उत्तराखण्ड

SchoolTransportFare – उत्तराखंड में बस-वैन किराया तय, मनमानी पर लगी रोक

SchoolTransportFare – उत्तराखंड में अब स्कूल बसों और वैन के किराए को लेकर लंबे समय से चली आ रही अनियमितता पर रोक लगाने की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। राज्य परिवहन प्राधिकरण ने पहली बार स्कूल वाहनों के लिए तय किराया लागू करने का निर्णय लिया है। इस फैसले के बाद अब स्कूल प्रबंधन या वाहन संचालक अपनी मर्जी से शुल्क नहीं बढ़ा सकेंगे और अभिभावकों को तय सीमा के भीतर ही भुगतान करना होगा।

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दूरी के आधार पर तय किया गया किराया

नई व्यवस्था के तहत स्कूल से घर की दूरी के अनुसार मासिक शुल्क निर्धारित किया गया है। स्कूल बसों के लिए यह किराया 2200 रुपये से शुरू होकर अधिकतम 3700 रुपये तक रहेगा। वहीं, वैन या टैक्सी श्रेणी के छोटे वाहनों के लिए यह शुल्क 2100 रुपये से 3500 रुपये के बीच तय किया गया है। इससे अभिभावकों को पहले की तुलना में अधिक स्पष्टता और राहत मिलने की उम्मीद है।

पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अतिरिक्त प्रावधान

राज्य के पर्वतीय इलाकों को ध्यान में रखते हुए किराए में कुछ लचीलापन भी रखा गया है। इन क्षेत्रों में परिवहन की अतिरिक्त लागत को देखते हुए निर्धारित दरों में अधिकतम 10 प्रतिशत तक वृद्धि की अनुमति दी गई है। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में सेवाएं प्रभावित न हों और संचालन सुचारू बना रहे।

छुट्टियों में भी देना होगा शुल्क

नई व्यवस्था के अनुसार, गर्मियों और सर्दियों की छुट्टियों के दौरान भी अभिभावकों को परिवहन शुल्क देना होगा। हालांकि इस अवधि में उन्हें 25 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी। यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि वाहन संचालन से जुड़े खर्चों को संतुलित किया जा सके और अभिभावकों पर अत्यधिक भार भी न पड़े।

मेहरा समिति की रिपोर्ट पर आधारित निर्णय

इस नीति को तैयार करने के लिए गठित मेहरा समिति ने स्कूल वाहनों के संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन किया था। इसमें वाहन खरीद, रखरखाव, ईंधन और अन्य खर्चों का विश्लेषण शामिल था। समिति की सिफारिशों के आधार पर ही राज्य परिवहन प्राधिकरण ने किराया संरचना को मंजूरी दी है।

तय सीमा से अधिक वसूली पर सख्ती

प्रशासन ने साफ किया है कि निर्धारित दरों से अधिक शुल्क लेने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। यदि कोई स्कूल या वाहन संचालक नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके वाहन का परमिट निलंबित या रद्द किया जा सकता है। इसके अलावा स्कूलों को अभिभावकों को शुल्क की रसीद देना अनिवार्य होगा।

अग्रिम शुल्क वसूली पर भी रोक

नई व्यवस्था में यह भी स्पष्ट किया गया है कि स्कूल संचालक परिवहन शुल्क अग्रिम में नहीं ले सकेंगे। इससे अभिभावकों को आर्थिक रूप से बेहतर सुविधा मिलेगी और पारदर्शिता भी बनी रहेगी।

अभिभावकों को मिलेगा सीधा लाभ

इस फैसले से सबसे अधिक राहत अभिभावकों को मिलने की उम्मीद है, जो लंबे समय से मनमाने किराए की शिकायत कर रहे थे। अब एक तय ढांचा लागू होने से शुल्क को लेकर विवाद की स्थिति कम होगी और पारदर्शिता बढ़ेगी।

व्यवस्था लागू होने पर नजर

अब सभी की नजर इस बात पर होगी कि इस नई व्यवस्था का पालन कितनी सख्ती से कराया जाता है। यदि नियमों का प्रभावी क्रियान्वयन हुआ, तो यह कदम राज्य में शिक्षा से जुड़े परिवहन क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण सुधार साबित हो सकता है।

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