अंतर्राष्ट्रीय

EnergyCrisis – ईरान-अमेरिका संघर्ष से कई देशों में ईंधन संकट गहराया

EnergyCrisis – पश्चिम एशिया में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी संघर्ष को लगभग चार सप्ताह हो चुके हैं, लेकिन हालात अब भी सामान्य होने के संकेत नहीं दे रहे। इस टकराव का असर केवल युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि दुनिया के कई देशों में इसका सीधा प्रभाव देखने को मिल रहा है। खासकर ईंधन आपूर्ति पर पड़े असर ने कई अर्थव्यवस्थाओं को झकझोर दिया है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधा आने से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है।

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होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होने से बढ़ी चिंता
इस पूरे संकट की जड़ में होर्मुज जलडमरूमध्य का प्रभावित होना है, जो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है। दुनिया की कुल ईंधन खपत का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ईरान की ओर से इस मार्ग पर नियंत्रण कड़ा किए जाने के बाद कई देशों तक तेल की आपूर्ति सीमित हो गई है। इसका असर सीधे तौर पर कीमतों और उपलब्धता पर पड़ा है, जिससे आम लोगों से लेकर उद्योग तक प्रभावित हुए हैं।

फिलिपींस ने घोषित किया ऊर्जा आपातकाल
ईंधन की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में फिलिपींस शामिल है। सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया है। कोविड-19 महामारी के बाद यह पहला मौका है जब देश को इस तरह का कदम उठाना पड़ा है। राष्ट्रपति फर्डिनेंड मार्कोस जूनियर ने कहा कि ऊर्जा आपूर्ति में कमी का खतरा बढ़ रहा है, जिसे नियंत्रित करने के लिए तत्काल उपाय जरूरी हैं। देश में ईंधन बचाने के लिए सरकारी कर्मचारियों के काम के दिन कम किए गए हैं और बिजली खपत पर भी सीमाएं तय की गई हैं।

पाकिस्तान में बढ़ती कीमतों से दबाव
पाकिस्तान भी इस संकट से अछूता नहीं है। वहां पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, जिससे आम लोगों पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। जेट ईंधन और केरोसिन जैसे उत्पाद महंगे हो गए हैं। सरकार ने पहले ही खर्चों में कटौती के उपाय अपनाए थे, और अब वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्थाएं भी लागू की जा रही हैं ताकि ईंधन की खपत कम की जा सके।

वियतनाम में बचत के लिए अपील
वियतनाम में भी हालात चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं। सरकार ने कंपनियों और नागरिकों से ईंधन बचाने की अपील की है। कई संस्थानों को सलाह दी गई है कि जहां संभव हो, वहां कर्मचारियों को घर से काम करने की सुविधा दी जाए। परिवहन की जरूरत कम करने के लिए भी कदम उठाए जा रहे हैं, जिससे सीमित संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सके।

बांग्लादेश में शिक्षा और ऊर्जा पर असर
बांग्लादेश में स्थिति को देखते हुए सभी विश्वविद्यालयों को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। इसके साथ ही ईंधन की राशनिंग लागू की गई है, ताकि उपलब्ध संसाधनों को नियंत्रित तरीके से इस्तेमाल किया जा सके। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस संकट के चलते देश का ईंधन आयात खर्च काफी बढ़ने की आशंका है, जो अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

श्रीलंका में बिजली और ईंधन बचाने के उपाय
श्रीलंका में भी ईंधन संकट से निपटने के लिए सख्त कदम उठाए गए हैं। सरकार ने सड़कों की लाइटें, विज्ञापन बोर्ड और अन्य गैर-जरूरी रोशनी बंद करने का फैसला लिया है। इसके अलावा सरकारी दफ्तरों में एयर कंडीशनिंग के इस्तेमाल को सीमित करने के निर्देश दिए गए हैं। कर्मचारियों के लिए चार दिन का कार्य सप्ताह लागू किया गया है, ताकि ऊर्जा की खपत कम हो सके।

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