उत्तराखण्ड

Bear Attack Panic Khadri: दो युवकों ने हिंसक भालू के पंजों से छूटने के लिए भागकर बचाई अपनी जान

Bear Attack Panic Khadri: ऋषिकेश के समीप खदरी खड़कमाफ क्षेत्र में नए साल की खुशियां उस वक्त दहशत में बदल गईं जब दो युवकों का सामना साक्षात काल से हो गया। दिल्ली फार्म गांव की शांत गली में घूम रहे एक (Wild Animal Encounter) ने युवकों के होश उड़ा दिए। जश्न मनाने घर से निकले इन लड़कों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि उनके पीछे कोई जंगली भालू लग जाएगा। यह घटना न केवल दिल दहला देने वाली है, बल्कि वन्यजीवों और मानव संघर्ष की बढ़ती घटनाओं की ओर भी इशारा करती है।

Bear Attack Panic Khadri
Bear Attack Panic Khadri
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सीसीटीवी में कैद भालू की भयानक दौड़

यह पूरी वारदात गांव में लगे सीसीटीवी कैमरों में कैद हो गई है, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि (CCTV Footage Viral) कैसे भालू ने दोनों युवकों को सड़क पर दौड़ाया। गनीमत यह रही कि पास ही मौजूद कुत्तों ने भालू पर भौंकना शुरू कर दिया, जिससे भालू का ध्यान भटक गया और वह रुक गया। यदि कुत्ते वहां मौजूद न होते, तो एक बड़ी त्रासदी घट सकती थी।

गंगा और सौंग नदी के किनारे दहशत का माहौल

बीते तीन दिनों से गंगा और सौंग नदी से सटे खदरी क्षेत्र में भालू की सक्रियता लगातार बढ़ रही है। रात के समय यह जंगली जानवर (Residential Area Intrusion) कर रहा है, जिससे ग्रामीणों में भारी खौफ है। लोग अपने बच्चों को घर से बाहर भेजने में डर रहे हैं और शाम होते ही गलियों में सन्नाटा पसर जाता है। समाजसेवी शांति प्रसाद का कहना है कि उन्होंने दशकों में पहली बार भालू को आबादी के बीच इस तरह बेखौफ घूमते देखा है।

वन विभाग की गश्त और भालू की तलाश

ग्रामीणों की शिकायत पर वन विभाग की ऋषिकेश रेंज की टीमें सक्रिय हो गई हैं। वनकर्मी दिन के समय झाड़ियों और पास के जंगलों में (Forest Department Search Operation) चला रहे हैं, जबकि रात में खदरी, ठाकुरपुर, खैरीखुर्द और श्यामपुर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में गश्त बढ़ा दी गई है। वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे रात के समय अकेले बाहर न निकलें और टॉर्च व डंडे का साथ जरूर रखें।

ट्रैंककुलाइज करने और पिंजरे की तैयारी

भालू के लगातार आबादी में आने के कारण अब उसे पकड़ना अनिवार्य हो गया है। ऋषिकेश के रेंजर जीएस धमांदा ने बताया कि भालू को (Bear Tranquilization Process) के तहत बेहोश कर पकड़ने की अनुमति मांगी गई है। विभाग ने पिंजरा लगाने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है ताकि भालू को सुरक्षित पकड़कर वापस गहरे जंगल में छोड़ा जा सके। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी प्रकार की जनहानि होने से पहले ही स्थिति पर काबू पा लिया जाए।

पलायन और वन्यजीव संघर्ष की दोहरी मार

उत्तराखंड के गांवों में यह समस्या विकराल होती जा रही है। एक तरफ जहां गांवों से पलायन के कारण अर्थी को कंधा देने वाले नहीं मिल रहे, वहीं दूसरी ओर (Human-Wildlife Conflict) के कारण जो लोग बचे हैं, वे भी असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। खदरी की यह घटना चेतावनी है कि यदि जंगली जानवरों के प्राकृतिक आवास की रक्षा नहीं की गई, तो वे भोजन की तलाश में इसी तरह आबादी वाले क्षेत्रों का रुख करते रहेंगे और लोगों की जान जोखिम में पड़ती रहेगी।

वन कर्मियों की रात्रि गश्त और सुरक्षा के इंतजाम

रेंजर धमांदा ने पुष्टि की है कि 31 दिसंबर की रात करीब दस बजे भालू ने गांव की गलियों में धमक दी थी। भालू के हिंसक व्यवहार को देखते हुए (Emergency Patrol Teams) को तैनात किया गया है। वन विभाग के अधिकारी स्वयं स्थिति की निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों से अनुरोध किया गया है कि वे किसी भी जंगली जानवर को देखने पर उसे पत्थर न मारें या परेशान न करें, बल्कि तुरंत वन विभाग को सूचित करें ताकि विशेषज्ञ टीम उसे संभाल सके।

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