IDBIBankPrivatization – सरकार फिर शुरू करेगी निजीकरण प्रक्रिया, समीक्षा तेज
IDBIBankPrivatization – केंद्र सरकार ने IDBI बैंक के निजीकरण से जुड़ी प्रक्रिया को दोबारा शुरू करने का संकेत दिया है। हाल ही में प्राप्त वित्तीय बोलियां सरकार की अपेक्षा से काफी कम रहने के कारण इस प्रक्रिया को अस्थायी रूप से रोक दिया गया था। अब इस पूरे मामले को एक उच्चस्तरीय मंत्री समूह के समक्ष रखा जाएगा, जहां आगे की रणनीति पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, शुरुआती चर्चाओं में यही झुकाव दिख रहा है कि इस प्रक्रिया को नए सिरे से आगे बढ़ाया जाए।

पांच वर्षों से जारी है हिस्सेदारी बिक्री का प्रयास
सरकार पिछले लगभग पांच सालों से IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की कोशिश कर रही है। इस दौरान कई चरणों में प्रक्रिया आगे बढ़ी, लेकिन अब तक इसे अंतिम रूप नहीं मिल पाया है। ताजा घटनाक्रम के बाद सरकार अब पूरे ढांचे की विस्तृत समीक्षा करने की तैयारी में है। खासकर इस बात पर ध्यान दिया जा रहा है कि रिजर्व प्राइस तय करने का तरीका कितना व्यावहारिक था और क्या उसमें सुधार की जरूरत है।
रिजर्व प्राइस तय करने के तरीके पर सवाल
जानकारों का मानना है कि जिन बैंकों में सार्वजनिक हिस्सेदारी सीमित होती है, वहां केवल शेयर बाजार की कीमत के आधार पर रिजर्व प्राइस तय करना सही रणनीति नहीं होती। इससे बाजार में कृत्रिम उतार-चढ़ाव या संभावित हेरफेर का जोखिम बढ़ सकता है। ऐसे में सरकार अब वैकल्पिक मूल्यांकन तरीकों पर विचार कर सकती है, ताकि निवेशकों के लिए प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और संतुलित बन सके।
शेयर कीमत में आई गिरावट ने बढ़ाई चिंता
वित्तीय बोलियों के रद्द होने के बाद IDBI बैंक के शेयर में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। पिछले दिनों इसमें करीब 19 प्रतिशत की कमी देखी गई और यह अपने 52 हफ्तों के निचले स्तर के करीब पहुंच गया। मौजूदा स्थिति में सरकार के पास बैंक में 45.48 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि एलआईसी के पास 49.24 प्रतिशत हिस्सा है। शेष हिस्सेदारी आम निवेशकों के पास है, जो इस पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं।
सीमित बोलीदाताओं की भागीदारी
इस प्रक्रिया में अब तक केवल दो प्रमुख संस्थाओं ने वित्तीय बोलियां दाखिल की थीं, जिनमें फेयरफैक्स फाइनेंशियल और एमिरेट्स एनबीडी शामिल हैं। सीमित प्रतिस्पर्धा भी एक कारण माना जा रहा है, जिसकी वजह से अपेक्षित मूल्य प्राप्त नहीं हो सका। ऐसे में सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि नए चरण में अधिक निवेशक भाग लें और प्रतिस्पर्धा बढ़े।
पुराने निवेशकों को मिल सकती है राहत
सरकारी अधिकारियों के मुताबिक, यदि पहले से शामिल बोलीदाता दोबारा इस प्रक्रिया में हिस्सा लेना चाहते हैं, तो उन्हें फिर से पूरी मंजूरी प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा। इससे समय की बचत होगी और प्रक्रिया अपेक्षाकृत तेजी से आगे बढ़ सकेगी। हालांकि, नए निवेशकों के लिए सभी नियामकीय शर्तों का पालन अनिवार्य रहेगा।
विलय की संभावना से सरकार ने किया इनकार
इस बीच यह भी स्पष्ट किया गया है कि IDBI बैंक को किसी अन्य सरकारी बैंक के साथ विलय करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है। सरकार का ध्यान पूरी तरह निजीकरण की प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने पर केंद्रित है।
RBI और अन्य मंजूरियों की भूमिका अहम
नई प्रक्रिया में भी वही नियम लागू होंगे, जो पहले निर्धारित किए गए थे। संभावित खरीदार को RBI के ‘फिट एंड प्रॉपर’ मानकों पर खरा उतरना होगा। इसके अलावा प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) और अन्य संबंधित नियामकों से मंजूरी लेना भी जरूरी होगा। साथ ही, सफल बोलीदाता को छोटे निवेशकों के लिए ओपन ऑफर लाना होगा, ताकि वे भी अपने शेयर बेच सकें।



