Ranchi Municipal Corporation: रांची नगर निगम चुनाव की घोषणा के साथ आचार संहिता लागू, निषेधाज्ञा के सख्त निर्देश जारी
Ranchi Municipal Corporation: झारखंड में रांची नगर निगम चुनाव की औपचारिक घोषणा होते ही पूरे निगम क्षेत्र में आदर्श आचार संहिता प्रभावी हो गई है। चुनाव के दौरान कानून व्यवस्था, शांति और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सदर अनुमंडल दंडाधिकारी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दी है। यह प्रतिबंधात्मक आदेश पूरी चुनावी प्रक्रिया के संपन्न होने तक जारी रहेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों या संगठनों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

सभा और जुलूस के लिए लेनी होगी पूर्व अनुमति
निषेधाज्ञा लागू होने के बाद अब किसी भी राजनीतिक दल, उम्मीदवार या संगठन को सार्वजनिक सभा, जुलूस, धरना अथवा प्रदर्शन करने से पहले सक्षम अधिकारी से लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। बिना अनुमति के ऐसे किसी भी आयोजन को अवैध माना जाएगा। इसके साथ ही, जुलूस या रैलियों में किसी भी प्रकार के हथियार, लाठी, भाला या अन्य घातक वस्तुओं के प्रदर्शन पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि सार्वजनिक शांति भंग करने की मंशा से पांच या उससे अधिक व्यक्तियों के एक स्थान पर एकत्र होने पर पाबंदी रहेगी।
लाउडस्पीकर के उपयोग और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण
निर्वाचन आयोग के निर्देशों के आलोक में ध्वनि विस्तारक यंत्रों यानी लाउडस्पीकर के उपयोग को लेकर भी कड़े नियम बनाए गए हैं। रांची नगर निगम क्षेत्र में रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर पूरी तरह रोक रहेगी। दिन के समय भी इसका उपयोग केवल निर्धारित शर्तों के साथ मिली लिखित अनुमति के आधार पर ही किया जा सकेगा। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ध्वनि प्रदूषण नियम-2000 और झारखंड हाईकोर्ट द्वारा समय-समय पर जारी किए गए आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित कराया जाएगा। बिना अनुमति के प्रचार वाहनों पर लाउडस्पीकर का प्रयोग पाए जाने पर वाहन जब्त किया जा सकता है।
सरकारी और निजी संपत्ति पर विज्ञापन संबंधी प्रतिबंध
आचार संहिता के दौरान सरकारी कार्यालयों, बिजली के खंभों या अन्य सार्वजनिक संपत्तियों पर चुनावी नारे लिखना, पोस्टर चिपकाना या बैनर लगाना प्रतिबंधित है। निजी भवनों या संपत्तियों पर भी बिना मालिक की लिखित सहमति के कोई भी प्रचार सामग्री, झंडा या होर्डिंग नहीं लगाया जा सकेगा। यदि कोई उम्मीदवार इन नियमों की अनदेखी करता है, तो इसे संपत्ति विरूपण अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा। इसके अतिरिक्त, धार्मिक स्थलों का उपयोग किसी भी प्रकार के राजनीतिक प्रचार या सांप्रदायिक संदेश फैलाने के लिए करना पूरी तरह वर्जित है।
सोशल मीडिया और आपत्तिजनक सामग्री पर विशेष निगरानी
प्रशासन ने डिजिटल मंचों पर होने वाली गतिविधियों पर भी पैनी नजर रखने का निर्णय लिया है। व्हाट्सएप, फेसबुक, इंस्टाग्राम और ट्विटर जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किसी भी जाति, धर्म या समुदाय के विरुद्ध भड़काऊ टिप्पणी या भ्रामक संदेश साझा करने वालों पर साइबर सेल के माध्यम से कार्रवाई की जाएगी। मतदाताओं को डराने-धमकाने या प्रलोभन देने जैसी गतिविधियों पर भी पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। हालांकि, अनिवार्य सेवाओं जैसे अस्पताल जा रहे मरीजों, स्कूल-कॉलेज के छात्रों, बारात, शवयात्रा और ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मियों को इन प्रतिबंधात्मक आदेशों से मुक्त रखा गया है।


