ने चार साल की नन्ही बच्ची पर हमला कर दिया। इस (Horrific Animal Attack) ने न केवल एक परिवार का चिराग बुझा दिया, बल्कि प्रशासन के दावों की भी पोल खोलकर रख दी है।

खेल रही मासूम मुरसद पर टूटा काल
गांव निवासी नौशाद की चार वर्षीय बेटी मुरसद, जिसे घर में प्यार से लड्डू बुलाया जाता था, सोमवार देर शाम अपने दोस्तों के साथ घर के बाहर खेल रही थी। तभी अचानक आवारा कुत्तों का एक हिंसक झुंड वहां आ धमका। अन्य बच्चे तो अपनी जान बचाकर भागने में सफल रहे, लेकिन मासूम मुरसद उन (Bloodthirsty Stray Dogs) के चंगुल से नहीं निकल पाई। कुत्ते उसे बेदर्दी से घसीटते हुए पास के एक सुनसान तालाब की ओर ले गए।
जब तक पहुंचे परिजन, तब तक हो चुकी थी देर
बच्ची की चीखें सुनकर जब परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे, तो वहां का नजारा देखकर सबकी रूह कांप गई। कुत्तों का झुंड तालाब के किनारे बच्ची को नोच रहा था। परिजनों ने जब तक कुत्तों को भगाया, तब तक दरिंदे कुत्तों ने बच्ची का पैर नोचकर खा लिया था। इस (Fatal Child Injury) के कारण बच्ची ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। मासूम की मौत के बाद गांव में मातम और कोहराम का माहौल है।
पुलिस कार्रवाई और परिजनों का फैसला
घटना की सूचना मिलते ही डिलारी थाना प्रभारी कृष्ण कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थिति का जायजा लिया और गांव वालों से पूछताछ की। हालांकि, इस (Legal Police Action) के मामले में परिजनों ने किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। पुलिस ने शव का पंचनामा भरने की कोशिश की, लेकिन दुखी परिवार ने बिना किसी जांच के अंतिम संस्कार की बात कही है।
अमरोहा में भी कुत्तों का आतंक जारी
मुरादाबाद की इस घटना के साथ ही पड़ोसी जिले अमरोहा से भी ऐसी ही डरावनी खबरें आ रही हैं। मोहल्ला पचदरा में एक दर्जन कुत्तों ने रास्ते से गुजर रहे एक बच्चे को घेरकर गिरा दिया। गनीमत रही कि (Community Intervention Safety) की वजह से समय रहते लोग वहां पहुंच गए और कुत्तों को भगाकर बच्चे की जान बचा ली। यह पूरी वारदात पास में लगे एक सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई है, जिसे देखकर स्थानीय लोग बेहद गुस्से में हैं।
आवास विकास कॉलोनी में साइकिल सवार बच्चा निशाने पर
अमरोहा के ही आवास विकास कॉलोनी में सोमवार दोपहर एक और हमला हुआ, जहां साइकिल से जा रहे एक मासूम पर कुत्तों ने हमला बोल दिया। कुत्तों की बढ़ती संख्या और उनकी (Public Safety Concern) ने शहरी इलाकों में लोगों का निकलना दूभर कर दिया है। यहां भी लोगों की बहादुरी ने बच्चे को कुत्तों के जबड़े से छीन लिया, वरना यहां भी मुरादाबाद जैसी अनहोनी हो सकती थी।
सिद्धार्थनगर में हिंसक हुए आवारा कुत्ते
उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में भी कुत्तों का व्यवहार काफी हिंसक और डरावना हो गया है। यहां न केवल बच्चे बल्कि पालतू जानवर भी इन शिकारी कुत्तों का निशाना बन रहे हैं। पिछले तीन दिनों में एक ही मोहल्ले की पांच बकरियों को कुत्तों ने अपना शिकार बनाया है। इस (Aggressive Street Animals) की समस्या ने पशुपालकों के सामने भारी आर्थिक संकट खड़ा कर दिया है और लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं।
पालिका प्रशासन के दावों की हकीकत
सिद्धार्थनगर में नगर पालिका प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। प्रशासन का दावा है कि वे कुत्तों को पकड़ने के लिए लगातार अभियान चला रहे हैं, लेकिन धरातल पर (Civic Administration Failure) साफ नजर आ रही है। कुत्तों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती जा रही है, जिससे मोहल्ले के लोग अब अपने बच्चों को स्कूल या खेलने के लिए बाहर भेजने से कतराने लगे हैं।
बच्चों की सुरक्षा पर गहराता संकट
उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आ रही ये खबरें एक बड़े खतरे की ओर इशारा करती हैं। कुत्तों का इस तरह हिंसक होना और इंसानों, विशेषकर बच्चों को निशाना बनाना (Child Protection Crisis) की श्रेणी में आता है। प्रशासन को केवल कागजी कार्रवाई के बजाय नसबंदी और आवारा कुत्तों के सही प्रबंधन के लिए ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि फिर किसी नौशाद की ‘लड्डू’ काल का ग्रास न बने।
प्रशासन से त्वरित कार्रवाई की गुहार
इन घटनाओं ने पूरे उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं की समस्या को फिर से चर्चा के केंद्र में ला दिया है। स्थानीय निवासियों की मांग है कि (Emergency Control Measures) के तहत हिंसक हो चुके कुत्तों को तुरंत रिहायशी इलाकों से हटाया जाए। यदि जल्द ही कोई बड़ा कदम नहीं उठाया गया, तो यह खूंखार झुंड और भी मासूमों की जान ले सकते हैं। मुरादाबाद की यह हृदयविदारक घटना शासन और प्रशासन के लिए एक चेतावनी है।



