WomenEmpowerment – उत्तराखंड में एकल महिलाओं के लिए स्वरोजगार योजना का हुआ आगाज
WomenEmpowerment – उत्तराखंड की धामी सरकार ने राज्य की अकेली महिलाओं को आर्थिक संबल देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। मंगलवार को देहरादून स्थित मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘मुख्यमंत्री एकल महिला स्वरोजगार योजना’ का विधिवत शुभारंभ किया। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को स्वरोजगार शुरू करने के लिए दो लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। पहले चरण में 484 महिलाओं के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के माध्यम से 3 करोड़ 45 लाख 34 हजार 500 रुपये की राशि भेजी गई।

पहले चरण में 484 महिलाओं को मिली पहली किश्त
योजना के शुभारंभ के साथ ही राज्य के विभिन्न जिलों की महिलाओं को लाभ पहुंचाया गया। बागेश्वर की 42, देहरादून की 191, नैनीताल की 75, पौड़ी की 66, टिहरी की 23 और उधमसिंहनगर की 87 महिलाओं को पहली किस्त जारी की गई। अधिकारियों के अनुसार शेष सात जिलों की 540 महिलाओं को भी इस माह के अंत तक लगभग चार करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से प्रदान किए जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान विभागीय कैलेंडर का विमोचन भी किया गया।
किन महिलाओं को मिलेगा योजना का लाभ
सरकार ने इस योजना का दायरा व्यापक रखा है। इसमें विधवा, तलाकशुदा, परित्यक्ता और किसी भी कारण से अकेले जीवनयापन कर रहीं महिलाओं को शामिल किया गया है। इसके साथ ही एसिड अटैक या अन्य आपराधिक घटनाओं की पीड़ित महिलाओं और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों को भी पात्रता सूची में जगह दी गई है। सरकार का उद्देश्य है कि जो महिलाएं सामाजिक या पारिवारिक कारणों से आर्थिक रूप से कमजोर स्थिति में हैं, उन्हें स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बनाया जाए।
आर्थिक सहायता और सब्सिडी की रूपरेखा
योजना के तहत अधिकतम दो लाख रुपये तक की परियोजनाएं स्वीकृत की जा रही हैं। यदि कोई लाभार्थी बैंक से ऋण लेती है तो सरकार 75 प्रतिशत या अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक की सब्सिडी देगी, जो भी निर्धारित सीमा के भीतर हो। परियोजना लागत का 25 प्रतिशत अंशदान लाभार्थी को स्वयं वहन करना होगा। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह मॉडल महिलाओं को जिम्मेदारी के साथ उद्यम शुरू करने के लिए प्रोत्साहित करेगा और उन्हें लंबे समय तक व्यवसाय से जुड़े रहने में मदद करेगा।
महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कहा कि किसी भी समाज की प्रगति महिलाओं की भागीदारी के बिना संभव नहीं है। उनका मानना है कि जब एक महिला आर्थिक रूप से मजबूत होती है तो उसका परिवार और समाज दोनों सशक्त होते हैं। राज्य सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्यमिता और सरकारी नौकरियों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने के लिए कई पहल की हैं। सरकारी सेवाओं में 30 प्रतिशत आरक्षण और अन्य योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास जारी है।
स्वयं सहायता समूहों से मिल रही नई पहचान
प्रदेश में लगभग पांच लाख महिलाएं 70 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से विभिन्न गतिविधियों में संलग्न हैं। सात हजार से ज्यादा ग्राम्य संगठन और 500 से अधिक क्लस्टर संगठन सामूहिक नेतृत्व की मिसाल पेश कर रहे हैं। सरकार का दावा है कि 1.68 लाख से अधिक महिलाएं ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं, जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नई ऊर्जा का संचार कर रही हैं।
उत्पादों की प्रोसेसिंग और मार्केटिंग के लिए इकोसिस्टम
राज्य सरकार ने महिला समूहों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रोसेसिंग, पैकेजिंग और विपणन के लिए भी संरचना विकसित करने का प्रयास किया है। मुख्यमंत्री उद्यमशाला योजना के माध्यम से स्थानीय उत्पादों को ब्रांड पहचान देने की दिशा में काम हो रहा है। सरकार का कहना है कि इससे पहाड़ की महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध होगा और आय में वृद्धि होगी।
सरकार का दावा: आत्मनिर्भरता की ओर बड़ा कदम
कार्यक्रम में मौजूद मंत्रियों और अधिकारियों ने इसे महिलाओं की आर्थिक स्थिति बदलने वाली पहल बताया। उनका कहना है कि यह योजना न केवल व्यक्तिगत आजीविका को मजबूत करेगी, बल्कि अन्य लोगों को भी रोजगार से जोड़ने का माध्यम बनेगी। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य की अधिक से अधिक महिलाएं स्वरोजगार से जुड़कर आत्मनिर्भर बनें और सामाजिक नेतृत्व में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।



