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PuneClash – टीपू सुल्तान टिप्पणी पर पुणे में पथराव, नौ घायल

PuneClash – पुणे में रविवार को राजनीतिक बयानबाज़ी ने अचानक हिंसक मोड़ ले लिया, जब कांग्रेस नेता हर्षवर्धन सपकाल की एक टिप्पणी के विरोध में भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। स्थिति इतनी बिगड़ी कि दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए और पथराव की घटना में कुल नौ लोग घायल हो गए। पुलिस ने देर शाम दोनों पक्षों के खिलाफ मामले दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी।

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विरोध प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव

संयुक्त पुलिस आयुक्त रंजन कुमार शर्मा के अनुसार, कांग्रेस भवन के निकट विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इसी दौरान भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नारेबाज़ी शुरू हुई, जो धीरे-धीरे टकराव में बदल गई। कुछ कार्यकर्ता दीवारों पर चढ़ गए और देखते ही देखते पत्थरबाज़ी शुरू हो गई।

पुलिस के मुताबिक, इस घटना में तीन कांग्रेस कार्यकर्ता, दो भाजपा समर्थक, दो पुलिसकर्मी और दो मीडियाकर्मी हल्के रूप से घायल हुए। सभी को प्राथमिक उपचार दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया था, फिर भी अचानक हालात बिगड़ गए।

पुलिस कार्रवाई और दर्ज हुए मामले

शाम तक शिवाजीनगर थाने में दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के खिलाफ अलग-अलग धाराओं में मामला दर्ज किया गया। पुलिस उपायुक्त कृषिकेश रावले ने बताया कि टकराव को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा और स्थिति को जल्द काबू में कर लिया गया।

अधिकारियों ने कहा है कि घटनास्थल के वीडियो फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच की जा रही है, ताकि जिम्मेदार लोगों की पहचान कर आगे की कार्रवाई की जा सके।

कांग्रेस ने दर्ज कराई लिखित शिकायत

कांग्रेस की पुणे शहर इकाई के अध्यक्ष अरविंद शिंदे ने आरोप लगाया कि भाजपा पदाधिकारियों के नेतृत्व में प्रदर्शन के दौरान पत्थर फेंके गए। उन्होंने महापौर मंजुषा नागपुरे, भाजपा शहर अध्यक्ष धीरज घाटे और अन्य नेताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी।

कांग्रेस के उपाध्यक्ष मोहन जोशी ने कहा कि उनके दो कार्यकर्ता घायल हुए हैं और पार्टी निष्पक्ष जांच की मांग कर रही है। घटना के विरोध में कुछ समय के लिए शिवाजीनगर थाने के बाहर धरना भी दिया गया।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह पूरा घटनाक्रम टीपू सुल्तान से जुड़ी एक टिप्पणी के बाद शुरू हुआ। इससे पहले मालेगांव महानगरपालिका की उप-महापौर के कार्यालय में टीपू सुल्तान का चित्र लगाए जाने को लेकर भी विवाद खड़ा हो चुका था। कुछ संगठनों और दलों ने इस पर आपत्ति जताई थी।

हर्षवर्धन सपकाल ने एक बयान में छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान के संदर्भ में ऐतिहासिक प्रसंगों का उल्लेख किया था। उनकी इस टिप्पणी को लेकर भाजपा ने कड़ी प्रतिक्रिया दी और पुणे में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया।

भाजपा की शिकायत और प्रतिक्रिया

भाजपा के शहर अध्यक्ष धीरज घाटे ने पर्वती थाने में सपकाल के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। उनके अनुसार, यह टिप्पणी धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली है। पुलिस ने इस शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की है।

भाजपा नेताओं का कहना है कि इतिहास से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। पार्टी का आरोप है कि इस प्रकार के बयान समाज में अनावश्यक विवाद को जन्म देते हैं।

कांग्रेस का पलटवार

वहीं, कांग्रेस के नेता सचिन सावंत ने भाजपा पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया। उनका दावा है कि पूर्व में भाजपा के कुछ नेताओं ने टीपू सुल्तान के संबंध में सकारात्मक टिप्पणी की थी। सावंत ने विभिन्न उदाहरणों का हवाला देते हुए कहा कि वर्तमान विरोध राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित है।

उन्होंने यह भी कहा कि ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को लेकर बहस हो सकती है, लेकिन हिंसा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

इतिहास और राजनीति के बीच बहस

टीपू सुल्तान को लेकर देश में अलग-अलग मत रहे हैं। कुछ लोग उन्हें अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष के लिए याद करते हैं, तो कुछ उनके शासनकाल को लेकर आलोचनात्मक दृष्टिकोण रखते हैं। दूसरी ओर, छत्रपति शिवाजी महाराज को व्यापक रूप से सैन्य नेतृत्व और प्रशासनिक दक्षता के लिए सम्मानित किया जाता है।

पुणे की यह घटना बताती है कि ऐतिहासिक मुद्दे आज भी राजनीतिक विमर्श में संवेदनशील बने हुए हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है और प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है।

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