झारखण्ड

eVidhan – अब कागजों से मुक्त होगी सदन की कार्यवाही, हुई ये बड़ी पहल

eVidhan – झारखंड विधानसभा ने अपनी कार्यप्रणाली को आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब सदन की कार्यवाही को कागजरहित बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। नेशनल ई-विधान एप्लीकेशन (नेवा) के जरिए विधानसभा को चरणबद्ध तरीके से डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाया जा रहा है। 18 फरवरी से शुरू हो रहे बजट सत्र में इसकी आंशिक शुरुआत होगी, जबकि आगामी मानसून सत्र से पूरी विधानसभा पूरी तरह पेपरलेस तरीके से संचालित की जाएगी।

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डिजिटल व्यवस्था की तैयारी का जायजा

इस नई व्यवस्था को लागू करने से पहले स्पीकर रबीन्द्रनाथ महतो ने विधानसभा भवन में लगाए गए डिजिटल उपकरणों का निरीक्षण किया। उन्होंने सभा कक्ष में स्थापित स्क्रीन, नेटवर्क सिस्टम और अन्य तकनीकी संसाधनों की स्थिति की समीक्षा की। अधिकारियों ने उन्हें बताया कि तकनीकी ढांचा लगभग तैयार है और सदन की कार्यवाही को डिजिटल रूप से संचालित करने में किसी प्रकार की बाधा नहीं आएगी। इस बदलाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर भी विशेष तैयारी की गई है ताकि सत्र के दौरान किसी तरह की तकनीकी परेशानी न हो।

नेवा सेवा केंद्र का उद्घाटन

विधानसभा परिसर में स्थापित नेवा सेवा केंद्र का उद्घाटन मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन करेंगे। इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी, संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर, अन्य मंत्री और सभी विधायक मौजूद रहेंगे। उद्घाटन के बाद विधायकों और मंत्रियों को इस नई प्रणाली के उपयोग की जानकारी दी जाएगी। दोपहर 12:30 बजे सेंट्रल हॉल में विशेष प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसमें तकनीकी विशेषज्ञ उन्हें ऑनलाइन प्रक्रिया, लॉग-इन प्रणाली और दस्तावेजों के डिजिटल उपयोग के बारे में समझाएंगे।

विधायकों को मिलेंगे टैबलेट

डिजिटल व्यवस्था के तहत सभी विधायकों को टैबलेट कंप्यूटर उपलब्ध कराए जाएंगे। इन उपकरणों के जरिए वे सदन से जुड़े दस्तावेज, प्रश्न, कार्यसूची और अन्य सामग्री देख सकेंगे। बजट सत्र से ही विधायक शून्यकाल की सूचनाएं ऑनलाइन जमा कर सकेंगे। अब उन्हें प्रश्न जमा करने के लिए देर रात या सुबह जल्दी विधानसभा भवन पहुंचने की आवश्यकता नहीं होगी। वे घर बैठे ही निर्धारित पोर्टल के माध्यम से अपनी सूचना अपलोड कर सकेंगे।

प्रश्नोत्तर प्रणाली में आएगा बदलाव

जब विधानसभा पूरी तरह पेपरलेस हो जाएगी, तब प्रश्न पूछने और उनके उत्तर प्राप्त करने की प्रक्रिया भी डिजिटल हो जाएगी। विधायक अपने प्रश्न ऑनलाइन दर्ज करेंगे और विभागों की ओर से दिए गए उत्तर भी डिजिटल माध्यम से उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे समय की बचत होगी और कार्यवाही अधिक सुव्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ सकेगी। माना जा रहा है कि इस व्यवस्था से प्रश्नों की संख्या और उनकी गुणवत्ता दोनों में सुधार आएगा।

जनता को भी मिलेगा डिजिटल लाभ

नेवा के अगले चरण में विधानसभा की कार्यवाही को आम नागरिकों के लिए भी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की योजना है। प्रश्नोत्तर सूची, विधेयक, प्रस्ताव, ध्यानाकर्षण सूचनाएं, समितियों की रिपोर्ट और सदन की पूरी कार्यवाही का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और आम लोग भी अपने प्रतिनिधियों के कामकाज को आसानी से देख सकेंगे। डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से भविष्य में दस्तावेजों को सुरक्षित रखना और उनकी खोज करना भी आसान होगा।

प्रशासनिक पारदर्शिता की दिशा में कदम

विशेषज्ञों का मानना है कि यह पहल प्रशासनिक पारदर्शिता और दक्षता बढ़ाने में सहायक होगी। कागज की खपत कम होने से पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी। साथ ही, दस्तावेजों के त्वरित आदान-प्रदान से निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी। झारखंड विधानसभा का यह कदम अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है, जहां डिजिटल प्रणाली को अपनाने की दिशा में प्रयास जारी हैं।

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