Doon Medical College Ragging Case 2026: दून मेडिकल कॉलेज में सीनियर्स ने की गुंडागर्दी, बेल्ट-चप्पलों से जूनियर को कूटा, 9 छात्रों को धक्के मारकर निकाला
Doon Medical College Ragging Case 2026: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून स्थित दून मेडिकल कॉलेज से एक ऐसी शर्मनाक खबर सामने आई है जिसने चिकित्सा शिक्षा जगत को हिला कर रख दिया है। कॉलेज के ब्वॉयज हॉस्टल में जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग की दो अलग-अलग और बेहद हिंसक घटनाओं का पर्दाफाश हुआ है। (Campus Disciplinary Standards) के उल्लंघन के इस गंभीर मामले में कॉलेज प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए कुल नौ छात्रों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की है। इन छात्रों पर न केवल निष्कासन की गाज गिरी है, बल्कि भारी आर्थिक दंड भी लगाया गया है।

बेल्ट और चप्पलों से मासूम छात्र की बेरहमी से पिटाई
रैगिंग का यह काला खेल 12 जनवरी को शुरू हुआ जब 2025 बैच के एक नवोदित छात्र को सीनियर्स ने अपनी हवस का शिकार बनाया। आरोप है कि वरिष्ठ छात्रों ने जूनियर छात्र की बेल्ट और चप्पलों से जमकर पिटाई की और उस पर जबरन बाल कटवाने का अनैतिक दबाव बनाया। इस (Violent Physical Assault) की घटना ने पीड़ित छात्र को मानसिक रूप से इतना तोड़ दिया कि उसने अपनी आपबीती सोशल मीडिया और प्रशासन के सामने रखी। घटना के बाद से ही हॉस्टल परिसर में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया था।
एंटी रैगिंग कमेटी की रिपोर्ट और प्राचार्य का कड़ा फैसला
इन घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज की एंटी रैगिंग कमेटी ने त्वरित जांच शुरू की और सोमवार को अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्राचार्य को सौंप दी। प्राचार्य डॉ. गीता जैन ने रिपोर्ट के आधार पर (Strict Punitive Measures) लागू करते हुए छात्र की पिटाई करने वाले दो मुख्य आरोपियों को पूरे शैक्षणिक सत्र और इंटर्नशिप की अवधि के लिए हॉस्टल से बाहर का रास्ता दिखा दिया है। साथ ही इन दोनों छात्रों को दो माह के लिए कक्षाओं से भी निष्कासित कर दिया गया है।
भारी जुर्माना और सात अन्य छात्रों पर भी गिरी गाज
अनुशासनहीनता की सजा केवल निष्कासन तक ही सीमित नहीं रही। मुख्य आरोपियों पर 50-50 हजार रुपये का भारी जुर्माना भी लगाया गया है ताकि भविष्य में कोई ऐसी हिमाकत न करे। वहीं दूसरी घटना में, सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चिह्नित किए गए सात अन्य छात्रों को भी (Institutional Suspension Policy) के तहत तीन माह के लिए हॉस्टल और एक-एक माह के लिए कक्षाओं से सस्पेंड कर दिया गया है। कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि रैगिंग को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जाएगी।
सीनियर्स का दुस्साहस और जूनियर को बनाया ढाल
रैगिंग की इन वारदातों में सीनियर छात्रों की क्रूरता की सारी हदें पार हो गईं। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि आरोपियों ने न केवल खुद जूनियर छात्र को पीटा, बल्कि उसके साथ रहने वाले एक अन्य जूनियर को डरा-धमकाकर अपने ही दोस्त की पिटाई करने पर मजबूर किया। इस (Psychological Trauma Impact) के कारण जूनियर छात्र गहरे सदमे में हैं। कमेटी ने पूरी कार्रवाई की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए वीडियो रिकॉर्डिंग और पुख्ता दस्तावेज सुरक्षित रखे हैं।
कॉलेज के इतिहास की अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई
2016 में अपनी स्थापना के बाद से दून मेडिकल कॉलेज में रैगिंग का यह सबसे बड़ा और गंभीर मामला माना जा रहा है। हालांकि साल 2023 में भी निष्कासन की (Student Misconduct History) दर्ज हुई थी, लेकिन इस बार की गई कार्रवाई ने पुराने सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उस समय दो छात्रों पर एक लाख का जुर्माना लगा था, लेकिन वर्तमान मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एनएमसी के दबाव में कॉलेज ने व्यापक स्तर पर डंडा चलाया है।
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग का कड़ा रुख और नोटिस
मेडिकल शिक्षा की सर्वोच्च संस्था, राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने इस पूरे मामले पर मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने कॉलेज प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर (National Medical Regulations) के उल्लंघन को लेकर गहरी नाराजगी जताई है। एनएमसी ने प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि घटना के बाद त्वरित कार्रवाई क्यों नहीं की गई और इस संबंध में आयोग को समय पर सूचित क्यों नहीं किया गया।
सात दिन की देरी ने बढ़ाई कॉलेज की किरकिरी
घटना 12 जनवरी की थी और शिकायत 13 जनवरी को ही कर दी गई थी, लेकिन अंतिम फैसला आने में पूरे सात दिन लग गए। सूत्रों का कहना है कि कॉलेज के अधिकारियों के बीच (Administrative Coordination Issues) की कमी के कारण जांच प्रक्रिया खिंचती चली गई। रविवार को जब मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने लगा और किरकिरी बढ़ी, तब जाकर चीफ वार्डन और प्राचार्य ने फाइलों को आगे बढ़ाया और सोमवार देर शाम आदेश जारी किए जा सके।
एनएमसी के रडार पर कॉलेज प्रबंधन की सुस्ती
आयोग ने अपने नोटिस में कॉलेज प्रशासन से यह भी पूछा है कि रैगिंग रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम क्यों नहीं थे। एनएमसी द्वारा (Educational Compliance Audit) की संभावना के बाद अब कॉलेज प्रशासन के हाथ-पांव फूल रहे हैं। नोटिस में साफ तौर पर पूछा गया है कि छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में देरी के लिए कौन जिम्मेदार है। इसी दबाव का नतीजा है कि अब हॉस्टल की सुरक्षा और सीसीटीवी निगरानी को और सख्त करने की तैयारी की जा रही है।
खौफ के साये में भविष्य के डॉक्टर
इस पूरी घटना ने मेडिकल कॉलेजों की उस कड़वी सच्चाई को फिर से उजागर कर दिया है जहां डॉक्टर बनने आए छात्र गुंडागर्दी का शिकार हो रहे हैं। दून मेडिकल कॉलेज की (Safe Learning Environment) अब सवालों के घेरे में है। पीड़ित छात्रों ने बयान दिया है कि वे अभी भी डरे हुए हैं और उन्हें अपनी पढ़ाई प्रभावित होने का डर सता रहा है। अब देखना यह होगा कि इतनी बड़ी कार्रवाई के बाद क्या कैंपस में वास्तव में शांति लौट पाती है या सीनियर्स के मन में कानून का डर बैठता है।



