अंतर्राष्ट्रीय

LPGPrice – पाकिस्तान में गैस की कीमतों से बढ़ी चिंता, दिखा तनाव का असर

LPGPrice – ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई देने लगा है। पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच अलग-अलग देशों में उपभोक्ताओं की स्थिति भी अलग है। जहां भारत में एलपीजी उपभोक्ताओं को फिलहाल कीमतों के मामले में कुछ राहत मिल रही है, वहीं पाकिस्तान में यही स्थिति आम लोगों के लिए परेशानी का कारण बन चुकी है।

lpg price india vs pakistan rate comparison

पाकिस्तान में सरकारी और बाजार दरों में बड़ा अंतर

पाकिस्तान में एलपीजी की कीमतों को लेकर स्थिति जटिल बनी हुई है। वहां की नियामक संस्था के अनुसार एलपीजी की आधिकारिक कीमत करीब 225.84 पाकिस्तानी रुपये प्रति किलो तय की गई है। इसके आधार पर घरेलू सिलेंडर की कीमत लगभग 2,664 रुपये होती है।

हालांकि वास्तविक बाजार में उपभोक्ताओं को इससे कहीं अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है। कई जगहों पर एलपीजी 300 से 400 रुपये प्रति किलो तक बिक रही है। इसी तरह घरेलू सिलेंडर की कीमत 3,500 से लेकर 4,500 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि व्यावसायिक सिलेंडर की कीमत और भी अधिक देखी जा रही है।

भारत में कीमतें अपेक्षाकृत स्थिर

दूसरी ओर भारत में एलपीजी की कीमतें शहरों के अनुसार अलग-अलग जरूर हैं, लेकिन कुल मिलाकर स्थिर बनी हुई हैं। राजधानी दिल्ली में घरेलू सिलेंडर लगभग 913 रुपये में उपलब्ध है, जबकि मुंबई, चेन्नई, कोलकाता और अन्य बड़े शहरों में भी कीमतें इसी दायरे में हैं।

कमर्शियल सिलेंडर के दाम जरूर अधिक हैं, लेकिन उनमें भी हाल के दिनों में कोई असामान्य बढ़ोतरी नहीं देखी गई है। सरकारी नीतियों और सप्लाई प्रबंधन को इसकी एक बड़ी वजह माना जा रहा है।

दोनों देशों में कीमतों का अंतर साफ

अगर दोनों देशों की कीमतों की तुलना समान मात्रा के आधार पर की जाए, तो अंतर और स्पष्ट हो जाता है। भारतीय मानक के अनुसार 14.2 किलो के सिलेंडर की कीमत भारत में लगभग 900 से 950 रुपये के बीच है।

वहीं पाकिस्तान में इसी मात्रा के लिए उपभोक्ताओं को भारतीय मुद्रा में करीब 1,200 से 1,700 रुपये तक खर्च करने पड़ सकते हैं। इस हिसाब से वहां एलपीजी भारत की तुलना में काफी महंगी पड़ रही है।

कीमतों में अंतर के पीछे क्या कारण

विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान में एलपीजी की ऊंची कीमतों के पीछे कई कारण हैं। इनमें आयात पर अधिक निर्भरता, स्थानीय मुद्रा की कमजोरी और सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां प्रमुख हैं। इन कारकों के कारण वहां कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखना मुश्किल हो रहा है।

इसके विपरीत भारत में सरकारी हस्तक्षेप, सब्सिडी व्यवस्था और बेहतर वितरण प्रणाली कीमतों को संतुलित बनाए रखने में मदद करती है। यही वजह है कि वैश्विक दबाव के बावजूद यहां उपभोक्ताओं को अपेक्षाकृत राहत मिल रही है।

आम लोगों और कारोबार पर असर

पाकिस्तान में बढ़ती एलपीजी कीमतों का सीधा असर घरेलू बजट पर पड़ रहा है। जिन परिवारों को हर महीने दो से तीन सिलेंडर की जरूरत होती है, उनके खर्च में काफी बढ़ोतरी हो रही है। इसके अलावा होटल और रेस्टोरेंट जैसे कारोबार भी प्रभावित हो रहे हैं, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने लगे हैं।

विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों और मुद्रा की स्थिति के कारण कीमतों में और बदलाव देखने को मिल सकता है।

आने वाले समय पर नजर

ऊर्जा बाजार में जारी अनिश्चितता को देखते हुए यह कहना मुश्किल है कि कीमतें कब स्थिर होंगी। हालांकि मौजूदा हालात यह संकेत देते हैं कि वैश्विक घटनाक्रम का असर घरेलू बाजारों पर भी लगातार बना रह सकता है।

ऐसे में उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों के लिए जरूरी है कि वे बदलती परिस्थितियों पर नजर बनाए रखें और उसी के अनुसार अपने खर्च और योजनाएं तय करें।

Related Articles

Back to top button

Adblock Detected

Please remove AdBlocker first, and then watch everything easily.