HormuzStrait – होर्मुज मार्ग पर भारत का रुख स्पष्ट, जरूरी नहीं है अनुमति
HormuzStrait – होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल और गैस की आपूर्ति को लेकर जारी अनिश्चितताओं के बीच भारत सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि इस अहम समुद्री मार्ग से गुजरने के लिए किसी भी देश की अनुमति आवश्यक नहीं है। यह बयान ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की खबरें सामने आ रही थीं।

अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत स्वतंत्र आवागमन
बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिंह ने साफ किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के तहत होती है। उन्होंने कहा कि यह मार्ग वैश्विक नौवहन के लिए खुला है और यहां से गुजरने के लिए किसी विशेष अनुमति या शुल्क की आवश्यकता नहीं होती। जहाजों की आवाजाही संबंधित कंपनियां सुरक्षा हालात और संचालन से जुड़े पहलुओं को ध्यान में रखकर तय करती हैं।
ईरान से अनुमति की चर्चाओं का खंडन
हाल के दिनों में यह चर्चा थी कि फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों को ईरान से सहमति मिलने के बाद ही आगे बढ़ने की इजाजत मिल रही है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह की कोई बाध्यता लागू नहीं है और जहाजों की आवाजाही सामान्य प्रक्रिया के तहत होती है।
क्षेत्रीय तनाव से प्रभावित हुई आवाजाही
दरअसल, ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों और उसके जवाब में बढ़े तनाव के चलते इस क्षेत्र में जहाजों की गतिविधियां कुछ समय के लिए धीमी पड़ गई थीं। जलडमरूमध्य संकरा होने के कारण यहां प्रवेश और निकासी के लिए तय मार्गों का पालन करना अनिवार्य होता है, जिससे सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
कितने जहाज और कितना माल प्रभावित
सरकारी जानकारी के अनुसार, इस क्षेत्र में कई भारतीय जहाज विभिन्न कारणों से रुके हुए थे। इनमें पांच एलपीजी जहाज शामिल हैं, जिनमें करीब 2.3 लाख टन रसोई गैस मौजूद है। इसके अलावा एक एलएनजी टैंकर, चार कच्चे तेल के टैंकर, रासायनिक उत्पाद ले जाने वाला एक जहाज, तीन कंटेनर पोत और दो बल्क कैरियर भी प्रभावित हुए। कुछ जहाज रखरखाव के लिए ड्राई डॉक में भी थे।
भारत की ऊर्जा जरूरतें और विकल्प
भारत अपनी एलपीजी जरूरत का बड़ा हिस्सा और प्राकृतिक गैस का एक महत्वपूर्ण भाग इसी मार्ग से आयात करता है। हालांकि हालिया परिस्थितियों को देखते हुए देश ने वैकल्पिक स्रोतों से आपूर्ति बढ़ाने के प्रयास किए हैं। रूस, अमेरिका, पश्चिम अफ्रीका और लातिनी अमेरिका से कच्चे तेल की आपूर्ति में बढ़ोतरी कर आंशिक संतुलन बनाया गया है। इसके बावजूद औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में गैस आपूर्ति पर असर देखा गया है।
भारत पहुंच रहे एलपीजी टैंकर
इसी बीच कुछ राहत भरी खबर भी सामने आई है। एलपीजी से भरे दो प्रमुख जहाज—पाइन गैस और जग वसंत—फारस की खाड़ी से रवाना हो चुके हैं और भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इनमें से एक जहाज 26 मार्च को कांडला बंदरगाह पहुंचेगा, जबकि दूसरा 27 मार्च को न्यू मंगलौर पहुंचेगा। इन दोनों जहाजों में देश की लगभग एक दिन की घरेलू गैस खपत के बराबर एलपीजी मौजूद है।
भारतीय नाविकों की मौजूदगी और सुरक्षा
इन जहाजों पर बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भी तैनात हैं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बरती जा रही है। दोनों पोत उन भारतीय जहाजों में शामिल हैं जो क्षेत्र में तनाव बढ़ने के बाद प्रभावित हुए थे, लेकिन अब धीरे-धीरे स्थिति सामान्य होने के संकेत मिल रहे हैं।



