राष्ट्रीय

WomenReservation – तेज हुई संसद में महिला आरक्षण लागू करने की तैयारी

WomenReservation – देश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव लाने की दिशा में केंद्र सरकार सक्रिय नजर आ रही है। संसद के मौजूदा सत्र में महिलाओं को एक-तिहाई आरक्षण देने के लिए जरूरी विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है। प्रस्ताव है कि आने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनावों में 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की जाएं। इस पहल को राजनीतिक प्रतिनिधित्व में संतुलन लाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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लोकसभा सीटों में बड़े विस्तार की योजना
सरकारी योजना के अनुसार लोकसभा की कुल सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर 800 से अधिक करने पर विचार हो रहा है। प्रस्तावित ढांचे के तहत बड़ी संख्या में नई सीटें जोड़ी जाएंगी, जिनमें महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों का अहम हिस्सा होगा। इस बदलाव के बाद संसद में बहुमत का आंकड़ा भी बढ़ेगा, जिससे राजनीतिक गणित में व्यापक परिवर्तन देखने को मिल सकता है।

परिसीमन प्रक्रिया को लेकर नई रणनीति
महिला आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है। पहले इसे नई जनगणना से जोड़ा गया था, लेकिन अब सरकार इस शर्त में बदलाव पर विचार कर रही है। संकेत हैं कि 2011 की जनगणना के आधार पर ही परिसीमन किया जा सकता है, ताकि प्रक्रिया में देरी न हो। इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर आरक्षण लागू किया जा सके।

राज्यों के प्रतिनिधित्व को लेकर संतुलन
सीटों के पुनर्गठन को लेकर कुछ राज्यों, खासकर दक्षिण भारत में, प्रतिनिधित्व घटने की आशंका जताई जा रही थी। सरकार ने इस पर स्पष्ट किया है कि सभी राज्यों में सीटों की संख्या समान अनुपात में बढ़ाई जाएगी, जिससे किसी क्षेत्र का राजनीतिक महत्व कम न हो। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश, बिहार और केरल जैसे राज्यों में भी सीटों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई गई है।

SC और ST सीटों में भी संभावित वृद्धि
नई व्यवस्था के तहत अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटों की संख्या भी बढ़ सकती है। अनुमान है कि इन वर्गों के लिए आरक्षित सीटें मौजूदा संख्या से काफी अधिक हो जाएंगी। छोटे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सीटों के रोटेशन का प्रावधान रखा जा सकता है, जिससे हर कुछ चुनावों में महिलाओं को अवसर मिल सके।

संसद में सहमति बनाने की कोशिशें जारी
इस प्रस्ताव को लागू करने के लिए संविधान संशोधन आवश्यक है, जिसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होगी। सरकार इस दिशा में विभिन्न राजनीतिक दलों से संवाद कर रही है। गृह मंत्री स्तर पर कई बैठकों के जरिए समर्थन जुटाने की कोशिशें जारी हैं। वहीं विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा और सर्वदलीय बैठक की मांग उठाई है।

आरक्षण के भीतर आरक्षण की मांग
महिला आरक्षण के प्रस्ताव पर कुछ दलों ने अतिरिक्त मांगें भी रखी हैं। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी जैसे दलों का कहना है कि महिलाओं के लिए तय कोटे के भीतर अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए अलग से आरक्षण होना चाहिए। इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति बनाना सरकार के लिए एक चुनौती बना हुआ है।

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