CharDhamYatra – हाईकोर्ट सख्त, यात्रा व्यवस्था सुधारने के दिए निर्देश
CharDhamYatra – उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चारधाम यात्रा से जुड़ी व्यवस्थाओं और पशुओं के साथ हो रहे व्यवहार को लेकर दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और यात्रा मार्ग पर इस्तेमाल होने वाले पशुओं की सुरक्षा दोनों को समान प्राथमिकता दी जानी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि मौजूदा व्यवस्थाओं की समीक्षा कर उन्हें और बेहतर बनाने की जरूरत है।

अदालत ने उठाए कई अहम सवाल
मुख्य न्यायाधीश मनोज गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान सरकार से पूछा कि क्या वर्तमान व्यवस्था जमीन पर प्रभावी तरीके से लागू हो रही है। अदालत ने यह भी कहा कि सिर्फ कागजी नियम बनाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनका सही पालन सुनिश्चित करना जरूरी है, ताकि यात्रा के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो।
पशुओं के लिए सुविधाओं पर जोर
याचिकाकर्ताओं की ओर से यह सुझाव दिया गया कि यात्रा मार्ग पर घोड़े और खच्चरों जैसे पशुओं के लिए चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। इस पर कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि वह इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार करे। अदालत का मानना है कि पशुओं की स्थिति सुधारने से न केवल उनका संरक्षण होगा, बल्कि यात्रा भी अधिक व्यवस्थित हो सकेगी।
सरकार ने दी नई SOP की जानकारी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने बताया कि चारधाम यात्रा को सुचारु बनाने के लिए नई SOP तैयार की जा चुकी है। इसमें श्रद्धालुओं की सुविधा और पशुओं की देखभाल से जुड़े कई प्रावधान शामिल किए गए हैं। हालांकि, कोर्ट ने इस पर संतोष जताने के बजाय कहा कि SOP की फिर से समीक्षा की जाए और जरूरत के अनुसार इसमें बदलाव किए जाएं।
भीड़ और यातायात प्रबंधन पर भी ध्यान
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यात्रा के दौरान भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना जरूरी है। इन सभी पहलुओं पर संतुलित और प्रभावी योजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति से आसानी से निपटा जा सके।
निगरानी व्यवस्था की मांग
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि मौजूदा नियमों का सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि एक निगरानी समिति बनाई जाए, जो पूरे यात्रा मार्ग पर व्यवस्थाओं की लगातार समीक्षा करे। कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सरकार को आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा है।
अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देशों के अनुपालन के लिए समय दिया है और मामले की अगली सुनवाई तीन सप्ताह बाद निर्धारित की है। माना जा रहा है कि अदालत की सख्ती के बाद आगामी चारधाम यात्रा में व्यवस्थाओं में सुधार देखने को मिल सकता है।



