उत्तराखण्ड

Pet Management Policy Guidelines: सावधान! अगर अब छोड़ा अपना पालतू कुत्ता तो ढीली होगी जेब

Pet Management Policy Guidelines: नगर निगम ने बेजुबानों की सुरक्षा और सड़कों पर बढ़ती लावारिस कुत्तों की समस्या को देखते हुए एक सख्त कदम उठाया है। अब यदि कोई श्वान मालिक अपने पालतू कुत्ते का परित्याग करता है, तो पकड़े जाने पर उस पर (Financial Penalties) के रूप में पूरे बीस हजार रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इतना ही नहीं, पशु क्रूरता के अंतर्गत निगम उस व्यक्ति पर मुकदमा भी दर्ज करवा सकता है, जिससे अब लोग शौक के लिए पालतू जानवर पालकर उन्हें बीच राह नहीं छोड़ पाएंगे।

Pet Management Policy Guidelines
Pet Management Policy Guidelines

रेजिडेंट वेलफेयर सोसायटी की बढ़ी जवाबदेही

निगम द्वारा तैयार की गई इस नई नीति में रिहायशी इलाकों की समितियों को भी लपेटे में लिया गया है। अब आरडब्ल्यूए (Resident Welfare Association) को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके परिसर में जितने भी पालतू कुत्ते हैं, उन सबका अनिवार्य रूप से पंजीकरण हो चुका हो। इसके साथ ही पेट शॉप चलाने वालों के लिए लाइसेंस लेना और डॉग केयर सेंटर का पंजीकरण करवाना अब कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।

पशु प्रेमियों के सुझावों पर नियमों में बदलाव

नगर आयुक्त नमामी बंसल ने इस डॉग पॉलिसी को अंतिम रूप देने से पहले जनता और सामाजिक संस्थाओं के साथ व्यापक चर्चा की है। पीपल फॉर एनिमल और देवभूमि पेट वेलफेयर एसोसिएशन जैसी संस्थाओं ने कुल 22 आपत्तियां और सुझाव दिए थे, जिनका (Public Policy Feedback) के आधार पर निस्तारण किया गया है। इन सुझावों के बाद नीति में कई महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं ताकि पशु मालिकों और आम जनता के बीच संतुलन बना रहे।

अगले माह से लागू होगा नया गजट नोटिफिकेशन

वरिष्ठ पशु चिकित्साधिकारी डॉ. वरुण अग्रवाल ने स्पष्ट किया है कि यह नियमावली अब अपने अंतिम चरण में है और फरवरी की शुरुआत तक इसे पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। (Official Gazette Notification) जारी होते ही यह पॉलिसी शहर के हर कोने में प्रभावी हो जाएगी। मेयर सौरभ थपलियाल ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे अपने पालतू जानवरों का पंजीकरण जल्द से जल्द करवाएं और निगम की इस मुहिम में अपना पूरा सहयोग दें।

आक्रामक कुत्तों के लिए मजल के नियम में संशोधन

पॉलिसी के शुरुआती ड्राफ्ट में हर कुत्ते के लिए मजल लगाना अनिवार्य था, जिस पर पशु प्रेमियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी थी। अब संशोधित नियमों के अनुसार, कुत्ते को बाहर ले जाते समय मालिक को (Dog Safety Equipment) के तौर पर मजल अपने साथ रखना होगा। यदि कुत्ता आक्रामक व्यवहार करता है या सार्वजनिक स्थान पर किसी के लिए खतरा बनता है, तभी उसे मजल पहनना अनिवार्य होगा, अन्यथा सामान्य स्थिति में इसकी आवश्यकता नहीं होगी।

माइक्रोचिप के जरिए होगी कुत्तों की ऑनलाइन निगरानी

आधुनिक तकनीक का सहारा लेते हुए निगम भविष्य में कुत्तों के शरीर में माइक्रोचिप लगाने की योजना पर भी काम कर रहा है। इस (Digital Monitoring System) की मदद से कुत्तों और उनके मालिकों का डेटा ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। यदि कोई कुत्ता गुम हो जाता है या कोई उसे लावारिस छोड़ता है, तो चिप को स्कैन करके मालिक की पहचान तुरंत की जा सकेगी और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर आसानी से कार्रवाई होगी।

पंजीकरण टोकन और जुर्माने का पूरा गणित

नए नियमों के तहत पंजीकरण के बाद हर कुत्ते के लिए एक विशेष टोकन जारी किया जाएगा, जिसे कुत्ते के गले के पट्टे में लगाना होगा। यदि कोई मालिक (License Renewal Process) में देरी करता है और तीस दिन की समय सीमा बीत जाती है, तो उसे 500 रुपये प्रति माह के हिसाब से अतिरिक्त जुर्माना भरना पड़ेगा। हालांकि, जो लोग आवारा कुत्तों को गोद लेंगे, उनके लिए पंजीकरण और वैक्सीनेशन की सुविधा पूरी तरह निशुल्क रखी गई है।

डॉग केयर सेंटर्स के लिए कड़े मानक तय

शहर में चल रहे पेट शॉप और ब्रीडिंग सेंटर्स को अब नियमों के दायरे में रहकर काम करना होगा। बिडर यानी ब्रीडर्स के लिए अब 300 गज के पुराने मानक को हटा दिया गया है, लेकिन डॉग केयर सेंटर का (Registration Requirements) अब और भी सख्त कर दिया गया है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य शहर में पशु प्रबंधन को व्यवस्थित करना और जानवरों के प्रति मानवीय दृष्टिकोण को बढ़ावा देना है।

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