DestinationWedding – श्मशान घाट पर हुई शादी की रस्में, अल्मोड़ा में छिड़ा विवाद…
DestinationWedding – उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से एक अनोखा लेकिन विवादित मामला सामने आया है, जहां एक डेस्टिनेशन वेडिंग के दौरान श्मशान घाट पर शादी की रस्में निभाई गईं। कॉर्बेट नेशनल पार्क के नजदीक मरचूला क्षेत्र में दो नदियों के संगम पर स्थित इस स्थान पर जयमाला का आयोजन किया गया। घटना का वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर नाराजगी बढ़ गई है और मामले ने चर्चा का विषय बना लिया है।

नदी संगम की लोकेशन बनी आयोजन की वजह
जानकारी के अनुसार, शादी के लिए आए कुछ पर्यटक इलाके में सुंदर लोकेशन की तलाश कर रहे थे। मरचूला में रामगंगा और बदनगढ़ नदियों के संगम का दृश्य उन्हें काफी आकर्षक लगा। इसी वजह से उन्होंने वहीं शादी की कुछ रस्में आयोजित करने का निर्णय लिया। बताया जा रहा है कि पास के एक रिजॉर्ट में ठहरे इन लोगों ने घाट पर सजावट कर जयमाला की रस्म पूरी की।
श्मशान घाट होने की जानकारी के बावजूद आयोजन
रिजॉर्ट प्रबंधन का कहना है कि उन्होंने पर्यटकों को पहले ही यह स्पष्ट कर दिया था कि जिस स्थान का चयन किया जा रहा है, वह श्मशान घाट है और वहां अंतिम संस्कार होते हैं। इसके बावजूद पर्यटकों ने अपनी योजना नहीं बदली और समारोह आयोजित किया। रविवार को घाट पर सजावट के साथ शादी की रस्में पूरी की गईं, जिसका वीडियो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया।
वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय विरोध
जैसे ही यह वीडियो लोगों के सामने आया, इलाके में इसको लेकर असंतोष देखने को मिला। स्थानीय निवासियों ने इसे धार्मिक परंपराओं के विपरीत बताया है। उनका कहना है कि जहां अंतिम संस्कार किए जाते हैं, वहां इस तरह के मांगलिक कार्यक्रम आयोजित करना आस्था और संस्कृति के प्रति असंवेदनशीलता दर्शाता है। कई लोगों ने यह भी सवाल उठाया कि इस तरह के आयोजन से सामाजिक मर्यादाओं पर असर पड़ता है।
प्रशासन ने जांच की बात कही
स्थानीय प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के संकेत दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि सार्वजनिक स्थलों पर किसी भी प्रकार का आयोजन करने के लिए अनुमति आवश्यक होती है। यदि बिना अनुमति इस तरह का कार्यक्रम आयोजित किया गया है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन ने कहा है कि शिकायत मिलने या तथ्य स्पष्ट होने पर आगे की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
धार्मिक मान्यताओं और नियमों पर उठे सवाल
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी इस घटना पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्मशान घाट जैसे स्थानों पर शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। इसके साथ ही यह इलाका पर्यावरणीय दृष्टि से भी संवेदनशील है, जहां इस तरह की गतिविधियों पर नियंत्रण जरूरी है। इस घटना ने एक बार फिर पर्यटन और स्थानीय परंपराओं के बीच संतुलन बनाए रखने की जरूरत को उजागर किया है।