Uttarakhand High Court: यूट्यूबर व्योम शर्मा को उत्तराखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत, गिरफ्तारी पर रोक के साथ दिए अहम निर्देश
Uttarakhand High Court: सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर और मशहूर यूट्यूबर व्योम शर्मा के खिलाफ दर्ज मुकदमे और गिरफ्तारी की आशंका के मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने अपना महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। बुधवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने व्योम शर्मा को बड़ी राहत देते हुए उनकी तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। अवकाशकालीन न्यायाधीश न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की एकलपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए यह स्पष्ट किया कि याची को पुलिस जांच में पूरी तरह सहयोग करना होगा। कोर्ट ने पुलिस को भी हिदायत दी है कि बिना उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाए कोई भी कठोर कदम न उठाया जाए।

अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य के फैसले का हवाला
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक फैसले ‘अरनेश कुमार बनाम बिहार राज्य’ का उल्लेख किया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि कानून द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी नहीं की जा सकती। इसी आधार पर न्यायालय ने पुलिस को निर्देश दिया कि व्योम शर्मा को इस मामले में फिलहाल गिरफ्तार न किया जाए। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद इस याचिका का निस्तारण कर दिया है, जिससे यूट्यूबर को कानूनी प्रक्रिया के तहत अपनी बात रखने का अवसर मिला है।
जबरन वसूली और संपत्ति विवाद का पूरा मामला
यह पूरा विवाद देहरादून के डालनवाला थाना क्षेत्र से शुरू हुआ था। व्योम शर्मा पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने विपक्षी व्यक्ति को डरा-धमकाकर 25 लाख रुपये की अवैध वसूली की मांग की थी। विपक्षी पक्ष का दावा है कि याची सोशल मीडिया के जरिए उन्हें लगातार प्रताड़ित कर रहा है और पैसों का दबाव बना रहा है। इसी शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया था। हालांकि, व्योम शर्मा की ओर से इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और झूठा बताया गया है।
याची की दलील और विपक्षी पर पलटवार
व्योम शर्मा की ओर से पैरवी कर रहे वकील ने अदालत को एक अलग कहानी बताई। याची का कहना है कि विपक्षी ने खुद सोशल मीडिया के माध्यम से उनसे संपर्क किया था और अपनी 25 से 30 करोड़ रुपये की संपत्ति बिकवाने में मदद मांगी थी। याची का दावा है कि उनके प्रयासों से उक्त संपत्ति बिक भी चुकी है और विपक्षी ने सफलता पर उन्हें इनाम देने का वादा किया था। याची का आरोप है कि अब कमीशन या इनाम देने से बचने के लिए विपक्षी ने उनके खिलाफ यह झूठा मुकदमा दर्ज कराया है।
पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए गए सवाल
याचिका में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए गए हैं। याची का कहना है कि उन्होंने भी पुलिस को अपना पक्ष रखते हुए प्रार्थना पत्र दिया था, लेकिन पुलिस ने केवल विपक्षी की शिकायत पर ही कार्रवाई की और उनके प्रार्थना पत्र को नजरअंदाज कर दिया। हाईकोर्ट ने सभी तथ्यों को सुनने के बाद संतुलन बनाए रखने की कोशिश की है। कोर्ट ने साफ किया है कि पुलिस मामले की निष्पक्ष जांच करे और व्योम शर्मा भी जांच अधिकारी के साथ सहयोग सुनिश्चित करें। इस फैसले के बाद अब मामला जांच के अधीन है और गिरफ्तारी पर लगी रोक से याची को बड़ी राहत मिली है।



