राष्ट्रीय

Naravane – अनछपी आत्मकथा से संसद में टकराव, सरकार और विपक्ष आमने-सामने

Naravane – पिछले तीन दिनों में संसद के भीतर और बाहर सियासी माहौल असामान्य रूप से गरमा गया है। इसकी वजह पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की अभी तक अप्रकाशित आत्मकथा ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ बनी है। इस किताब के कथित अंशों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चीन नीति पर सवाल उठाते हुए पुस्तक के हवाले दिए, जिस पर सरकार ने कड़ी आपत्ति जताई। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का तर्क है कि चूंकि यह पुस्तक अभी औपचारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए इसे संसद में संदर्भ के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, यह पांडुलिपि 2023 से रक्षा मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार कर रही है। इस पूरे विवाद के बीच जनरल नरवणे ने सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, हालांकि वे पहले कई मंचों पर किताब और उसके प्रकाशन में हो रही देरी पर अपनी निराशा जता चुके हैं।

Naravane Naravane Anchhpi Aatmktha Snsd Men

WhatsApp Group Join Now

आत्मकथा लिखने का अप्रत्याशित सफर

जनरल नरवणे ने खुद बताया है कि उन्होंने कभी आत्मकथा लिखने की योजना नहीं बनाई थी। अप्रैल 2025 में एक बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि मार्च 2023 में वे दिवंगत जनरल बिपिन रावत पर आधारित एक किताब के विमोचन समारोह में गए थे, जिसे पेंगुइन ने प्रकाशित किया था। वहीं अनौपचारिक चर्चा में उन्होंने मजाक में कहा था कि प्रकाशक ने उनकी कोई किताब नहीं छापी। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने कुछ लिखा है, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। बातचीत आगे बढ़ी और प्रकाशक ने सुझाव दिया कि अगर वे लिखें तो वे उसे प्रकाशित करना चाहेंगे। इसी अनौपचारिक संवाद ने उन्हें लिखने के लिए प्रेरित किया। छह महीने बाद कसौली के एक साहित्यिक आयोजन में उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना काम पूरा कर दिया है और अब फैसला प्रकाशक और रक्षा मंत्रालय के बीच है।

प्रकाशन में देरी पर जनरल की प्रतिक्रिया

पुस्तक पर लगी रोक और लंबी समीक्षा प्रक्रिया पर सवाल पूछे जाने पर जनरल नरवणे ने संतुलित लेकिन स्पष्ट राय रखी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में जानकारी की समीक्षा स्वाभाविक है, क्योंकि सेना प्रमुख के रूप में उन्हें अपने विभाग की सीमाओं का पता होता है, लेकिन यह नहीं कि उनके बयानों का अन्य मंत्रालयों या अंतरराष्ट्रीय संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है। इसलिए समीक्षा जरूरी है, ताकि अनजाने में कोई संवेदनशील बात सार्वजनिक न हो जाए। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि समीक्षा के लिए कोई तय समयसीमा होनी चाहिए, क्योंकि 15 महीने तक इंतजार करना उचित नहीं है। कसौली में उन्होंने रूपक का सहारा लेते हुए कहा था कि किताब ‘पुरानी शराब’ की तरह परिपक्व हो रही है, लेकिन यह प्रतीक्षा उन्हें खलती भी है।

अचानक फिर क्यों चर्चा में आई किताब

2 फरवरी से यह मामला फिर सुर्खियों में आया, जब राहुल गांधी ने लोकसभा में द कारवां पत्रिका का एक लेख पढ़ा, जिसमें किताब के कथित अंश उद्धृत थे। जनरल नरवणे ने इन अंशों पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। वहीं राजनाथ सिंह ने दावा किया कि पांडुलिपि में तथ्यात्मक त्रुटियां हैं और अगर जनरल को आपत्ति होती तो वे कानूनी रास्ता अपना सकते थे। इसके जवाब में राहुल गांधी ने संसद परिसर में किताब की एक मुद्रित प्रति कैमरों के सामने दिखाते हुए कहा कि यह मौजूद है, जबकि सरकार इसे नकार रही है।

‘जो उचित समझो, वो करो’ पर विवाद

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पुस्तक के अनुसार, जब जनरल नरवणे ने रक्षा मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को सीमा पर चीनी टैंकों की मौजूदगी की जानकारी दी, तो उन्हें लंबे समय तक स्पष्ट निर्देश नहीं मिले। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने कथित तौर पर कहा, ‘जो उचित समझो, वो करो’, जिससे यह संकेत मिलता है कि उन्होंने निर्णायक जिम्मेदारी सेना प्रमुख पर छोड़ दी। कांग्रेस ने इसे नेतृत्व की विफलता बताया, जबकि सरकार ने इसे आधारहीन व्याख्या करार दिया।

संसद में गतिरोध बरकरार

इन आरोपों के कारण सोमवार से लोकसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हो रही है, खासकर राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान। सरकार का कहना है कि अप्रकाशित पुस्तक के अंशों का हवाला देना संसदीय नियमों के खिलाफ है और राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुंचा सकता है। स्पीकर ओम बिरला ने भी इस तर्क से सहमति जताई। राजनाथ सिंह ने चुनौती दी कि अगर राहुल गांधी किताब का हवाला दे रहे हैं, तो उसे सदन के सामने पेश करें ताकि सब देख सकें। अब तक इस पर कोई औपचारिक समाधान नहीं निकल पाया है।

आखिर किताब कहां है

राहुल गांधी द्वारा दिखाई गई प्रति के बावजूद, ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ आम पाठकों के लिए कभी उपलब्ध नहीं हुई। प्रकाशक पेंगुइन ने 2023 के अंत में घोषणा की थी कि इसे अप्रैल 2024 में रिलीज किया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अमेजन पर अब भी इसकी लिस्टिंग है, लेकिन उपलब्धता ‘फिलहाल नहीं’ दिखती है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर इसे 448 पृष्ठों की किताब बताया गया है। दिलचस्प बात यह है कि जनरल नरवणे का सैन्य थ्रिलर उपन्यास ‘द कैंटोनमेंट कॉन्स्पिरेसी’ मार्च 2025 में प्रकाशित हो चुका है, जबकि उनकी आत्मकथा अब भी मंजूरी के पेंच में फंसी हुई है।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.