Iran Conflict – हमले के दौरान खामेनेई के दफ्तर में मौजूद थे अराघची
Iran Conflict – ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में एक साक्षात्कार में उस घटना का उल्लेख किया है, जब ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के शुरुआती दौर में अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय परिसर पर हमला हुआ था। अराघची के अनुसार, उस समय वह स्वयं भी उसी परिसर में मौजूद थे और हमले के दौरान सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे।

लेबनान के एक टेलीविजन चैनल को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने बताया कि हमले के बाद पैदा हुई स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण थी। मलबे और अव्यवस्था के बीच उनकी सबसे बड़ी चिंता तत्कालीन सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की सुरक्षा को लेकर थी। उन्होंने कहा कि शुरुआती घंटों में उपलब्ध जानकारी सीमित होने के कारण कई लोगों को उनकी स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल पाई थी।
हमले के बाद बनी रही अनिश्चितता
अराघची ने बताया कि घटना के बाद बचाव और राहत कार्यों के बीच कई घंटों तक स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि उस समय उनका ध्यान प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और हालात का आकलन करने पर केंद्रित था।
विदेश मंत्री के अनुसार, कुछ समय तक उन्हें भी खामेनेई की स्थिति के बारे में निश्चित जानकारी नहीं मिल सकी थी। यही कारण था कि शुरुआती दिनों में उनके मन में लगातार चिंता बनी रही। उन्होंने इस अवधि को संघर्ष के सबसे संवेदनशील चरणों में से एक बताया।
सुरक्षित स्थान पर जाने से किया था इनकार
साक्षात्कार के दौरान अराघची ने यह भी दावा किया कि अली खामेनेई को कई बार अधिक सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी गई थी। हालांकि, उनके अनुसार, खामेनेई ने ऐसी सलाह स्वीकार नहीं की और आम नागरिकों के साथ समान परिस्थितियों में रहने की इच्छा जताई थी।
अराघची ने बताया कि खामेनेई का मानना था कि यदि आम लोग जोखिम का सामना कर रहे हैं, तो नेतृत्व को भी उसी स्थिति में रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि संकट के समय भी खामेनेई प्रशासनिक और रणनीतिक मामलों पर लगातार नजर बनाए हुए थे।
क्षेत्रीय देशों को पहले ही दी गई थी चेतावनी
ईरानी विदेश मंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि संघर्ष तेज होने से पहले तेहरान ने क्षेत्र के कई देशों को अपनी चिंताओं से अवगत कराया था। उनके मुताबिक, ईरान ने स्पष्ट किया था कि यदि उसके खिलाफ किसी सैन्य कार्रवाई में विदेशी ठिकानों का उपयोग किया गया, तो वह इसे गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देखेगा।
अराघची ने कहा कि क्षेत्रीय दौरों के दौरान ईरानी पक्ष ने इस विषय पर कई देशों से चर्चा की थी। उनका कहना था कि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को सतर्कता और संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जताई आपत्ति
विदेश मंत्री ने अमेरिकी सैन्य उपस्थिति को लेकर भी अपनी सरकार का रुख दोहराया। उन्होंने कहा कि ईरान लंबे समय से क्षेत्र में मौजूद विदेशी सैन्य ठिकानों को लेकर चिंता व्यक्त करता रहा है। उनके अनुसार, ऐसे ठिकाने तनाव बढ़ने की स्थिति में क्षेत्रीय देशों को भी प्रभावित कर सकते हैं।
अराघची का दावा है कि कई पड़ोसी देशों ने अपनी भूमि का उपयोग किसी सैन्य कार्रवाई के लिए किए जाने पर आपत्ति जताई थी। हालांकि, इस विषय पर विभिन्न देशों और संबंधित पक्षों की अपनी-अपनी आधिकारिक स्थिति रही है।
क्षेत्रीय तनाव पर बनी हुई है वैश्विक नजर
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर दुनिया की नजर बनी हुई है। ईरान, इजरायल, अमेरिका और क्षेत्रीय देशों के बीच सुरक्षा, कूटनीति और सैन्य गतिविधियों से जुड़े मुद्दे लगातार अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बने हुए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने के लिए संवाद और कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। मौजूदा परिस्थितियों में विभिन्न देशों के बयानों और कदमों पर वैश्विक समुदाय लगातार नजर रख रहा है।