उत्तराखण्ड

MDDA Tender Process Dispute Uttarakhand: सरकारी दफ्तर में हुआ ‘दबंगईओं’ का नंगा नाच, करोड़ों के टेंडर पर आपस में भिड़े ठेकेदार…

MDDA Tender Process Dispute Uttarakhand: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में शुक्रवार को विकास कार्यों के लिए होने वाली निविदा प्रक्रिया के दौरान मर्यादाओं की धज्जियां उड़ गईं। मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (MDDA) के कार्यालय में टेंडर डालने पहुंचे ठेकेदार सार्वजनिक रूप से आपस में भिड़ गए। यह विवाद महज (Professional Competition) की सीमा लांघकर मारपीट और हंगामे में तब्दील हो गया। देखते ही देखते सरकारी दफ्तर का शांत माहौल तनाव और चीख-पुकार में बदल गया, जिससे वहां मौजूद कर्मचारी और अधिकारी हतप्रभ रह गए।

MDDA Tender Process Dispute Uttarakhand
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क्षेत्रवाद की आग में सुलगता विकास

प्राधिकरण की ओर से दून शहर, विकासनगर और ऋषिकेश के लिए लगभग पचास करोड़ रुपये की लागत वाले डेढ़ सौ से अधिक विकास कार्यों के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए थे। विवाद की असली जड़ (Regional Contractor Conflicts) तब बनी जब विकासनगर और ऋषिकेश के ठेकेदारों ने देहरादून के ठेकेदारों को रोकने का प्रयास किया। कथित तौर पर बाहरी क्षेत्र के ठेकेदारों ने दबाव बनाया कि हर ठेकेदार केवल अपने ही क्षेत्र के विकास कार्यों के लिए बोली लगाए, जो कि नियमों के पूरी तरह खिलाफ था।

दबंगई और सिंडिकेट का कड़वा सच

यह पहली बार नहीं है जब सरकारी टेंडर प्रक्रिया में दबंगई और सिंडिकेट की बात सामने आई हो। नगर निगम और एमडीडीए जैसे बड़े विभागों में कुछ प्रभावशाली ठेकेदारों का (Syndicate Influence Patterns) इतना मजबूत हो गया है कि वे नए या अन्य क्षेत्रों के ठेकेदारों को काम लेने से रोकते हैं। अधिकारियों के साथ मिलीभगत के आरोपों के बीच यह सिंडिकेट सरकार को करोड़ों रुपये की राजस्व हानि पहुंचा रहा है, क्योंकि प्रतिस्पर्धा न होने से टेंडर की कीमतें कृत्रिम रूप से प्रभावित होती हैं।

उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी का सख्त एक्शन

हंगामे और मारपीट की सूचना मिलते ही एमडीडीए उपाध्यक्ष बंशीधर तिवारी ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने अनुशासनहीनता को (Administrative Disciplinary Actions) के दायरे में लाते हुए तत्काल प्रभाव से पूरी टेंडर प्रक्रिया को निरस्त करने का आदेश दे दिया। उपाध्यक्ष ने दो टूक शब्दों में कहा कि प्राधिकरण कार्यालय में किसी भी प्रकार की गुंडागर्दी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने हंगामा करने वाले ठेकेदारों को चिह्नित कर उन्हें ब्लैकलिस्ट करने के निर्देश जारी किए हैं ताकि भविष्य में वे सरकारी कार्यों में हिस्सा न ले सकें।

खुले बाजार और प्रतिस्पर्धा का अधिकार

उपाध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है और कोई भी पात्र ठेकेदार कहीं भी काम लेने के लिए स्वतंत्र है। सरकारी नियमों के अनुसार (Open Tendering Regulations) किसी को भी किसी विशेष भौगोलिक क्षेत्र तक सीमित नहीं रखते। ठेकेदारों द्वारा क्षेत्र विशेष के काम पर एकाधिकार जमाना न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह विकास की गति को भी बाधित करता है। ब्लैकलिस्टिंग की कार्रवाई से विभाग यह संदेश देना चाहता है कि नियमों से ऊपर कोई नहीं है।

पुलिस और प्रशासन से सख्त सजा की मांग

दून शहर के पीड़ित ठेकेदारों ने इस घटना के बाद सुरक्षा और न्याय की गुहार लगाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ असामाजिक तत्व ठेकेदारी की आड़ में (Law and Order Violations) कर रहे हैं। भंवर सिंह पुंडीर और अल्का पुंडीर समेत कई अन्य कंस्ट्रक्शन फर्मों ने पुलिस प्रशासन से मारपीट करने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है। ठेकेदारों का कहना है कि जब तक इन ‘दबंगों’ पर कानूनी शिकंजा नहीं कसेगा, तब तक निष्पक्ष काम करना मुश्किल होगा।

सरकार को करोड़ों की चपत का खतरा

अगर टेंडर प्रक्रिया में इसी तरह का गतिरोध और सिंडिकेट बना रहा, तो विकास कार्यों की गुणवत्ता और सरकारी खजाने पर इसका बुरा असर पड़ेगा। जब ठेकेदार आपस में (Market Competition Mechanics) को खत्म कर देते हैं, तो टेंडर ऊंची दरों पर आवंटित होते हैं। एमडीडीए के इस पचास करोड़ के प्रोजेक्ट में भी यही अंदेशा जताया जा रहा था। टेंडर निरस्त होने से अब नए सिरे से प्रक्रिया शुरू होगी, जिससे कुछ समय के लिए विकास कार्यों की रफ्तार जरूर धीमी हो सकती है।

भविष्य की टेंडर प्रक्रिया के लिए सबक

इस घटना ने एमडीडीए को अपनी सुरक्षा और टेंडर डालने की व्यवस्था पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए (Digital Procurement Systems) यानी ई-टेंडरिंग को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है ताकि ठेकेदारों का आमना-सामना ही न हो सके। फिलहाल, उपाध्यक्ष के इस सख्त कदम की शहर में चर्चा हो रही है और अब सबकी नजरें उन ठेकेदारों की सूची पर हैं, जिन्हें विभाग हमेशा के लिए बाहर का रास्ता दिखाने वाला है।

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