FakeMedicine – दिल्ली पुलिस ने नकली दवाओं के बड़े गिरोह का किया भंडाफोड़
FakeMedicine – दिल्ली पुलिस ने एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए नकली जीवन रक्षक दवाओं के अवैध कारोबार का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में छह लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि मुख्य आरोपी अभी फरार बताया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के पास से करीब 2 करोड़ रुपये की नकली दवाएं और बड़ी मात्रा में कच्चा माल बरामद हुआ है। यह नेटवर्क लंबे समय से बाजार में गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं की नकली आपूर्ति कर रहा था।

छापेमारी में सामने आया बड़ा नेटवर्क
पुलिस को इस गिरोह के बारे में खुफिया जानकारी मिली थी, जिसके बाद 11 मार्च को शाहदरा इलाके में कार्रवाई की गई। यहां एक थोक दवा कारोबारी को गिरफ्तार किया गया, जिसके जरिए पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ। जांच के दौरान पता चला कि यह रैकेट कई राज्यों में फैला हुआ था और सुनियोजित तरीके से नकली दवाएं तैयार कर बाजार में पहुंचाई जा रही थीं।
डायबिटीज और बीपी की दवाओं पर फोकस
अधिकारियों के मुताबिक, गिरोह मुख्य रूप से शुगर, ब्लड प्रेशर और लिवर से जुड़ी बीमारियों की दवाओं के नकली संस्करण तैयार करता था। ये दवाएं आमतौर पर लंबे समय तक लेने वाली होती हैं, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। जब्त की गई दवाओं में कई लोकप्रिय ब्रांड के नाम शामिल हैं, जिनकी नकली पैकिंग तैयार कर उन्हें असली जैसा दिखाया जाता था।
नकली जीएसटी फर्मों का इस्तेमाल
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी फर्जी जीएसटी कंपनियों का सहारा लेकर अपने कारोबार को छिपाते थे। इन कंपनियों के जरिए नकली बिल तैयार किए जाते थे, जिससे लेनदेन को वैध दिखाया जा सके। पुलिस के अनुसार, इस तरह के फर्जी इनवॉइस का कुल मूल्य करीब 50 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है। यह पूरा सिस्टम टैक्स जांच से बचने और अवैध कमाई को सफेद करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
गिरफ्तार आरोपियों की भूमिका
पुलिस ने जिन लोगों को पकड़ा है, वे इस नेटवर्क के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े थे। इनमें दवा का थोक कारोबारी, सप्लायर और फर्जी कंपनियां संचालित करने वाले लोग शामिल हैं। सभी आरोपी मिलकर उत्पादन से लेकर वितरण तक की पूरी प्रक्रिया को संभाल रहे थे। पुलिस अब मुख्य संचालक की तलाश कर रही है, जो इस पूरे गिरोह का मास्टरमाइंड माना जा रहा है।
मुजफ्फरनगर में चल रही थी अवैध फैक्ट्री
जांच के दौरान पुलिस ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक अवैध दवा निर्माण इकाई का भी पता लगाया। यह यूनिट बड़े क्षेत्र में फैली हुई थी, जहां नकली दवाएं तैयार की जाती थीं। छापेमारी में टैबलेट बनाने की मशीनें, कैप्सूल भरने के उपकरण और पैकेजिंग सामग्री बरामद की गई। इसके अलावा हजारों खाली बोतलें भी मिलीं, जिन पर नामी कंपनियों के नकली लेबल लगाए जाते थे।
स्वास्थ्य के लिए बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की नकली दवाएं मरीजों के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं, क्योंकि इनमें सक्रिय तत्व या तो कम मात्रा में होते हैं या पूरी तरह अनुपस्थित रहते हैं। इससे बीमारी ठीक होने के बजाय और गंभीर हो सकती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि दवाएं केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही खरीदें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत दें।