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उत्तराखण्ड

LiquorRates – उत्तराखंड में नई दरों के साथ शराब हुई महंगी

LiquorRates – उत्तराखंड में नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही शराब की कीमतों में बढ़ोतरी लागू हो गई है। आबकारी विभाग द्वारा जारी नई दरों के अनुसार राज्य में शराब अब पहले की तुलना में करीब 10 प्रतिशत तक महंगी हो गई है। यह वृद्धि एक नियमित प्रक्रिया के तहत की गई है, जिसे हर साल लागू किया जाता है। विभाग का कहना है कि यह बदलाव पहले से तय नीति के अनुरूप है और इसका उद्देश्य राजस्व संतुलन बनाए रखना है।

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नई आबकारी नीति के तहत बढ़े दाम
राज्य में लागू आबकारी नीति को तीन वर्षों के लिए निर्धारित किया गया है, जिसके तहत अगली नई नीति वर्ष 2028 में लागू होगी। फिलहाल जारी आदेश के अनुसार विभिन्न ब्रांड की शराब की बोतलों पर 5 से 20 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। इससे पहले भी पिछले वर्ष कीमतों में लगभग 5 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी। इस बार की बढ़ोतरी अपेक्षाकृत अधिक मानी जा रही है, जिससे उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त खर्च का असर पड़ेगा।

सरकार ने बताया नियमित प्रक्रिया
आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने स्पष्ट किया है कि यह मूल्य वृद्धि किसी विशेष परिस्थिति के कारण नहीं, बल्कि वार्षिक संशोधन का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि सरकार समय-समय पर टैक्स और शुल्कों में बदलाव करती है, जिससे राजस्व संग्रह सुनिश्चित किया जा सके। इस फैसले को उसी प्रक्रिया का हिस्सा बताया गया है।

नई शराब दुकानों को लेकर विरोध तेज
जहां एक ओर कीमतों में बढ़ोतरी लागू हुई है, वहीं दूसरी ओर नई शराब दुकानों को लेकर विवाद भी सामने आ रहा है। नैनीताल जिले के कुछ क्षेत्रों में प्रस्तावित दुकानों का स्थानीय स्तर पर विरोध किया जा रहा है। इन इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि सार्वजनिक स्थानों और बाजारों के पास शराब की दुकानें खोलना सामाजिक दृष्टि से उचित नहीं है।

सांसद अजय भट्ट ने उठाया मुद्दा
सांसद अजय भट्ट ने भी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को पत्र लिखा है। उन्होंने रातीघाट, मंगोली और बजून क्षेत्रों में प्रस्तावित शराब दुकानों के लाइसेंस निरस्त करने की मांग की है। उनका कहना है कि इन स्थानों पर बड़ी संख्या में ग्रामीण और परिवार रोजमर्रा की जरूरतों के लिए आते हैं, ऐसे में यहां शराब की बिक्री से सामाजिक माहौल प्रभावित हो सकता है।

शैक्षणिक संस्थानों के पास दुकान पर चिंता
सांसद ने यह भी कहा कि जिन स्थानों पर दुकानें प्रस्तावित हैं, वहां स्कूल और कॉलेज भी स्थित हैं। ऐसे में इन संस्थानों के पास शराब की दुकान खुलने से छात्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। स्थानीय लोगों का विरोध भी इसी आधार पर सामने आ रहा है।

सरकार के सामने संतुलन की चुनौती
इस पूरे मामले में राज्य सरकार के सामने एक ओर राजस्व बढ़ाने की आवश्यकता है, तो दूसरी ओर जनभावनाओं और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने की चुनौती भी है। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इस विरोध के बीच क्या निर्णय लेती है और स्थानीय स्तर पर उठ रहे मुद्दों का समाधान कैसे करती है।

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