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Politics Election: आगामी पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा की बड़ी रणनीति, कांग्रेस रहेगी निशाने पर

Politics Election: आने वाले समय में देश के पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने अपनी बिसात बिछानी शुरू कर दी है। राजनीतिक गलियारों से छनकर आ रही खबरों के मुताबिक, भाजपा के चुनावी हमलों के केंद्र में इस बार भी मुख्य रूप से कांग्रेस ही रहने वाली है। दिलचस्प बात यह है कि चुनावी मुकाबला चाहे किसी भी क्षेत्रीय दल से हो, भाजपा के रणनीतिकार कांग्रेस को ही घेरने की योजना बना रहे हैं। पार्टी का मानना है कि विपक्षी गठबंधन की धुरी आज भी कांग्रेस ही है, इसलिए उसे कमजोर करना उनके राष्ट्रीय एजेंडे के लिए बेहद जरूरी है।

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अलग-अलग राज्यों के समीकरण और भाजपा का रुख

इन पांच राज्यों के चुनावी मैदान )Politics Electionको देखें तो हर जगह स्थितियां भिन्न हैं, लेकिन भाजपा की रणनीति में एक समानता दिखती है। असम में भाजपा का सीधा मुकाबला कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन से है। वहीं, केरल की बात करें तो वहां उसे कांग्रेस और वामपंथी दलों (एलडीएफ-यूडीएफ) की दोहरी चुनौती से पार पाना है। तमिलनाडु के परिदृश्य में कांग्रेस वर्तमान सत्तारूढ़ गठबंधन का एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्सा है। हालांकि, पश्चिम बंगाल में मुकाबला थोड़ा अलग है, क्योंकि वहां मुख्य संघर्ष तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच सिमटा हुआ नजर आता है। इसके बावजूद, भाजपा के केंद्रीय प्रचारकों के भाषणों में कांग्रेस पर प्रहार निरंतर जारी रहने की उम्मीद है।

कांग्रेस को ही मुख्य प्रतिद्वंद्वी मानने के पीछे का तर्क

भाजपा के वरिष्ठ रणनीतिकारों का स्पष्ट मत है कि विपक्षी खेमे की एकजुटता कांग्रेस के इर्द-गिर्द ही बुनी गई है। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने चर्चा के दौरान बताया कि पिछले सात दशकों के राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें, तो कांग्रेस ने सबसे अधिक समय तक देश पर शासन किया है। यही कारण है कि भाजपा के पास नीतिगत और ऐतिहासिक मोर्चे पर कांग्रेस को घेरने के लिए पर्याप्त मुद्दे मौजूद हैं। भाजपा का मानना है कि उसने केंद्र और राज्यों में जो अपनी पकड़ मजबूत की है, वह काफी हद तक कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाकर ही संभव हो पाया है। ऐसे में अपने उस समर्थक वर्ग को एकजुट रखने के लिए कांग्रेस की विचारधारा पर प्रहार करना भाजपा के लिए अनिवार्य हो जाता है।

केंद्रीय नेतृत्व बनाम स्थानीय इकाई की रणनीति

सूत्रों की मानें तो भाजपा ने अपनी इस रणनीति को दो स्तरों पर विभाजित किया है। चुनाव प्रचार के दौरान जब प्रधानमंत्री, गृह मंत्री और अन्य केंद्रीय नेता मैदान में उतरेंगे, तो उनका पूरा ध्यान कांग्रेस की विफलताओं और राष्ट्रीय मुद्दों पर केंद्रित रहेगा। दूसरी ओर, राज्यों की स्थानीय इकाइयों और क्षेत्रीय नेताओं को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे स्थानीय समीकरणों और वहां के क्षेत्रीय विरोधियों जैसे तृणमूल या वामपंथी दलों को जमीनी मुद्दों पर घेरें। इस प्रकार पार्टी राष्ट्रीय और स्थानीय, दोनों स्तरों पर एक साथ मोर्चा संभालने की तैयारी में है।

गठबंधन की मर्यादा और राष्ट्रीय दल की भूमिका

भाजपा अपनी चुनावी रणनीति को सहयोगियों के साथ तालमेल बिठाकर भी आगे बढ़ा रही है। गठबंधन की राजनीति में अक्सर क्षेत्रीय दलों के अपने विशिष्ट मुद्दे होते हैं, लेकिन एक राष्ट्रीय पार्टी होने के नाते भाजपा कई बार उन बेहद स्थानीय विवादों में सीधे तौर पर नहीं उलझती है। वह अपने ‘एजेंडे’ को व्यापक रखते हुए विकास और सांस्कृतिक पहचान जैसे बड़े विषयों पर ध्यान केंद्रित करती है। भाजपा का मानना है कि कांग्रेस पर हमलावर रहकर वह न केवल उस राज्य में बढ़त हासिल कर सकती है, बल्कि देश के अन्य हिस्सों में भी अपने कार्यकर्ताओं का मनोबल ऊंचा रख सकती है।

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