CM Dhami Chintan Shivir: चिंतन शिविर में मुख्यमंत्री धामी ने अधिकारियों को दी सख्त चेतावनी
CM Dhami Chintan Shivir: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में आयोजित चिंतन शिविर के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का एक बेहद सख्त और अनुशासित रूप देखने को मिला। मुख्यमंत्री ने राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करते हुए स्पष्ट किया कि शासन की कार्यप्रणाली में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में कहा कि वह किसी भी निर्देश को भूलते नहीं हैं और सालों-साल याद रखते हैं कि किस अधिकारी ने दिए गए काम को कितनी निष्ठा से पूरा किया है। सिविल सर्विसेज इंस्टीट्यूट में आयोजित इस (Administrative Leadership) कार्यक्रम में सीएम ने करीब 45 मिनट तक अपना संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने एक कठोर प्रशासक के साथ-साथ एक संवेदनशील जनसेवक की छवि भी प्रस्तुत की।

चुनौतियों को अवसर में बदलने का मंत्र
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत में अधिकारियों को जनता के प्रति जवाबदेह बनने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि एक अधिकारी का असली कर्तव्य जनकेंद्रित योजनाओं को धरातल पर उतारना है ताकि समाज के अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को भी सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक जीवन में आने वाली मुश्किलों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में विकास के मार्ग में कई बाधाएं हैं, लेकिन एक कुशल अधिकारी वही है जो इन (Bureaucratic Challenges) चुनौतियों को अवसर में बदल दे। उन्होंने निर्भीक होकर काम करने की प्रेरणा देते हुए कहा कि जब आप साहस के साथ खड़े होते हैं, तो हर मुश्किल का रास्ता अपने आप बदल जाता है और लक्ष्य प्राप्ति आसान हो जाती है।
निर्देशों की अनदेखी पर सीएम ने जताई नाराजगी
चिंतन शिविर में उस वक्त सन्नाटा पसर गया जब मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से उनके पहले तैनाती स्थल पर जाने के बारे में सवाल किया। गौरतलब है कि सालभर पहले सीएम ने अफसरों को अपने प्रथम नियुक्ति वाले क्षेत्र को गोद लेने और वहां के विकास पर ध्यान देने का निर्देश दिया था। जब अधिकतर अधिकारी इस सवाल पर कोई सकारात्मक उत्तर नहीं दे सके, तो मुख्यमंत्री की त्यौरियां चढ़ गईं। उन्होंने कड़ी (Policy Implementation) नाराजगी जताते हुए कहा कि निर्देशों का अक्षरशः पालन होना अनिवार्य है। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी दी कि समय तो बीत जाएगा, लेकिन आपकी नीतियां और कार्य करने का तरीका ही आपकी पहचान बनेगा, इसलिए सरकार द्वारा दी गई जिम्मेदारियों को गंभीरता से लें।
कर्मों का हिसाब और आध्यात्मिक संदेश
प्रशासकीय निर्देशों के साथ-साथ मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नैतिकता और आध्यात्मिकता का पाठ भी पढ़ाया। उन्होंने बहुत ही सरल शब्दों में कहा कि ईश्वर के दरबार में हर छोटे-बड़े काम का हिसाब रखा जाता है। सीएम के अनुसार, हम जो भी अच्छा काम करते हैं या गरीब जनता की मदद करते हैं, वह भगवान के बैंक में हमारे बैलेंस को बढ़ाता है। यदि कोई अधिकारी जानबूझकर (Public Service) कार्यों में अड़ंगे लगाता है या किसी जरूरतमंद की सहायता नहीं करता, तो भले ही उसे प्रत्यक्ष रूप से सजा न मिले, लेकिन उसका नैतिक मूल्य शून्य हो जाता है। उन्होंने अधिकारियों को आत्मचिंतन करने और नेक नियत से काम करने पर जोर दिया।
जनसेवा में मानवीय संवेदनाओं का महत्व
अपने संबोधन के समापन सत्र में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी काफी भावुक नजर आए। उन्होंने अधिकारियों से साझा किया कि जनसेवा के दौरान उनसे कभी कोई अनजाने में गलती हो जाती है, तो उन्हें रातभर नींद नहीं आती और वे अंदर से कांप उठते हैं। उन्होंने कहा कि गलती का अहसास होने पर वे ईश्वर से क्षमा मांगते हैं और फिर से नई ऊर्जा के साथ जनता के कल्याण में जुट जाते हैं। मुख्यमंत्री ने (Ethical Governance) अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे भी इसी भावना के साथ कार्य करें कि उनके किसी भी निर्णय से किसी निर्दोष या गरीब व्यक्ति का अहित न हो। चिंतन शिविर में नीति आयोग के विशेषज्ञों और सेतु आयोग के पदाधिकारियों ने भी राज्य के भविष्य की रणनीति पर अपने विचार साझा किए।



