NGTNotice – मसूरी पर्यावरण संरक्षण में ढिलाई पर सरकार को नोटिस
NGTNotice – मसूरी के संवेदनशील पर्यावरण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने उत्तराखंड सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। एनजीटी ने निर्देशों के अनुपालन में कमी पाए जाने पर राज्य के मुख्य सचिव को नोटिस जारी किया है और जवाब तलब किया है। यह मामला उन सुधारात्मक कदमों से जुड़ा है, जिन्हें पिछले वर्ष लागू करने के निर्देश दिए गए थे ताकि पहाड़ी क्षेत्र में अनियंत्रित विकास से होने वाले नुकसान को रोका जा सके।

जोशीमठ जैसी स्थिति से बचने की चेतावनी
एनजीटी ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए पहले भी यह कहा था कि मसूरी में हो रहे अनियोजित निर्माण कार्य भविष्य में बड़ी समस्या बन सकते हैं। वर्ष 2023 में जोशीमठ में आई आपदा को उदाहरण के तौर पर लेते हुए अधिकरण ने चेतावनी दी थी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो मसूरी में भी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसी संदर्भ में पिछले साल स्वतः संज्ञान लेते हुए विस्तृत निर्देश जारी किए गए थे।
19 बिंदुओं पर सुधार के निर्देश
अधिकरण ने राज्य सरकार को कुल 19 बिंदुओं पर आधारित सुधारात्मक उपाय लागू करने को कहा था। इन उपायों में अनियंत्रित निर्माण पर रोक, बेहतर जल निकासी व्यवस्था, ढलानों को स्थिर करने के उपाय और कचरा प्रबंधन को सुदृढ़ करना शामिल था। इसके साथ ही बड़े निर्माण कार्यों और सुरंग परियोजनाओं को वैज्ञानिक मानकों के अनुसार संचालित करने की बात भी कही गई थी।
रिपोर्ट में नहीं दिखा ठोस अमल
हाल ही में हुई सुनवाई के दौरान एनजीटी ने सरकार द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट की समीक्षा की। बेंच ने पाया कि जिन महत्वपूर्ण मुद्दों पर कार्रवाई अपेक्षित थी, उन पर पर्याप्त प्रगति नहीं हुई है। अधिकरण ने यह भी टिप्पणी की कि सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि उपस्थित नहीं था, जो स्थिति स्पष्ट कर सके। इससे अधिकरण ने नाराजगी जताई।
वैज्ञानिक आधार पर विकास की जरूरत
एनजीटी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया था कि सभी विकास कार्य वैज्ञानिक सिद्धांतों और पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप होने चाहिए। हिमालयी क्षेत्र की वहन क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही निर्माण गतिविधियों की अनुमति दी जानी चाहिए। इसके लिए भू-तकनीकी अध्ययन, संरचनाओं की जांच और योजना आधारित विकास को प्राथमिकता देने की बात कही गई थी।
स्थानीय भागीदारी और प्रबंधन पर जोर
सुधारात्मक उपायों में स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने, पर्यावरण के अनुकूल सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देने और पर्यटन प्रबंधन को व्यवस्थित करने पर भी जोर दिया गया था। साथ ही, क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों की संख्या को नियंत्रित करने और ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के निर्देश भी शामिल थे।
अगली सुनवाई में होगा मूल्यांकन
एनजीटी ने इस मामले में अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। यह देखा जाएगा कि दिए गए निर्देशों के पालन में कितनी प्रगति हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन उपायों को गंभीरता से लागू किया जाए, तो मसूरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को संभावित पर्यावरणीय संकट से बचाया जा सकता है।



