EthanolPolicy – बिहार में इथेनॉल कोटा बढ़ाने की तैयारी, जल्द हटेगी कैपिंग
EthanolPolicy – बिहार में इथेनॉल उद्योग को लेकर एक अहम बदलाव की तैयारी हो रही है। राज्य सरकार के अनुरोध पर केंद्र सरकार ने इथेनॉल कोटा बढ़ाने और उस पर लगी कैपिंग खत्म करने पर सहमति दे दी है। उद्योग मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने सोमवार को सूचना भवन में मीडिया से बातचीत के दौरान यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि इस संबंध में औपचारिक आदेश जल्द जारी किए जाएंगे, जिससे राज्य के इथेनॉल उत्पादकों को राहत मिलने की उम्मीद है।

इथेनॉल सेक्टर को मिलेगी नई रफ्तार
राज्य का इथेनॉल उद्योग पिछले कुछ समय से कोटा सीमा के कारण दबाव में था। बिहार में करीब 15 इथेनॉल प्लांट हैं, जिनकी कुल उत्पादन क्षमता लगभग 50 करोड़ लीटर सालाना है। लेकिन केंद्र द्वारा निर्धारित कोटा लगातार घटता गया, जिससे उत्पादन पर असर पड़ा। पहले 38-40 करोड़ लीटर का कोटा था, जो बाद में घटकर 30 करोड़ और हाल में 18 से 20 करोड़ लीटर तक सीमित हो गया। इस कमी के कारण कई इकाइयों को उत्पादन घटाना पड़ा। अब कैपिंग हटने और कोटा बढ़ने से उद्योग को फिर से गति मिलने की संभावना है।
बैंकों की भूमिका पर सरकार सख्त
उद्योग मंत्री ने बैंकों के रवैये पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने साफ कहा कि जो बैंक राज्य में जमा के अनुपात में ऋण नहीं देंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उनका मानना है कि बैंक बिहार के लोगों के साथ न्याय नहीं कर रहे हैं और सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। साथ ही, नाबार्ड को इस वर्ष उद्यमियों को 4600 करोड़ रुपये का ऋण देने का लक्ष्य दिया गया है। पिछले वर्षों के आंकड़ों की तुलना में यह लक्ष्य काफी अधिक है, जिससे उद्यमिता को बढ़ावा देने की योजना है।
निवेश और रोजगार को लेकर बड़े लक्ष्य
राज्य सरकार अगले पांच वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने की योजना पर काम कर रही है। मंत्री के अनुसार, सरकार का लक्ष्य 50 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाना और एक करोड़ रोजगार के अवसर पैदा करना है। वर्ष 2025-26 के लिए 747 निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जिनकी कुल राशि 17,217 करोड़ रुपये से अधिक है। बियाडा के माध्यम से 317 निवेशकों को 404 एकड़ भूमि आवंटित की गई है, जिससे करीब 5500 करोड़ रुपये के निवेश और 22,500 से अधिक रोजगार की संभावनाएं बनी हैं।
बड़ी कंपनियों की बढ़ती दिलचस्पी
राज्य में निवेश को लेकर बड़े उद्योग समूह भी रुचि दिखा रहे हैं। बिरला, रिलायंस, कोका-कोला, मदर डेयरी, एचपीसीएल और श्याम स्टील जैसी कंपनियां विभिन्न परियोजनाओं में शामिल हैं। सरकार का कहना है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर बनाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं। बिहार को नेशनल सिंगल विंडो सिस्टम से जोड़ दिया गया है, जिससे निवेशकों को केंद्र और राज्य स्तर की स्वीकृतियां एक ही मंच पर मिल रही हैं।
औद्योगिक नीतियों को लेकर सरकार का दावा
उद्योग विभाग के सचिव कुंदन कुमार ने कहा कि राज्य सरकार उद्यमियों को बेहतर सुविधाएं देने के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार, बिहार की औद्योगिक नीतियां देश में प्रतिस्पर्धी मानी जा रही हैं और इन्हीं के आधार पर निवेशकों को आकर्षित किया जा रहा है। सरकार का फोकस नीतियों को सरल और प्रभावी बनाने पर है, ताकि निवेश प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं न आएं।
पुराने निवेशकों को भी मिलेगा लाभ
सरकार ने हाल ही में औद्योगिक प्रोत्साहन नीति 2025 लागू की है, लेकिन तकनीकी कारणों से पुराने निवेशकों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा था। मंत्री ने बताया कि इस समस्या को दूर करने के लिए जल्द ही नया प्रावधान लाया जाएगा, जिससे पुराने निवेशक भी नई नीति के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों का फायदा उठा सकें।
सड़क परियोजनाओं को मिली मंजूरी
राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में भी प्रगति हुई है। बिहार की 26 लंबित सड़क परियोजनाओं में से 21 को केंद्र सरकार की मंजूरी मिल गई है। इन परियोजनाओं पर जल्द काम शुरू होने की उम्मीद है। वहीं, पटना-पूर्णिया एक्सप्रेसवे के एलाइनमेंट से जुड़ी तकनीकी दिक्कतों को भी सुलझा लिया गया है और इसके लिए स्वीकृति प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।



