उत्तराखण्ड

LPG Crisis – देहरादून में गैस एजेंसी पर कार्रवाई, 854 सिलेंडर जब्त

LPG Crisis – देहरादून में रसोई गैस की कमी के बीच जिला प्रशासन ने नियमों की अनदेखी करने वाली एक गैस एजेंसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। शिमला बाईपास रोड स्थित शहीद हीरा गैस सर्विस पर प्रशासन ने मुकदमा दर्ज कराने के साथ ही बड़ी संख्या में सिलेंडर भी जब्त कर लिए। बताया जा रहा है कि एजेंसी प्रशासन द्वारा जारी होम डिलीवरी के निर्देशों का पालन नहीं कर रही थी, जिसके कारण इलाके में अव्यवस्था की स्थिति पैदा हो गई।

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प्रशासन के आदेशों की अनदेखी का आरोप

जिला प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि संबंधित गैस एजेंसी उपभोक्ताओं को घर तक सिलेंडर पहुंचाने के बजाय सीधे गोदाम से वितरण कर रही है। इस वजह से बड़ी संख्या में लोग सिलेंडर लेने के लिए गोदाम के बाहर इकट्ठा होने लगे। भीड़ बढ़ने के साथ वहां हंगामे और कानून व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका भी जताई गई।

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों की टीम मौके पर भेजी गई ताकि स्थिति का जायजा लेकर आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

संयुक्त टीम ने की जांच

उप जिलाधिकारी विकासनगर विनोद कुमार के नेतृत्व में तहसीलदार, जिला पूर्ति विभाग और क्यूआरटी की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची। जांच के दौरान पाया गया कि गैस सिलेंडरों का वितरण ट्रक के माध्यम से सीधे गोदाम से किया जा रहा था। यह व्यवस्था प्रशासन द्वारा तय किए गए नियमों के विपरीत थी, क्योंकि वर्तमान परिस्थितियों में केवल होम डिलीवरी के जरिए ही सिलेंडर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए थे।

जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की। प्रवर्तन दल ने एजेंसी के खिलाफ आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955, आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत थाना पटेलनगर में मुकदमा दर्ज कराया।

854 सिलेंडर जब्त

जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल ने बताया कि कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद सभी सिलेंडरों को जब्त कर लिया गया। कुल 854 सिलेंडर प्रशासनिक नियंत्रण में लेकर जिला पूर्ति विभाग और संबंधित तेल कंपनी को सुपुर्द कर दिए गए हैं।

प्रशासन का कहना है कि रसोई गैस की कमी के समय किसी भी प्रकार की अनियमितता या मनमानी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उपभोक्ताओं को राहत देने और वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है।

दो दिनों में तीसरा मामला दर्ज

रसोई गैस की किल्लत के बीच देहरादून में अनियमित वितरण और कालाबाजारी की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। प्रशासन के अनुसार, पिछले दो दिनों के भीतर यह तीसरा मामला है जिसमें गैस एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

इससे पहले शनिवार को डोईवाला और वसंत विहार क्षेत्रों में भी इसी तरह की शिकायतों पर मुकदमा दर्ज किया गया था। डोईवाला मामले में दो लोगों को गिरफ्तार भी किया गया था। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत पड़ने पर आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

अमरदीप गैस एजेंसी पर बढ़ा तनाव

रविवार को जीएसएस रोड स्थित अमरदीप गैस एजेंसी पर भी तनाव की स्थिति बन गई। बड़ी संख्या में उपभोक्ता खाली सिलेंडर लेकर सीधे गोदाम पहुंच गए और गैस देने की मांग करने लगे। हालांकि एजेंसी संचालकों ने प्रशासन के होम डिलीवरी नियमों का हवाला देते हुए मौके पर सिलेंडर देने से इनकार कर दिया।

इस बात को लेकर उपभोक्ताओं और कर्मचारियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई और देखते ही देखते स्थिति धक्का-मुक्की तक पहुंच गई। हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस को मौके पर बुलाया गया। एसओ बसंत विहार अशोक राठौर के अनुसार पुलिस ने मौके पर पहुंचकर लोगों को शांत कराया और स्थिति को नियंत्रण में लिया।

कई परिवारों के लिए चूल्हा बना सहारा

गैस की कमी का असर अब शहर के कई घरों में साफ दिखाई देने लगा है। कुछ परिवारों ने गैस खत्म होने के बाद चूल्हे पर खाना बनाना शुरू कर दिया है। लोग बाजार से लकड़ी खरीद रहे हैं, जबकि कुछ लोग आसपास के जंगलों से लकड़ी लाकर काम चला रहे हैं।

करणपुर की ओर लकड़ी लेकर जा रहे श्यामलाल का कहना है कि इन दिनों गैस आसानी से उपलब्ध नहीं हो रही, इसलिए मजबूरी में चूल्हे का सहारा लेना पड़ रहा है। रायपुर निवासी तारक बताते हैं कि उनका घर जंगल के पास है, इसलिए उन्होंने पहले से लकड़ी की व्यवस्था कर रखी है ताकि गैस की खपत कम की जा सके।

गैस एजेंसियों के चक्कर काट रहे उपभोक्ता

शहर के कई इलाकों में लोग गैस सिलेंडर के लिए लगातार एजेंसियों के चक्कर लगा रहे हैं। ब्राह्मणवाला के रहने वाले प्रमोद बताते हैं कि वे चार दिनों से एजेंसी के पास जा रहे हैं, लेकिन अब तक सिलेंडर नहीं मिल पाया। छह सदस्यों के परिवार में फिलहाल चूल्हे पर ही खाना बनाना पड़ रहा है।

डालनवाला में रहने वाले बंशीलाल, जो एक गैस एजेंसी में सिक्योरिटी गार्ड की नौकरी करते हैं, कहते हैं कि वे आमतौर पर छोटे सिलेंडर में बाजार से गैस भरवाते थे, लेकिन अब वह सुविधा भी उपलब्ध नहीं हो पा रही है। इससे रोजमर्रा के काम प्रभावित हो रहे हैं।

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