उत्तराखण्ड

EducationNews – शिक्षा निदेशक प्रकरण में गिरफ्तारी की मांग तेज

EducationNews – बेसिक शिक्षा निदेशक के साथ कथित मारपीट के मामले ने उत्तराखंड के शिक्षा विभाग में गहरी नाराज़गी पैदा कर दी है। इस घटना के विरोध में अधिकारी और कर्मचारी भाजपा विधायक उमेश शर्मा काऊ की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े हुए हैं। मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव स्तर पर हुई बातचीत के बाद भी आंदोलनरत कर्मचारियों ने अपना रुख नरम नहीं किया। सोमवार को निदेशक स्तर से लेकर चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों तक ने सामूहिक कार्य बहिष्कार करते हुए निदेशालय परिसर में धरना दिया और साफ संकेत दिया कि बिना ठोस कार्रवाई वे पीछे हटने वाले नहीं हैं।

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आंदोलन ने पकड़ा व्यापक रूप

धरना स्थल पर आयोजित सभा में कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधियों ने कहा कि मामले के मुख्य आरोपी विधायक हैं, इसलिए गिरफ्तारी अनिवार्य है। उन्होंने दो टूक कहा कि किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं होगा। कर्मचारियों का कहना है कि यदि एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ इस तरह की घटना हो सकती है तो अन्य कर्मचारियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े होते हैं। इसी मुद्दे को लेकर विभाग में एकजुटता देखने को मिली और अधिकांश कार्यालयों में कामकाज प्रभावित रहा।

मंगलवार को भी जारी रहेगा कार्य बहिष्कार

बैठक में यह निर्णय लिया गया कि आंदोलन अगले दिन भी जारी रहेगा। सुबह 11 बजे कोर कमेटी की बैठक बुलाई गई है, जिसमें आगे की रणनीति तय की जाएगी। कर्मचारियों का कहना है कि वे केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्पष्ट और ठोस कार्रवाई चाहते हैं। यदि उनकी मांगों पर संतोषजनक कदम नहीं उठाए गए तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जा सकता है।

मुख्यमंत्री से वार्ता का विवरण सार्वजनिक

संयुक्त मोर्चा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हुई बातचीत का ब्यौरा भी साझा किया। मोर्चा अध्यक्ष राम सिंह चौहान के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल ने विधायक समेत सभी आरोपियों की गिरफ्तारी, सार्वजनिक माफी और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सख्त एसओपी लागू करने की मांग रखी। उनका दावा है कि मुख्यमंत्री ने मांगों पर सकारात्मक रुख दिखाया, हालांकि गिरफ्तारी को लेकर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की गई।

मुख्य सचिव से भी नहीं निकला ठोस समाधान

शाम को प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य सचिव आनंदबर्द्धन से मुलाकात कर सरकारी दफ्तरों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने पर चर्चा की। कर्मचारियों का कहना है कि बातचीत के बावजूद अभी तक ठोस समाधान सामने नहीं आया है। मोर्चा के महामंत्री मुकेश बहुगुणा ने कहा कि केवल आश्वासन से काम नहीं चलेगा, लिखित और प्रभावी कार्रवाई जरूरी है।

सुरक्षा व्यवस्था पर सरकार का आश्वासन

मुख्यमंत्री धामी ने सोमवार को कहा कि राज्य के सभी सरकारी कार्यालयों में तैनात अधिकारियों, कर्मचारियों और शिक्षकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने मुख्य सचिव को निर्देश दिए हैं कि कार्यस्थलों की सुरक्षा के लिए विस्तृत एसओपी तैयार की जाए। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकारी कर्मचारियों के सम्मान और सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा।

कर्मचारियों की चिंता और आगे की राह

आंदोलनकारी कर्मचारियों का कहना है कि यह मुद्दा केवल एक घटना तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे तंत्र की सुरक्षा और गरिमा से जुड़ा है। उनका मानना है कि यदि समय रहते कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो इससे गलत संदेश जाएगा। फिलहाल सबकी नजर मंगलवार को होने वाली कोर कमेटी की बैठक पर टिकी है, जहां आंदोलन की दिशा और तीव्रता पर फैसला लिया जाएगा। शिक्षा विभाग में कामकाज कब सामान्य होगा, यह अब सरकार और कर्मचारियों के बीच बनने वाले सहमति सूत्र पर निर्भर करेगा।

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