उत्तर प्रदेश

KidneyRacket – कानपुर में फर्जी टीम ने किया अवैध किडनी ट्रांसप्लांट

KidneyRacket – कानपुर में सामने आए कथित किडनी ट्रांसप्लांट मामले ने चिकित्सा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उनसे यह संकेत मिलता है कि जिस टीम ने ऑपरेशन को अंजाम दिया, उसमें कोई भी योग्य सर्जन शामिल नहीं था। बताया जा रहा है कि आठ लोगों की इस टीम में अधिकांश लोग बिना मान्यता के काम कर रहे थे। मामले की जांच तेज कर दी गई है और पुलिस लगातार आरोपियों की तलाश में जुटी है।

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टीम में सर्जन नहीं, ओटी स्टाफ ही कर रहा था ऑपरेशन

जांच में यह सामने आया है कि जिस व्यक्ति को डॉक्टर बताया जा रहा था, वह वास्तव में ऑपरेशन थिएटर से जुड़ा कर्मचारी था। उसका नाम मुदस्सर अली सिद्दीकी बताया जा रहा है, जो पहले एक अस्पताल में ओटी मैनेजर के रूप में काम कर चुका है।

पुलिस की एक टीम ने दिल्ली स्थित उसके घर पर छापा भी मारा, लेकिन वह वहां नहीं मिला। परिजनों ने भी स्वीकार किया है कि वह पेशे से डॉक्टर नहीं है। इस खुलासे के बाद पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है।

गिरफ्तार आरोपियों से मिली अहम जानकारी

इस मामले में गिरफ्तार किए गए दो आरोपियों—राजेश कुमार और कुलदीप सिंह—को जेल भेज दिया गया है। पूछताछ के दौरान उन्होंने बताया कि ऑपरेशन से जुड़े कई मामलों में वही व्यक्ति मुख्य भूमिका निभाता था, जिसे डॉक्टर बताया जा रहा था।

पुलिस के अनुसार, हाल ही में हुए ऑपरेशन के बाद कुछ आरोपी अलग-अलग स्थानों पर चले गए थे। इससे यह संकेत मिलता है कि यह पूरा नेटवर्क कई शहरों में सक्रिय हो सकता है।

ऑपरेशन से पहले अपनाई जाती थी अलग रणनीति

जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह द्वारा ऑपरेशन से पहले दो संभावित डोनर बुलाए जाते थे। मेडिकल जांच के बाद उनमें से एक को चुना जाता था, जबकि दूसरा व्यक्ति बैकअप के रूप में रखा जाता था।

यह तरीका दर्शाता है कि पूरी प्रक्रिया योजनाबद्ध तरीके से की जा रही थी। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की पहचान करने में जुटी है।

विदेश से जुड़े मामले की भी जांच

एक अन्य खुलासे में यह जानकारी सामने आई है कि मार्च महीने में एक विदेशी महिला का भी ऑपरेशन किया गया था। हालांकि इस संबंध में विस्तृत जानकारी अभी जुटाई जा रही है, लेकिन प्रारंभिक जांच में बड़ी रकम के लेनदेन की बात सामने आई है।

यह पहलू इस मामले को और गंभीर बनाता है, क्योंकि इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अवैध गतिविधियों की आशंका भी जुड़ सकती है।

पुलिस की कार्रवाई और आगे की जांच

पुलिस आयुक्त ने बताया कि मामले में शामिल अन्य संदिग्धों की तलाश जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क ने अब तक कितने ऑपरेशन किए हैं और किन-किन लोगों की इसमें भूमिका रही है।

स्वास्थ्य विभाग से भी इस मामले में सहयोग लिया जा रहा है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि संबंधित अस्पतालों में नियमों का पालन किया गया था या नहीं।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

इस पूरे घटनाक्रम ने निजी अस्पतालों की निगरानी और चिकित्सा प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों को रोकने के लिए कड़े नियमों के साथ-साथ उनके सख्त पालन की भी आवश्यकता है।

फिलहाल, जांच एजेंसियां मामले की हर कड़ी को जोड़ने में लगी हैं ताकि पूरे नेटवर्क का खुलासा किया जा सके और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जा सके।

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