राष्ट्रीय

AssamPolitics – चुनाव से पहले मंत्री नंदिता गार्लोसा ने बदला पाला

AssamPolitics – असम विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राज्य की राजनीति में अचानक हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की सरकार में मंत्री रहीं और भाजपा विधायक नंदिता गार्लोसा ने पार्टी छोड़कर कांग्रेस का दामन थाम लिया है। नामांकन की अंतिम तारीख से एक दिन पहले उठाए गए इस कदम ने चुनावी समीकरणों को नया मोड़ दे दिया है। माना जा रहा है कि यह फैसला हाफलोंग सीट पर टिकट कटने के बाद लिया गया।

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टिकट कटने के बाद बदला राजनीतिक रुख
भारतीय जनता पार्टी ने इस बार हाफलोंग विधानसभा सीट से नंदिता गार्लोसा को उम्मीदवार नहीं बनाया। उनकी जगह पार्टी ने रूपाली लांगथासा पर भरोसा जताया, जो उत्तरी कछार स्वायत्त जिला परिषद से जुड़ी युवा नेता हैं। गार्लोसा राज्य मंत्रिमंडल की ऐसी एकमात्र सदस्य थीं, जिनका टिकट इस चुनाव में काटा गया। इसी फैसले के बाद उन्होंने अपना राजनीतिक रुख बदलने का निर्णय लिया, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज कर दी।

कांग्रेस ने उम्मीदवार बदलकर बनाई नई रणनीति
नंदिता गार्लोसा के कांग्रेस में शामिल होते ही पार्टी ने अपनी रणनीति में तुरंत बदलाव किया। पहले इस सीट से कांग्रेस ने अपने वरिष्ठ नेता निर्मल लांगथासा को उम्मीदवार घोषित किया था। लेकिन गार्लोसा के आने के बाद निर्मल लांगथासा ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। पार्टी के अनुसार यह निर्णय व्यापक जनहित और स्थानीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए लिया गया। अब गार्लोसा कांग्रेस के टिकट पर इसी सीट से चुनाव मैदान में उतरेंगी।

राजनीतिक अनुभव और जिम्मेदारियों का रिकॉर्ड
नंदिता गार्लोसा 2021 में पहली बार विधायक चुनी गई थीं और इसके बाद उन्हें राज्य सरकार में कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी दी गई थी। उनके पास खेल और युवा कल्याण, ऊर्जा, सहकारिता, खनन और स्वदेशी आदिवासी आस्था एवं संस्कृति जैसे विभाग रहे हैं। दीमा हसाओ क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है, जो इस सीट को चुनावी दृष्टि से अहम बनाती है।

कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना
गार्लोसा के शामिल होने के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि गार्लोसा पिछले कुछ वर्षों से स्थानीय मुद्दों को मजबूती से उठाती रही हैं और अपने विचारों पर कायम रही हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उनकी यही स्पष्टता भाजपा नेतृत्व को स्वीकार नहीं थी। हालांकि इन आरोपों पर भाजपा की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

मुख्यमंत्री से मुलाकात भी रही चर्चा में
राजनीतिक घटनाक्रम के बीच मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने रविवार को गार्लोसा के निवास पर उनसे मुलाकात की थी। हालांकि इस बैठक के बारे में दोनों पक्षों ने कोई स्पष्ट जानकारी साझा नहीं की। इसके बावजूद यह मुलाकात चुनाव से पहले बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत के तौर पर देखी जा रही है।

चुनाव कार्यक्रम और अन्य राजनीतिक हलचल
असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए 9 अप्रैल को मतदान होना है, जबकि नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इस बीच राज्य में नेताओं के पार्टी बदलने का सिलसिला भी जारी है। हाल के महीनों में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं ने भाजपा का रुख किया है, जिससे राजनीतिक मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। ऐसे में नंदिता गार्लोसा का यह कदम चुनावी परिणामों पर किस तरह असर डालेगा, इस पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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