JusticeCase – बेटे की मौत के बाद मां ने खुद ढूंढ़ निकाला आरोपी चालक
JusticeCase – देहरादून में एक सड़क हादसे में बेटे को खोने के बाद एक मां की संघर्षपूर्ण कहानी सामने आई है, जिसने न्याय की तलाश में हार नहीं मानी। करीब डेढ़ साल पहले हुए इस मामले में पुलिस ने शुरुआती जांच के बाद हाथ खड़े कर दिए थे, लेकिन मां ने खुद सबूत जुटाकर आरोपी तक पहुंच बनाई। अब इस मामले में दोबारा जांच शुरू होने से न्याय की उम्मीद एक बार फिर जगी है।

सड़क हादसे में गई थी 18 वर्षीय युवक की जान
घटना फरवरी 2024 की है, जब प्रेमनगर क्षेत्र में एक 18 वर्षीय युवक सड़क पार कर रहा था। इसी दौरान एक तेज रफ्तार डंपर ने उसे टक्कर मार दी और चालक मौके से फरार हो गया। घायल युवक को अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अगले दिन उसने दम तोड़ दिया। इस हादसे के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
जांच में सुस्ती, पुलिस ने किया केस बंद
परिजनों का आरोप है कि मामले की जांच शुरू से ही गंभीरता से नहीं की गई। वाहन की पहचान न हो पाने का हवाला देते हुए पुलिस ने कुछ ही समय में केस बंद कर दिया। जब मृतक की मां ने जांच अधिकारी से प्रगति के बारे में पूछा, तो उन्हें यह कहकर टाल दिया गया कि बिना ठोस जानकारी के आरोपी तक पहुंचना आसान नहीं है। इस जवाब ने परिवार को और निराश कर दिया।
मां ने खुद संभाली जांच की जिम्मेदारी
बेटे को खोने का दुख और न्याय न मिलने की पीड़ा ने मां को खुद कदम उठाने के लिए मजबूर कर दिया। उन्होंने अलग-अलग जगहों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जुटाई और कई संदिग्ध वाहनों की पहचान करने की कोशिश की। लंबे समय तक लगातार प्रयास करने के बाद उन्होंने संभावित वाहनों की सूची तैयार कर पुलिस को सौंपी, लेकिन उस पर भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
डेढ़ साल बाद आरोपी तक पहुंची मां
लगातार प्रयासों और धैर्य के बाद आखिरकार मां को सफलता मिली। उन्होंने खुद उस वाहन और उसके मालिक की पहचान कर ली, जो इस हादसे में शामिल था। इसके बाद उन्होंने संबंधित अधिकारियों को सभी साक्ष्यों के साथ आवेदन दिया। इस पहल ने पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया।
अब दोबारा जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने दोबारा जांच के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी और दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
एफआईआर दर्ज कराने में भी करनी पड़ी मशक्कत
परिवार का यह भी कहना है कि शुरुआती दौर में रिपोर्ट दर्ज कराने में भी उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। घटना के बाद जब वे थाने पहुंचे, तो तत्काल प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। बाद में लगातार आग्रह के बाद मामला दर्ज हुआ।
संघर्ष की कहानी बनी मिसाल
यह मामला न केवल एक हादसे की कहानी है, बल्कि एक मां के साहस और दृढ़ संकल्प का उदाहरण भी है। लंबे समय तक अकेले प्रयास कर सच्चाई तक पहुंचना आसान नहीं था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब दोबारा जांच शुरू होने के बाद यह देखना अहम होगा कि आगे इस मामले में क्या कार्रवाई होती है।



