Diplomacy – भारत और अजरबैजान ने संबंध सुधार की दिशा में बढ़ाया कदम
Diplomacy – भारत और अजरबैजान के बीच लंबे समय से ठंडे पड़े रिश्तों में अब सुधार के संकेत दिखने लगे हैं। शुक्रवार को बाकू में हुई उच्च स्तरीय कूटनीतिक बातचीत ने दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने की कोशिश की है। भारत की ओर से विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज ने प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया। यह कई वर्षों बाद दोनों पक्षों के बीच हुई व्यापक और औपचारिक बातचीत थी, जिसका उद्देश्य राजनीतिक विश्वास बहाल करना और सहयोग के नए क्षेत्रों की तलाश करना रहा।

ऑपरेशन सिंदूर के बाद क्यों बिगड़े थे रिश्ते
अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के जवाब में भारत ने मई 2025 के दौरान ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इस कार्रवाई में पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित नौ आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया गया। इस सैन्य कदम के दौरान अजरबैजान ने खुलकर पाकिस्तान का समर्थन किया और भारत की कार्रवाई पर आपत्ति जताई।
अजरबैजान के इस रुख से भारत में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। सोशल मीडिया पर बहिष्कार की मुहिम शुरू हो गई, जिसका असर पर्यटन और द्विपक्षीय संपर्कों पर भी पड़ा। इसके साथ ही भारत ने अजरबैजान की कुछ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भूमिका को लेकर सख्त रुख अपनाया, जिससे रिश्तों में दूरी और बढ़ गई।
नई वार्ता में किन मुद्दों पर हुई चर्चा
हालिया बैठक में दोनों देशों ने संबंधों को पटरी पर लाने के लिए कई महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया। बातचीत में व्यापार, तकनीक, ऊर्जा, फार्मा सेक्टर, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई। इसके अलावा, सीमा पार आतंकवाद से निपटने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया गया।
भारत ने अपने बयान में व्यापक सहयोग की संभावनाओं पर बल दिया, जबकि अजरबैजान ने आर्थिक और व्यावहारिक साझेदारी को केंद्र में रखा। दोनों पक्षों ने यह स्वीकार किया कि मतभेदों के बावजूद संवाद बनाए रखना जरूरी है।
मतभेदों की जड़ और संतुलन की कोशिश
अजरबैजान का मानना रहा है कि नागोर्नो-काराबाख मुद्दे पर भारत ने आर्मेनिया के पक्ष में झुकाव दिखाया था, जो उसके लिए चिंता का विषय रहा। इस पृष्ठभूमि में दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी पैदा हुई।
हालांकि, इस बार की बातचीत में अजरबैजान ने साफ संकेत दिए कि वह मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाने के पक्ष में है। दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि अलग-अलग दृष्टिकोण होने के बावजूद सहयोग के रास्ते बंद नहीं होने चाहिए।
क्षेत्रीय सुरक्षा और ईरान संकट पर चर्चा
बैठक के दौरान मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। खास तौर पर ईरान की स्थिति और उसके क्षेत्रीय प्रभाव पर विचार साझा किए गए।
इस दौरान एक सकारात्मक पहलू यह भी रहा कि भारत ने ईरान से अपने नागरिकों की सुरक्षित निकासी में अजरबैजान द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार जताया। रिपोर्ट के अनुसार, 200 से अधिक भारतीयों को अजरबैजानी मार्ग के जरिए सुरक्षित बाहर निकाला गया था, जो दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली का अहम संकेत माना जा रहा है।
आगे की रणनीति और कूटनीतिक पहल
सिबी जॉर्ज ने अपने दौरे के दौरान अजरबैजान के राष्ट्रपति के विदेश नीति सलाहकार हिकमत हाजियेव से भी मुलाकात की। इसके अलावा, विदेश कार्यालय परामर्श की सह-अध्यक्षता दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारियों ने की।
इन बैठकों में भारत के राजदूत अभय कुमार की मौजूदगी भी महत्वपूर्ण रही, जिन्होंने हाल ही में अपना कार्यभार संभाला है। दोनों देशों ने यह तय किया है कि इस संवाद प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा और अगला दौर नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।
वर्तमान परिस्थितियों में यह कूटनीतिक पहल दोनों देशों के लिए संबंधों को संतुलित करने और व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है।



