उत्तराखण्ड

ModernMadrasa – देहरादून में पहले आधुनिक मदरसे को मान्यता

ModernMadrasa – उत्तराखंड में शिक्षा के क्षेत्र में एक नई पहल सामने आई है। हाल ही में कुछ मदरसों की मान्यता रद्द किए जाने के बाद अब राज्य को उसका पहला आधुनिक मदरसा मिला है। राजधानी देहरादून के लक्खीबाग स्थित मुस्लिम कॉलोनी में स्थापित डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम मॉडर्न मदरसे को राज्य शिक्षा विभाग ने औपचारिक मान्यता प्रदान कर दी है। इसी शैक्षणिक सत्र से यहां नर्सरी से आठवीं कक्षा तक अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाई शुरू की जाएगी।

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सरकार का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य पारंपरिक धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक विषयों को जोड़कर विद्यार्थियों को व्यापक अवसर उपलब्ध कराना है।

पांच वर्षों के लिए मिली स्वीकृति

मुख्य शिक्षा अधिकारी विनोद कुमार ढौंडियाल द्वारा जारी आदेश के अनुसार, इस संस्थान को प्रारंभिक तौर पर पांच वर्ष की मान्यता दी गई है। इस अवधि में संस्थान को निर्धारित शैक्षणिक मानकों का पालन करना होगा।

मदरसे में 300 से अधिक छात्र-छात्राओं के दाखिले की व्यवस्था की गई है। यहां धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान और कंप्यूटर जैसे विषयों की पढ़ाई भी कराई जाएगी। शिक्षा का माध्यम अंग्रेजी रखा गया है, ताकि विद्यार्थी उच्च शिक्षा और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के लिए बेहतर रूप से तैयार हो सकें।

निशुल्क शिक्षा का प्रावधान

संस्थान में शिक्षा का संचालन बाल शिक्षा के अधिकार अधिनियम के तहत किया जाएगा। इसका अर्थ है कि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बिना किसी शुल्क के पढ़ाई का अवसर मिलेगा।

शिक्षा विभाग के अधिकारियों का मानना है कि यह मॉडल उन परिवारों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है, जो धार्मिक शिक्षा के साथ आधुनिक पाठ्यक्रम की सुविधा चाहते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण निजी स्कूलों तक नहीं पहुंच पाते।

वक्फ बोर्ड की विस्तृत योजना

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस पहल को महत्वपूर्ण कदम बताते हुए कहा कि यह योजना केवल देहरादून तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने जानकारी दी कि भविष्य में हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और नैनीताल जैसे जिलों में भी इसी तर्ज पर आधुनिक मदरसे स्थापित करने की योजना है।

उनके अनुसार, उद्देश्य यह है कि धार्मिक संस्थानों को समय की जरूरतों के अनुरूप ढाला जाए, ताकि वहां पढ़ने वाले छात्र मुख्यधारा की शिक्षा से पीछे न रहें।

धार्मिक और आधुनिक शिक्षा का संतुलन

वक्फ बोर्ड का कहना है कि नए मॉडल में पारंपरिक इस्लामी अध्ययन के साथ कंप्यूटर शिक्षा और अन्य आधुनिक विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शादाब शम्स ने कहा कि बच्चों को ऐसा वातावरण मिलना चाहिए, जहां वे अपनी धार्मिक जड़ों से जुड़े रहते हुए तकनीकी और व्यावसायिक कौशल भी सीख सकें।

उनका मानना है कि बदलते दौर में केवल एक तरह की शिक्षा पर्याप्त नहीं है। यदि विद्यार्थी दोनों धाराओं में दक्ष होंगे, तो उनके लिए रोजगार और उच्च शिक्षा के रास्ते अधिक खुले रहेंगे।

समुदाय में सकारात्मक प्रतिक्रिया

स्थानीय स्तर पर इस पहल को लेकर मिश्रित लेकिन उत्सुक प्रतिक्रिया देखी जा रही है। कई अभिभावकों ने इसे स्वागत योग्य कदम बताया है, क्योंकि इससे बच्चों को एक ही परिसर में दोहरी शिक्षा मिल सकेगी। वहीं कुछ लोग इसके क्रियान्वयन और गुणवत्ता पर नजर बनाए हुए हैं।

शिक्षा विभाग का कहना है कि नियमित निरीक्षण और मानकों के पालन के जरिए संस्थान की गुणवत्ता सुनिश्चित की जाएगी।

इस पहल को राज्य में शिक्षा सुधार की दिशा में एक प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है, जो आने वाले समय में अन्य संस्थानों के लिए भी मार्गदर्शक बन सकता है।

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