Jannah Theme License is not validated, Go to the theme options page to validate the license, You need a single license for each domain name.
उत्तराखण्ड

ReservationRule – विवाह के आधार पर ओबीसी लाभ नहीं, हाईकोर्ट का स्पष्ट फैसला

ReservationRule – उत्तराखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए साफ किया है कि किसी अन्य राज्य की ओबीसी श्रेणी की महिला केवल विवाह के आधार पर उत्तराखंड में आरक्षण का लाभ नहीं ले सकती। अदालत ने यह भी कहा कि यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में पद रिक्त रह जाते हैं, तो संबंधित अभ्यर्थी को सामान्य श्रेणी में विचार किए जाने का अवसर मिल सकता है। यह फैसला न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की एकलपीठ ने दो याचिकाओं पर सुनवाई के बाद सुनाया।

uttarakhand obc reservation marriage rule hc

मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ता का दावा

यह मामला एक ऐसी महिला से जुड़ा था, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश की रहने वाली है और कहार समुदाय से संबंध रखती है। यह समुदाय दोनों राज्यों में ओबीसी श्रेणी में शामिल है। महिला का जन्म और पालन-पोषण उत्तर प्रदेश में हुआ, लेकिन विवाह के बाद उसने उत्तराखंड में निवास शुरू किया। इसके बाद उसने राज्य से ओबीसी प्रमाणपत्र प्राप्त कर वर्ष 2023 में सहायक शिक्षक पद के लिए आवेदन किया और आरक्षण का लाभ लेने की कोशिश की।

राज्य सरकार की दलील पर कोर्ट की सहमति

जब चयन सूची में नाम नहीं आया, तो याचिकाकर्ता ने अदालत का रुख किया और नियुक्ति की मांग की। इस पर राज्य सरकार ने अदालत में स्पष्ट किया कि विवाह के आधार पर किसी व्यक्ति की सामाजिक श्रेणी में परिवर्तन नहीं होता। सरकार का तर्क था कि आरक्षण का लाभ उसी राज्य में मान्य होता है, जहां व्यक्ति का मूल निवास और सामाजिक प्रमाणन हो। अदालत ने इस दलील को स्वीकार करते हुए कहा कि केवल विवाह के आधार पर दूसरे राज्य में आरक्षण का अधिकार नहीं मिल सकता।

अदालत ने क्या राहत दी

हालांकि कोर्ट ने याचिकाकर्ता की मुख्य मांग को खारिज कर दिया, लेकिन एक सीमित राहत जरूर दी। अदालत ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर संबंधित प्राधिकारी के समक्ष अपना पक्ष रख सकती है। साथ ही यह भी कहा गया कि अधिकारी चार महीने के भीतर इस पर निर्णय लें। यदि रिक्तियां बचती हैं, तो सामान्य श्रेणी में विचार किया जा सकता है।

उपनल कर्मचारियों के मामले में सरकार से जवाब

एक अन्य मामले में हाईकोर्ट ने उपनल संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण से जुड़े विवाद पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। यह मामला हल्द्वानी स्थित उपनल कर्मचारी संघ द्वारा दायर अवमानना याचिका से संबंधित है। सुनवाई के दौरान अदालत ने पूछा कि पहले दिए गए आदेशों का पालन अब तक क्यों नहीं किया गया।

नियमितीकरण पर कार्रवाई की जानकारी मांगी

न्यायमूर्ति राकेश थपलियाल की एकलपीठ ने सरकार को निर्देश दिया कि वह यह स्पष्ट करे कि उपनल कर्मचारियों के नियमितीकरण के लिए अब तक क्या कदम उठाए गए हैं। अदालत ने इस मामले में शीघ्र जवाब देने को कहा है। संघ की ओर से यह भी बताया गया कि पूर्व में हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने इस मुद्दे पर दिशा-निर्देश जारी किए थे, लेकिन अभी तक कोई ठोस निर्णय लागू नहीं हुआ है।

शिक्षक भर्ती से जुड़ी याचिकाओं का निपटारा

इसी दिन हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर भी सुनवाई की। अदालत ने याचिकाकर्ताओं को पहले संबंधित विभागीय अधिकारी के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करने का निर्देश दिया और इसके साथ ही इन याचिकाओं का निस्तारण कर दिया। अभ्यर्थियों का कहना था कि उनके अंक अधिक होने के बावजूद चयन सूची में शामिल नहीं किया गया।

अदालत के इन फैसलों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि भर्ती और आरक्षण से जुड़े मामलों में नियमों का सख्ती से पालन किया जाएगा। साथ ही, लंबित मामलों में भी सरकार से जवाबदेही तय करने की दिशा में न्यायालय सक्रिय नजर आ रहा है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.