MiddleEastConflict – पश्चिम एशिया तनाव पर थरूर की अपील, भारत से पहल की मांग
MiddleEastConflict – पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष को लेकर कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने गहरी चिंता व्यक्त की है और भारत सरकार से इस दिशा में सक्रिय पहल करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात ऐसे मुकाम पर पहुंच चुके हैं, जहां आगे टकराव किसी भी पक्ष के हित में नहीं है। उनके मुताबिक, दोनों पक्ष अपने-अपने दावों के साथ एक सीमा तक पहुंच चुके हैं और अब युद्ध को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

संघर्ष के प्रभाव पर जताई चिंता
थरूर ने अपने बयान में कहा कि इस टकराव का असर केवल संबंधित देशों तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया इसकी कीमत चुका रही है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर दबाव बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी एक क्षेत्रीय विवाद की वजह से पूरे इलाके को बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए।
शांति बहाली में भारत की भूमिका पर जोर
उन्होंने भारत से अपील की कि वह अपने कूटनीतिक प्रभाव का उपयोग करते हुए इस संघर्ष को समाप्त कराने में भूमिका निभाए। थरूर का मानना है कि भारत जैसे देश, जिनके दोनों पक्षों से संतुलित संबंध हैं, शांति स्थापित करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के संकट में संवाद और कूटनीति ही सबसे प्रभावी रास्ता होता है।
चाबहार बंदरगाह पर बढ़ती चिंता
इसी बीच संसद की विदेश मामलों की समिति ने चाबहार बंदरगाह के भविष्य को लेकर चिंता जताई है। समिति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में कहा है कि पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों और अंतरराष्ट्रीय नीतिगत बदलावों के कारण इस परियोजना पर अनिश्चितता के बादल मंडरा रहे हैं। हालांकि, समिति ने यह भी माना कि केंद्र सरकार इस स्थिति से निपटने के लिए सभी संबंधित पक्षों के संपर्क में है।
बजट और निवेश का विवरण
रिपोर्ट के अनुसार, चाबहार बंदरगाह के विकास के लिए वर्ष 2025-26 में 100 करोड़ रुपये का प्रारंभिक प्रावधान किया गया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 400 करोड़ रुपये कर दिया गया। जनवरी 2026 तक यह पूरी राशि खर्च भी हो चुकी थी। विदेश मंत्रालय ने समिति को बताया कि 2026-27 के लिए इस मद में कोई नया आवंटन नहीं किया गया है, क्योंकि भारत पहले ही अपने वित्तीय दायित्वों को पूरा कर चुका है।
रणनीतिक महत्व पर समिति का जोर
विदेश मामलों की समिति ने चाबहार बंदरगाह को भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। यह बंदरगाह न केवल अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंच का विकल्प प्रदान करता है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे से जुड़ने में भी अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में इसके भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता भारत की रणनीतिक योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।
सरकार के प्रयासों को सराहना
समिति ने यह भी रेखांकित किया कि केंद्र सरकार मौजूदा परिस्थितियों के प्रभाव को कम करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयास कर रही है और संबंधित देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए है। इस पहल को सकारात्मक संकेत माना जा रहा है, हालांकि आगे की स्थिति वैश्विक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।