TradeDeal – भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की तैयारी
TradeDeal – भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौता अब औपचारिक रूप लेने की दिशा में बढ़ रहा है। दोनों देशों ने हाल ही में इस डील की रूपरेखा पर सहमति जताई थी और अब इसे कानूनी रूप देने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने जानकारी दी कि इस समझौते को अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभा रहे भारत के मुख्य वार्ताकार दर्पण जैन अगले सप्ताह अमेरिकी दौरे पर जाएंगे। इस यात्रा के दौरान समझौते के कानूनी पाठ पर मुहर लगाने की उम्मीद है।

टैरिफ में प्रस्तावित राहत
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत रेसिप्रोकल टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने की प्रक्रिया में है। यह कटौती जल्द लागू हो सकती है। सचिव अग्रवाल ने कहा कि इस संबंध में प्रशासनिक प्रक्रिया जारी है और भारत को उम्मीद है कि यह निर्णय इसी सप्ताह प्रभावी हो जाएगा।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि 27 अगस्त से लागू 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क को पहले ही हटा दिया गया है। अब शेष रेसिप्रोकल टैरिफ में कमी पर काम चल रहा है। यदि इसमें देरी होती है तो भारतीय प्रतिनिधिमंडल अमेरिका में संबंधित अधिकारियों के साथ चर्चा करेगा।
समझौते को कानूनी रूप देने की प्रक्रिया
संयुक्त बयान में जिस फ्रेमवर्क एग्रीमेंट का उल्लेख किया गया था, अब उसे औपचारिक लीगल एग्रीमेंट में बदलने की तैयारी है। दोनों पक्ष कानूनी मसौदे को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। दर्पण जैन के नेतृत्व में भारतीय टीम इस मसौदे पर विस्तार से बातचीत करेगी।
राजेश अग्रवाल ने संकेत दिया कि भारत की कोशिश है कि मार्च तक इस समझौते को अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाए। हालांकि, उन्होंने हस्ताक्षर की कोई निश्चित तिथि बताने से परहेज किया। अधिकारियों का कहना है कि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है और दोनों देशों की ओर से प्रतिबद्धता स्पष्ट है।
भारतीय निर्यात को मिल सकती है मजबूती
टैरिफ में कमी से भारतीय मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट को राहत मिलने की संभावना है। अमेरिका भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है और शुल्क घटने से प्रतिस्पर्धा की स्थिति बेहतर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे वस्त्र, इंजीनियरिंग सामान, रत्न-आभूषण और अन्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।
सरकार का मानना है कि व्यापार संतुलन को मजबूत करने के लिए यह कदम महत्वपूर्ण साबित होगा। शुल्क में कमी के साथ-साथ बाजार पहुंच आसान होने से कारोबारी माहौल में स्थिरता आएगी।
भारत की ओर से प्रस्तावित रियायतें
संयुक्त बयान के अनुसार, भारत भी कुछ अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क घटाने या समाप्त करने पर सहमत हुआ है। इसमें ऊर्जा उत्पाद, विमान और उनके पुर्जे, कीमती धातुएं, प्रौद्योगिकी उपकरण और कोकिंग कोयला शामिल हैं। भारत ने अगले पांच वर्षों में लगभग 500 अरब डॉलर के अमेरिकी उत्पादों की खरीद का इरादा जताया है।
इस पहल को दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में एक आधार तैयार करेगा।
व्यापक रणनीतिक साझेदारी की दिशा में कदम
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंध पिछले कुछ वर्षों में लगातार मजबूत हुए हैं। यह अंतरिम समझौता न केवल टैरिफ विवाद को सुलझाने की कोशिश है, बल्कि व्यापक आर्थिक साझेदारी को भी नई गति देने का प्रयास है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इस डील से दोनों देशों को पारस्परिक लाभ मिल सकता है। एक ओर जहां अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा क्षमता बढ़ेगी, वहीं भारत को ऊर्जा और उन्नत तकनीक जैसे क्षेत्रों में आपूर्ति सुनिश्चित करने का अवसर मिलेगा।
अब नजर अगले सप्ताह होने वाली वार्ता पर है, जहां समझौते के कानूनी पहलुओं को अंतिम रूप दिया जाएगा। यदि सब कुछ तय योजना के मुताबिक चलता है, तो आने वाले महीनों में यह डील औपचारिक रूप से लागू हो सकती है।



