उत्तराखण्ड

TehriLake – टिहरी झील में फ्लोटिंग हट्स हादसा टला, जांच शुरू…

TehriLake – टिहरी झील के डोबरा चांठी क्षेत्र के सिरांई में रविवार रात खराब मौसम के बीच एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। तेज आंधी और तूफान के कारण झील में बने फ्लोटिंग हट्स का ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया और वे दो हिस्सों में बंट गए। उस समय वहां ठहरे करीब 30 पर्यटक और सात स्टाफ सदस्य खतरे में आ गए थे। समय रहते राहत टीम के पहुंचने से सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।

tehri lake floating huts incident

आंधी-तूफान में टूटा फ्लोटिंग ढांचा

स्थानीय प्रशासन के अनुसार तेज हवाओं और बारिश के चलते फ्लोटिंग हट्स के एक्सल ज्वाइंट निकल गए, जिससे पूरा प्लेटफॉर्म अस्थिर हो गया। कुल 20 हट्स में से 13 एक ओर और सात दूसरी दिशा में खिसक गए। इस स्थिति ने वहां मौजूद लोगों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही राज्य आपदा प्रतिवादन बल (SDRF) मौके पर पहुंचा और नावों की मदद से सभी पर्यटकों व कर्मचारियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।

सरकार ने दिए जांच के निर्देश

घटना के बाद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच के आदेश जारी किए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने टिहरी की जिलाधिकारी निकिता खंडेलवाल से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। साथ ही पर्यटन विभाग को निर्देश दिया गया है कि झीलों में संचालित सभी पर्यटन गतिविधियों के लिए सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाए। प्रशासन ने फिलहाल फ्लोटिंग हट्स के संचालन पर रोक लगा दी है।

स्थानीय प्रशासन ने बनाई जांच समिति

टिहरी प्रशासन ने इस घटना की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति गठित की है, जिसकी अध्यक्षता एसडीएम स्तर के अधिकारी कर रहे हैं। समिति को चार दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी और यह भी निर्णय लिया जाएगा कि फ्लोटिंग हट्स को दोबारा शुरू किया जाए या नहीं।

वाटर स्पोर्ट्स सुरक्षा पर उठे सवाल

इस घटना ने टिहरी झील में बढ़ती वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि झील में संचालित संरचनाओं को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया जाना चाहिए। फ्लोटिंग प्लेटफॉर्म में बहु-स्तरीय एयर चैंबर होने चाहिए ताकि किसी एक हिस्से के क्षतिग्रस्त होने पर भी पूरा ढांचा सुरक्षित रहे।

प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों पर जोर

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि वाटर स्पोर्ट्स से जुड़े सभी कर्मचारियों को प्रशिक्षित किया जाएगा। इसके लिए समय-समय पर विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे ताकि स्थानीय स्तर पर ही दक्ष मानव संसाधन तैयार किया जा सके। आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रशिक्षित लाइफगार्ड, रेस्क्यू बोट और अन्य जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है।

जबलपुर हादसे के बाद भी नहीं बढ़ी सतर्कता

हाल ही में हुए जबलपुर क्रूज हादसे के बाद देशभर में जल पर्यटन की सुरक्षा पर चर्चा तेज हुई थी। इसके बावजूद टिहरी झील में सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े हादसों के बाद भी यदि सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा नहीं की जाती, तो ऐसी घटनाएं दोबारा हो सकती हैं।

पीपीपी मॉडल में हो रहा संचालन

टिहरी झील में फ्लोटिंग हट्स का निर्माण वर्ष 2015-16 में किया गया था और इनका संचालन सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत दिया गया है। वर्ष 2020-21 से एक निजी कंपनी इनका संचालन कर रही है। हालांकि, खराब मौसम में इन हट्स की मजबूती और सुरक्षा को लेकर अब चिंता बढ़ गई है।

भविष्य के लिए सख्त नियम जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार फ्लोटिंग संरचनाओं को मजबूत एंकरिंग सिस्टम, स्टील वायर और फाइबर रस्सियों से सुरक्षित किया जाना चाहिए, ताकि तेज हवा या जल स्तर में बदलाव के बावजूद वे अपनी जगह से न हटें। इसके अलावा, संरचनात्मक ऑडिट और पर्यावरणीय मानकों का पालन अनिवार्य होना चाहिए, ताकि पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

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