उत्तराखण्ड

Anti-encroachment drive in Dhanbad: धनबाद में भू-माफिया का 50 करोड़ी दांव फेल, डीसी के हंटर ने चकनाचूर कीं अवैध दुकानें

Anti-encroachment drive in Dhanbad: झारखंड की कोयला राजधानी धनबाद में भू-माफिया के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि उन्हें अब कानून का कोई खौफ नहीं रहा। शहर के व्यस्ततम बिनोद बिहारी चौक पर सरकारी जमीन पर कब्जा कर रातों-रात दस पक्की दुकानें खड़ी कर दी गईं। (Illegal land occupation by land mafia) का यह खेल पिछले करीब एक महीने से खुलेआम चल रहा था, जिसकी कीमत बाजार में लगभग 50 करोड़ रुपए आंकी गई है। भू-माफिया को लगा था कि वे रसूख के दम पर इस कीमती जमीन को निगल जाएंगे, लेकिन जिला प्रशासन की पैनी नजर से वे बच नहीं पाए।

Anti-encroachment drive in Dhanbad
Anti-encroachment drive in Dhanbad
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डीसी आदित्य रंजन का चला चाबुक और ढह गईं दीवारें

अवैध निर्माण की पुख्ता जानकारी मिलते ही धनबाद के डीसी आदित्य रंजन ने कड़ा रुख अख्तियार किया। उनके निर्देश पर मंगलवार को अंचल कार्यालय और भारी पुलिस बल की टीम ने (Execution of demolition orders) को अंजाम देते हुए सभी अवैध ढांचों को मिट्टी में मिला दिया। आठ लेन रोड के किनारे सरकारी जमीन पर किए गए इस अतिक्रमण को हटाने के लिए एसडीओ लोकेश बारंगे के मार्गदर्शन में बड़ी कार्रवाई की गई। जिला प्रशासन के इस अचानक एक्शन से इलाके के अन्य अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया है।

विरोध करने पहुंची महिला को पुलिस ने सिखाया सबक

जब बुलडोजर अवैध दुकानों की दीवारें गिरा रहा था, तभी एक महिला ने वहां पहुंचकर हंगामा शुरू कर दिया। उसने उस जमीन को अपनी निजी संपत्ति बताते हुए सरकारी काम में बाधा डालने की कोशिश की। मौके पर तैनात (Women police force intervention) की टीम ने तत्परता दिखाते हुए महिला को हिरासत में ले लिया और धनबाद थाने भेज दिया। प्रशासन को इस बात के भी इनपुट मिले हैं कि किसी सिंडिकेट ने फर्जी कागजात के आधार पर इस सरकारी जमीन को किसी और को बेच दिया है, जिसकी अब गहराई से जांच की जा रही है।

सरकारी जमीन पर बिजली कनेक्शन का बड़ा फर्जीवाड़ा

इस अभियान के दौरान एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि अवैध रूप से बनाई गई इन दुकानों में बिजली का कनेक्शन भी ले लिया गया था। (Utility services fraud investigation) के तहत अब बिजली विभाग के उन अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जाएगी जिन्होंने सरकारी जमीन पर बिना मालिकाना हक देखे कनेक्शन जारी कर दिया। छापेमारी के दौरान मौके से 50 बोरी सीमेंट, स्टोन चिप्स और भारी मात्रा में निर्माण सामग्री भी जब्त की गई है, जिससे पता चलता है कि माफिया वहां और बड़ा निर्माण करने की फिराक में थे।

नोटिस की अनदेखी पड़ी कब्जाधारियों को भारी

कलेक्टर आदित्य रंजन ने स्पष्ट किया कि प्रशासन ने सीधे कार्रवाई करने के बजाय कब्जाधारियों को पहले कई बार चेतावनी दी थी। (Public notice for eviction) जारी होने के बावजूद किसी ने भी अतिक्रमण हटाने की जहमत नहीं उठाई। माफिया को लगा था कि यह मामला फाइलों में दब जाएगा, लेकिन प्रशासन ने मंगलवार को मौके पर पहुंचकर अवैध निर्माण को ध्वस्त कर सरकारी जमीन को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त करा दिया। अब इस जमीन की फेंसिंग कर इसे सुरक्षित करने की तैयारी है।

ट्रैफिक जाम और एम्बुलेंस के लिए बनेगा नया रास्ता

बिनोद बिहारी चौक शहर का एक प्रमुख केंद्र है जहां अतिक्रमण के कारण अक्सर भारी ट्रैफिक जाम की समस्या बनी रहती थी। डीसी ने बताया कि इन अवैध दुकानों की वजह से (Traffic congestion mitigation strategy) लागू करने में काफी परेशानी हो रही थी, जिससे एम्बुलेंस और स्कूली बसों को रास्ता नहीं मिल पाता था। अब जमीन खाली होने से यातायात सुगम होगा और आम जनता को जाम की समस्या से बड़ी राहत मिलेगी। कलेक्टर ने जिले के सभी सीओ को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसे ही विशेष अभियान चलाएं।

माफिया के सिंडिकेट पर प्रशासन की टेढ़ी नजर

धनबाद अंचल के प्रमुख स्थानों पर सरकारी जमीन की लूट मची हुई है, जिस पर अब प्रशासन ने नकेल कसना शुरू कर दिया है। (Action against property syndicates) को तेज करते हुए अब उन रसूखदारों की पहचान की जा रही है जो पर्दे के पीछे से इन भू-माफियाओं को संरक्षण देते हैं। कार्यपालक दंडाधिकारी नारायण राम और सीओ रामप्रवेश कुमार की टीम ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी भी पक्के या अस्थाई अवैध निर्माण को बख्शा नहीं जाएगा, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो।

धनबाद की जनता ने किया प्रशासन के कदम का स्वागत

लंबे समय बाद सरकारी जमीन पर इस तरह की बड़ी कार्रवाई को देखकर स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है। लोगों का कहना है कि (Community support for administrative action) ही वह जरिया है जिससे शहर का विकास संभव है। सरकारी जमीन पर पार्क या अन्य जनसुविधाएं विकसित करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। प्रशासन ने भी भरोसा दिलाया है कि वे किसी भी कीमत पर सार्वजनिक संपत्तियों को खुर्द-बुर्द नहीं होने देंगे और अतिक्रमण के खिलाफ यह ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति आगे भी जारी रहेगी।

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