UP Board Exam Centre Distance Controversy: यूपी बोर्ड के एक फैसले ने छात्राओं के लिए खड़ा किया मुश्किलों का पहाड़, पढ़ें डिटेल में…
UP Board Exam Centre Distance Controversy: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद द्वारा यूपी बोर्ड परीक्षाओं के केंद्रों की घोषणा के बाद एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। बोर्ड ने छात्राओं की सुरक्षा और सुविधा को ताक पर रखते हुए उनके परीक्षा केंद्रों को घर से इतनी दूर बना दिया है कि अभिभावक और स्कूल प्रबंधन दोनों गहरे सदमे में हैं। जहाँ सरकारी नियम कहते हैं कि लड़कियों का परीक्षा केंद्र (Educational guidelines) के अनुसार उनके स्कूल से अधिकतम सात किलोमीटर के भीतर होना चाहिए, वहीं वास्तविकता में यह दूरी 28 किलोमीटर तक पहुंच गई है।

28 किलोमीटर का सफर और सुरक्षा की चिंता
निगोहा स्थित एसबीएन इंटर कॉलेज की छात्राओं के साथ जो हुआ, वह किसी डरावने सपने से कम नहीं है। इस कॉलेज की 45 छात्राओं का केंद्र सिसेंडी के अमिलिहा खेड़ा स्थित एक कॉलेज में बनाया गया है, जिसकी दूरी लगभग 28 किलोमीटर है। हैरत की बात यह है कि (Student safety) को नजरअंदाज करते हुए छात्रों का केंद्र मात्र आठ किलोमीटर की दूरी पर ही रखा गया है। इतनी लंबी दूरी तय करने के लिए छात्राओं को कई बसें और साधन बदलने होंगे, जो उनकी मानसिक एकाग्रता को प्रभावित कर सकता है।
राजधानी लखनऊ में दो दर्जन केंद्रों पर भारी अव्यवस्था
‘हिन्दुस्तान’ की पड़ताल में यह कड़वी सच्चाई सामने आई है कि केवल एक ही नहीं, बल्कि लखनऊ के करीब दो दर्जन परीक्षा केंद्रों को निर्धारित मानकों से काफी दूर बनाया गया है। माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इस बार (Exam administration) के तहत जिले में 120 केंद्र बनाए हैं, जहां एक लाख से अधिक परीक्षार्थी शामिल होंगे। लेकिन ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के कई प्रबंधक शिकायत कर रहे हैं कि 20 किलोमीटर से अधिक की दूरी और यातायात के साधनों की कमी परीक्षार्थियों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है।
आपत्ति के बावजूद नहीं पसीजा बोर्ड का दिल
एसबीएन इंटर कॉलेज के प्रबंधक अमरेंद्र सिंह यादव ने बताया कि उन्होंने छात्राओं के केंद्र की अत्यधिक दूरी को लेकर जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) कार्यालय में आधिकारिक आपत्ति दर्ज कराई थी। उम्मीद थी कि (Administrative correction) के जरिए केंद्रों में बदलाव किया जाएगा, लेकिन जब अंतिम सूची जारी हुई, तो केंद्र वही रहा। विभाग की इस हठधर्मी ने उन 45 छात्राओं के भविष्य को दांव पर लगा दिया है, जिन्हें अब घने कोहरे और सुबह की ठंड में मीलों का सफर तय करना होगा।
मानक बनाम हकीकत: नियमों का हुआ खुला उल्लंघन
यूपी बोर्ड के स्थापित मानकों के अनुसार, छात्राओं के लिए परीक्षा केंद्र अधिकतम 7 किलोमीटर और छात्रों के लिए 12 किलोमीटर होना चाहिए। विशेष परिस्थितियों में (Geographical constraints) को देखते हुए इस दूरी को 15 किलोमीटर तक बढ़ाया जा सकता है। लेकिन लखनऊ में इन मानकों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है। 28 किलोमीटर की दूरी न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह उन गरीब मेधावी छात्राओं के प्रति संवेदनहीनता भी है जिनके पास निजी वाहन की सुविधा नहीं है।
दृष्टिबाधित स्कूल और मोहान रोड का कठिन रास्ता
सिर्फ निगोहा ही नहीं, बल्कि रश्मिखंड स्थित सुशीला पब्लिक इंटर कॉलेज के छात्र भी परेशान हैं। इन छात्रों को 15 किलोमीटर दूर मोहान रोड स्थित राजकीय दृष्टिबाधित स्कूल भेजा गया है। इनमें से कई छात्र (Rural connectivity) के अभाव वाले क्षेत्रों में रहते हैं, जिनके लिए असल दूरी 20 किलोमीटर से अधिक हो जाएगी। हाईस्कूल के 12 छात्रों का केंद्र इतनी दूर बनाना यह दर्शाता है कि केंद्र निर्धारण की प्रक्रिया में जमीनी हकीकत को पूरी तरह नजरअंदाज किया गया है।
अभिभावकों का गुस्सा और बेटियों के भविष्य का सवाल
इस अव्यवस्था के कारण अभिभावकों में गहरा आक्रोश व्याप्त है। उनका कहना है कि आज के दौर में जब महिला सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है, तब प्रशासन बेटियों को इतनी दूर भेजने का जोखिम कैसे उठा सकता है? स्कूल प्रबंधन का मानना है कि (Academic performance) पर भी इसका बुरा असर पड़ेगा, क्योंकि छात्राएं परीक्षा देने से पहले ही लंबे सफर की थकान से चूर हो जाएंगी। अब देखना यह है कि क्या शासन इस गंभीर मुद्दे पर संज्ञान लेकर छात्राओं को राहत देने के लिए कोई आपातकालीन कदम उठाता है।



