KumbhMela – हरिद्वार कुंभ में फर्जी साधुओं पर सख्ती, पहचान अनिवार्य
KumbhMela – हरिद्वार में प्रस्तावित कुंभ मेले को सुव्यवस्थित और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासन और अखाड़ा परिषद ने तैयारियां तेज कर दी हैं। आयोजन को भव्य स्वरूप देने के साथ-साथ व्यवस्था में किसी तरह की गड़बड़ी न हो, इसके लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं। इसी क्रम में यह तय किया गया है कि कुंभ में शामिल होने वाले साधु-संतों के लिए पहचान संबंधी नियम अनिवार्य होंगे, ताकि फर्जी लोगों की घुसपैठ रोकी जा सके।

साधुओं के लिए पहचान पत्र अनिवार्य
अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रविंद्रपुरी ने स्पष्ट किया है कि कुंभ में केवल वही साधु प्रवेश कर सकेंगे, जिनके पास उनके अखाड़े द्वारा जारी आधिकारिक पहचान पत्र होगा। इसके साथ ही आधार कार्ड भी साथ रखना जरूरी होगा। परिषद ने सभी अखाड़ों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने साधुओं को प्रमाणित पहचान पत्र जारी करें। बिना वैध पहचान के किसी को भी प्रवेश नहीं दिया जाएगा और ऐसे मामलों में जांच की जाएगी।
फर्जी साधुओं पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी
परिषद ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति साधु के वेश में बिना प्रमाण के पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन और पुलिस के सहयोग से एक मजबूत सत्यापन प्रणाली तैयार की जा रही है, जिससे संदिग्ध लोगों की पहचान तुरंत की जा सके। परिषद का मानना है कि इस तरह के कदमों से श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहेगा और आयोजन की गरिमा भी सुरक्षित रहेगी।
आस्था और व्यवस्था दोनों पर जोर
अखाड़ा परिषद ने कहा कि कुंभ केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। ऐसे में व्यवस्था को बनाए रखना और श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करना बेहद जरूरी है। परिषद ने संत समाज से भी सहयोग की अपील की है ताकि इस अभियान को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके और आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो।
निर्धारित समय में पूरे होंगे सभी कार्य
वहीं, प्रशासनिक स्तर पर भी तैयारियां तेज कर दी गई हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि कुंभ से जुड़े स्थायी और अस्थायी निर्माण कार्य 31 अक्टूबर तक हर हाल में पूरे कर लिए जाएं। इसके लिए विभिन्न परियोजनाओं की निगरानी की जा रही है और आवश्यक स्वीकृतियां भी तेजी से दी जा रही हैं।
मेलाधिकारी के अनुसार, इस आयोजन के लिए कई विभागों के तहत करोड़ों रुपये की लागत से दर्जनों परियोजनाएं प्रस्तावित हैं, जिनका उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। सरकार का लक्ष्य है कि श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिले और आयोजन व्यवस्थित ढंग से संपन्न हो सके।



