Cholesterol – हृदय रोगियों के लिए कौन सा दूध है बेहतर विकल्प…
Cholesterol – दूध को लंबे समय से पोषण का अहम स्रोत माना जाता रहा है। इसमें कैल्शियम, प्रोटीन और कई आवश्यक विटामिन पाए जाते हैं, जो हड्डियों और मांसपेशियों को मजबूत रखने में मदद करते हैं। लेकिन जब बात दिल की सेहत और बढ़ते कोलेस्ट्रॉल की आती है, तो कई लोग असमंजस में पड़ जाते हैं। खासकर वे लोग जिनकी रिपोर्ट में हाई कोलेस्ट्रॉल आता है या जो पहले से हृदय रोग से जूझ रहे हैं, अक्सर दूध पीना कम कर देते हैं या पूरी तरह छोड़ देते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि क्या सचमुच दूध कोलेस्ट्रॉल बढ़ाता है या फिर सही प्रकार का चयन करने से इसे संतुलित रखा जा सकता है।

कोलेस्ट्रॉल और शरीर की जरूरत
शरीर में कोलेस्ट्रॉल पूरी तरह हानिकारक नहीं होता। यह कोशिकाओं के निर्माण और कुछ हार्मोन बनाने में भूमिका निभाता है। समस्या तब होती है जब एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ जाती है। इससे धमनियों में चर्बी की परत जमने लगती है, जिसे प्लाक कहा जाता है। समय के साथ यह रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकती है और दिल के दौरे या स्ट्रोक का जोखिम बढ़ा सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार कुल कोलेस्ट्रॉल का स्तर 200 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर के आसपास रहना बेहतर माना जाता है।
दूध में मौजूद फैट का प्रभाव
चूंकि दूध पशु आधारित उत्पाद है, इसलिए इसमें प्राकृतिक रूप से वसा पाई जाती है। इसी वसा में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड दोनों मौजूद होते हैं। ट्राइग्लिसराइड का उच्च स्तर भी हृदय स्वास्थ्य के लिए जोखिमकारी हो सकता है। हालांकि, सभी प्रकार के दूध में वसा की मात्रा समान नहीं होती। यही कारण है कि डॉक्टर दूध पूरी तरह बंद करने के बजाय उसके प्रकार पर ध्यान देने की सलाह देते हैं।
विशेषज्ञ की सलाह क्या कहती है
हृदय रोग विशेषज्ञ डॉक्टर बिमल चटर्जी के अनुसार, दूध चुनते समय उसमें मौजूद वसा प्रतिशत को समझना जरूरी है। उनके मुताबिक भैंस के दूध में लगभग छह प्रतिशत तक ट्राइग्लिसराइड हो सकता है, जो अपेक्षाकृत अधिक है। गाय के दूध में यह मात्रा करीब चार प्रतिशत होती है। वहीं डबल टोन दूध में वसा की मात्रा लगभग दो प्रतिशत तक सीमित रहती है और स्किम्ड दूध में यह करीब आधा प्रतिशत के आसपास होती है।
डॉक्टर का कहना है कि जिन लोगों को हृदय संबंधी समस्या है या जिनका कोलेस्ट्रॉल स्तर अधिक रहता है, उन्हें कम वसा वाला विकल्प अपनाना चाहिए। डबल टोन या स्किम्ड दूध का सेवन अपेक्षाकृत सुरक्षित माना जाता है, क्योंकि इसमें संतृप्त वसा कम होती है।
संतुलित आहार की भूमिका
केवल दूध ही नहीं, बल्कि संपूर्ण आहार शैली हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। तली-भुनी चीजें, अत्यधिक मीठा और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ कोलेस्ट्रॉल स्तर बढ़ा सकते हैं। इसके विपरीत, हरी सब्जियां, साबुत अनाज, फल और नियमित व्यायाम अच्छे कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में सहायक होते हैं। दूध का चयन भी इसी संतुलन का हिस्सा होना चाहिए।
निष्कर्षतः, दूध को पूरी तरह त्याग देना आवश्यक नहीं है। सही प्रकार का दूध और संतुलित मात्रा में सेवन, साथ ही स्वस्थ जीवनशैली, हृदय को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं। किसी भी बदलाव से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर रहता है, ताकि व्यक्तिगत स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार निर्णय लिया जा सके।



